International Tea Day: भारत की चाय अब सिर्फ देशवासियों की पसंद नहीं रही, बल्कि इसकी खुशबू और स्वाद दुनियाभर में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के मौके पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि बीते 12 वर्षों में भारत के चाय निर्यात में 93 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2013-14 में जहां चाय निर्यात का मूल्य 4,509 करोड़ रुपए था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 तक यह बढ़कर 8,719 करोड़ रुपए पहुंच गया है।
सरकार के मुताबिक भारतीय चाय ने लगातार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत की है। बेहतर गुणवत्ता, आधुनिक उत्पादन तकनीकों और भारतीय चाय बोर्ड के प्रचार-प्रसार अभियानों का इसमें अहम योगदान माना जा रहा है। दुनिया के कई देशों में भारतीय चाय की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे निर्यातकों और चाय उत्पादकों को बड़ा लाभ मिल रहा है। पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि भारत में चाय केवल एक पेय पदार्थ नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी, संस्कृति और परंपराओं का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग की पहाड़ियों से लेकर असम की घाटियों और नीलगिरी के बागानों तक हर क्षेत्र अपनी अलग खुशबू और स्वाद के जरिए भारतीय चाय को खास बनाता है।

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादित चाय की अलग-अलग किस्में दुनिया भर में अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं। दार्जिलिंग चाय को उसकी हल्की खुशबू और प्रीमियम गुणवत्ता के लिए जाना जाता है, जबकि असम की चाय अपने गाढ़े स्वाद और मजबूत रंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में पसंद की जाती है। दक्षिण भारत के नीलगिरी क्षेत्र की चाय भी अपने अनूठे फ्लेवर की वजह से निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय चाय उद्योग ने पिछले कुछ वर्षों में गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया है। यही वजह है कि भारतीय चाय को यूरोप, मध्य पूर्व, रूस और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में नई पहचान मिली है।
भारतीय चाय उद्योग केवल निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार में भी अहम भूमिका निभाता है। सरकार के अनुसार संगठित क्षेत्र में चाय उद्योग लगभग 12 लाख श्रमिकों को रोजगार देता है। इनमें करीब 58 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो चाय उत्पादन, पत्तियों की तुड़ाई और प्रसंस्करण जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। गोयल ने पहले भी कहा था कि महिलाएं भारत के चाय क्षेत्र की प्रगति की मुख्य ताकत हैं। उनकी मेहनत और समर्पण के कारण भारतीय चाय उद्योग वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहा है।
वित्त वर्ष 2025 में भारत ने कुल 263 मिलियन किलोग्राम चाय का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत 7,818 करोड़ रुपए रही। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चाय की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर इसी तरह ध्यान दिया जाता रहा तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक चाय निर्यात में और बड़ी हिस्सेदारी हासिल कर सकता है।
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