SBI Report: वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में जीडीपी 8% से ऊपर, नई डेटा सीरीज से बदलेगी विकास की तस्वीर

खबर सार :-
एसबीआई रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू मांग, ग्रामीण खपत और नीतिगत समर्थन के दम पर आगे बढ़ रही है। तीसरी तिमाही में 8 प्रतिशत से अधिक जीडीपी वृद्धि का अनुमान देश की आर्थिक क्षमता को दर्शाता है। आधार वर्ष में बदलाव और नई डेटा पद्धति से विकास की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

SBI Report: वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में जीडीपी 8% से ऊपर, नई डेटा सीरीज से बदलेगी विकास की तस्वीर
खबर विस्तार : -

SBI Report: वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और भू-राजनीतिक तनाव के माहौल में भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ती दिख रही है। देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक State Bank of India की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 (वित्त वर्ष 2026) की तीसरी तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 8 से 8.1 प्रतिशत के बीच रह सकती है। यह अनुमान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक वृद्धि दर पर दबाव बना हुआ है।

SBI की रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च-आवृत्ति (हाई-फ्रीक्वेंसी) संकेतक बताते हैं कि अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहीं। विनिर्माण, सेवाएं और खपत से जुड़े आंकड़ों में निरंतर सुधार देखा गया है। ग्रामीण मांग में मजबूती और शहरी खपत में धीरे-धीरे आ रहा उछाल इस वृद्धि का प्रमुख आधार बन रहा है।

SBI Report-GDP Growth

उपभोक्ता खर्च में लगातार सुधार

एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष के अनुसार, ग्रामीण खपत को कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों से सकारात्मक समर्थन मिल रहा है। अच्छी फसल, सरकारी योजनाओं और आय में स्थिरता ने गांवों में मांग को सहारा दिया है। वहीं, राजकोषीय प्रोत्साहन और त्योहारी सीजन के बाद शहरी क्षेत्रों में भी उपभोक्ता खर्च में लगातार सुधार देखा गया है।

जीडीपी वृद्धि की मुख्य धुरी घरेलू मांग

पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस वृद्धि की मुख्य धुरी घरेलू मांग को माना जा रहा है। निर्यात में वैश्विक सुस्ती के बावजूद, आंतरिक खपत और निवेश गतिविधियां अर्थव्यवस्था को गति दे रही हैं। इस बीच, भारत अपने जीडीपी के आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने जा रहा है। नई सीरीज 27 फरवरी को जारी की जाएगी। आधार वर्ष में यह बदलाव मौजूदा आर्थिक संरचना को अधिक सटीक रूप से दर्शाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, खासकर डिजिटल कॉमर्स, ई-सेवाओं और तकनीकी प्लेटफॉर्म की बढ़ती भूमिका को ध्यान में रखते हुए।

सरकार के विभिन्न संशोधनों का असर

नई पद्धति में जीएसटी रिकॉर्ड, ई-वाहन पंजीकरण, प्राकृतिक गैस खपत और अन्य विस्तृत प्रशासनिक डेटा स्रोतों को शामिल किया जाएगा। इससे अनौपचारिक क्षेत्र के बेहतर आकलन में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन संशोधनों के बाद भारत की अर्थव्यवस्था का आकार और स्पष्ट रूप से सामने आ सकता है, जिससे वह वैश्विक स्तर पर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पद्धतिगत बदलावों और नई डेटा सीरीज के कारण संशोधन की सटीक सीमा का अनुमान लगाना फिलहाल कठिन है। वित्त वर्ष 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान और पिछले तीन वित्त वर्षों के संशोधित आंकड़े भी 27 फरवरी को जारी किए जाएंगे।

SBI Report-GDP Growth

वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी 6.8 से 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान

ताजा आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत की संभावित जीडीपी वृद्धि दर लगभग 7 प्रतिशत आंकी गई है और वित्त वर्ष 2027 में इसके 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। दूसरी ओर, वैश्विक अर्थव्यवस्था 2025 और 2026 में करीब 3.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, लेकिन ऊंचे कर्ज, भू-राजनीतिक तनाव, डिजिटलीकरण और डीकार्बोनाइजेशन जैसे संरचनात्मक बदलावों के कारण वैश्विक वृद्धि असमान रह सकती है।

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