Adani Group पर विदेशी निवेशकों का बढ़ा भरोसा, अमेरिकी फर्म Capital ग्रुप ने बढ़ाई हिस्सेदारी, Reliance में निवेश घटा
खबर सार :-
अमेरिकी निवेश फर्म कैपिटल ग्रुप का अडानी समूह में निवेश बढ़ाना और रिलायंस इंडस्ट्रीज में हिस्सेदारी घटाना भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर में बदलती निवेश रणनीति का संकेत माना जा रहा है। विदेशी निवेशक अब इंफ्रास्ट्रक्चर, पोर्ट्स और ग्रीन एनर्जी जैसे भविष्य केंद्रित क्षेत्रों में अधिक संभावनाएं देख रहे हैं। अडानी समूह में बढ़ता भरोसा आने वाले समय में वैश्विक निवेश और पूंजी जुटाने की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है।
खबर विस्तार : -
Adani Group Foreign Investment: : भारत के कॉरपोरेट जगत में विदेशी निवेशकों की रणनीति तेजी से बदलती नजर आ रही है। दिग्गज अमेरिकी निवेश फर्म कैपिटल ग्रुप (Capital Group) ने हाल के महीनों में अडानी ग्रुप (Adani Group) की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Limited) में निवेश लगातार कम किया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में इस बदलाव को भारतीय बाजार में निवेशकों की नई प्राथमिकताओं का संकेत माना गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कैपिटल ग्रुप ने अडानी समूह की तीन प्रमुख कंपनियों में लगभग 2 अरब डॉलर का निवेश किया है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब अडानी समूह नियामकीय चुनौतियों से उबरने के बाद फिर से निवेशकों का भरोसा जीतता दिखाई दे रहा है।
अडानी पोर्ट्स, पावर और ग्रीन एनर्जी में बढ़ी हिस्सेदारी
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कैपिटल ग्रुप ने अडानी पोर्टस और स्पेशल इकोनॉमिक जोन (Adani Ports and Special Economic Zone), अडानी पॉवर (Adani Power) और अडानी ग्रीन एनर्जी (Adani Green Energy) में अपनी हिस्सेदारी मजबूत की है। रिपोर्ट में कहा गया कि 5 मई को ओपन मार्केट के जरिए कैपिटल ग्रुप ने अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड में लगभग दो प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी। इस निवेश की कुल कीमत करीब 7,486 करोड़ रुपए यानी लगभग 776 मिलियन डॉलर बताई गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यह निवेश केवल वित्तीय सौदा नहीं, बल्कि अडानी समूह में विदेशी निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत है।
अडानी समूह पर लौटता दिख रहा निवेशकों का भरोसा
पिछले कुछ समय में अडानी समूह कई नियामकीय जांचों और अंतरराष्ट्रीय विवादों के कारण दबाव में रहा था। हालांकि हाल के महीनों में समूह के शेयरों में जोरदार रिकवरी देखने को मिली है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, नियामकीय स्तर पर राहत मिलने और कारोबारी प्रदर्शन मजबूत रहने से निवेशकों का भरोसा फिर से बढ़ा है। रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया कि अडानी इंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) के खिलाफ लगाए गए आरोपों को वापस लेने के अमेरिकी फैसले को समूह के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इसे न केवल अडानी समूह बल्कि भारतीय उद्योग जगत के लिए भी सकारात्मक संकेत बताया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अडानी समूह के लिए वैश्विक पूंजी जुटाने के रास्ते और मजबूत हो सकते हैं।
कैपिटल ग्रुप ने रिपोर्ट पर नहीं दी सीधी प्रतिक्रिया
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर कैपिटल ग्रुप और अडानी समूह की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। रिपोर्ट में कैपिटल ग्रुप के प्रवक्ता के हवाले से कहा गया कि कंपनी व्यक्तिगत शेयरों या शेयरधारिता पर टिप्पणी करने में असमर्थ है। इसके बावजूद बाजार में इस निवेश को लेकर काफी चर्चा है। निवेशकों का मानना है कि दुनिया की बड़ी निवेश कंपनियां आमतौर पर लंबी अवधि के संभावनाशील व्यवसायों में निवेश करती हैं। ऐसे में कैपिटल ग्रुप का यह कदम अडानी समूह के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज में लगातार घट रही हिस्सेदारी
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कैपिटल ग्रुप ने पिछले कुछ वर्षों में रिलायंस इंडस्ट्रीज में अपनी हिस्सेदारी लगातार घटाई है। रिपोर्ट में ब्लूमबर्ग द्वारा संकलित आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि फिलहाल कैपिटल ग्रुप के पास रिलायंस के लगभग 142 मिलियन शेयर हैं। यह आंकड़ा छह साल पहले लगभग 500 मिलियन शेयर था, जबकि मार्च 2017 में यह 755 मिलियन शेयर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। यानी पिछले कुछ वर्षों में कैपिटल ग्रुप ने रिलायंस में अपनी हिस्सेदारी में बड़ी कटौती की है।
रिलायंस के शेयरों में कमजोरी भी बनी वजह
विश्लेषकों का मानना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में पिछले एक साल के दौरान आई कमजोरी भी निवेश में कटौती की एक वजह हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में बीते एक वर्ष में 8.36 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि रिलायंस अब भी भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल है, लेकिन विदेशी निवेशकों का झुकाव फिलहाल इंफ्रास्ट्रक्चर, पोर्ट्स और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टरों की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अडानी समूह इन क्षेत्रों में तेजी से विस्तार कर रहा है, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।
भारतीय बाजार में बदल रही विदेशी निवेश रणनीति
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशक अब केवल पारंपरिक बिजनेस मॉडल तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे ऐसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रहे हैं जहां लंबी अवधि में तेज ग्रोथ की संभावना है। ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, पोर्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर इसी श्रेणी में आते हैं। अडानी समूह की इन क्षेत्रों में मजबूत मौजूदगी और सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्रित नीतियां विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। यही वजह है कि हाल के समय में अडानी समूह के शेयरों में तेजी देखने को मिली है।
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