RBI News: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि भारत के वित्तीय क्षेत्र में हाल के वर्षों में आया बड़ा विदेशी निवेश किसी एक साल का परिणाम नहीं है, बल्कि यह लंबे समय तक किए गए सुधारों, मजबूत नीतियों और संस्थागत मजबूती का नतीजा है। एनडीटीवी प्रॉफिट को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिर और तेज विकास दर आगे भी विदेशी निवेश को आकर्षित करती रहेगी।
गवर्नर ने कहा कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी वैश्विक कंपनियों द्वारा भारत में किए जा रहे बड़े निवेश और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के तहत मिली मजबूत प्रतिबद्धताएं इस भरोसे को दर्शाती हैं। उन्होंने माना कि विदेशी निवेश हर साल एक समान नहीं रहता, लेकिन भारत बैंकिंग, टेक्नोलॉजी और अन्य प्रमुख सेक्टर्स में लगातार गुणवत्तापूर्ण निवेश आकर्षित कर रहा है।
वर्ष 2025 भारत के वित्तीय क्षेत्र के लिए खास रहा है। इस दौरान कई बड़ी विदेशी डील्स देखने को मिलीं। इनमें एमिरेट्स एनबीडी द्वारा आरबीएल बैंक में करीब 3 अरब डॉलर की हिस्सेदारी खरीदना, प्राइवेट इक्विटी फर्म ब्लैकस्टोन द्वारा फेडरल बैंक में 705 मिलियन डॉलर में 9.9 प्रतिशत हिस्सेदारी लेना और अबू धाबी स्थित आईएचसी द्वारा सम्मान कैपिटल में 1 अरब डॉलर में 43.46 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदना शामिल है।
मल्होत्रा ने जोर देकर कहा कि यह निवेश तात्कालिक मुनाफे के लिए आने वाली पूंजी नहीं है, बल्कि यह लॉन्ग-टर्म और धैर्य वाली पूंजी है। उन्होंने बताया कि बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) को मजबूत बनाने के लिए पिछले कई वर्षों में जो सुधार किए गए, उन्हीं का असर अब दिखाई दे रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरबीआई ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए किसी तरह के नए रेगुलेटरी बदलाव नहीं किए हैं। पात्रता और नियम पहले जैसे ही हैं, जिससे सिस्टम की पारदर्शिता और भरोसेमंद छवि बनी हुई है।
आरबीआई गवर्नर के अनुसार, केवल 2025 में ही प्राइवेट फाइनेंशियल संस्थाओं में लगभग 15 अरब डॉलर का निवेश आया है, जो भारतीय वित्तीय प्रणाली में गहरे भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत ने पहली छमाही में 8 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है, पूरे साल के लिए 7.4 प्रतिशत और अगले साल लगभग 7 प्रतिशत की ग्रोथ का अनुमान है। ऐसे में कैपिटल की मांग और निवेश का आकर्षण बना रहेगा।
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