CEA Big statement: भारत बनेगा दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

खबर सार :-
भारत की तेज जीडीपी वृद्धि, संरचनात्मक सुधार और एआई आधारित आर्थिक रणनीति उसे दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं। हालांकि विनिमय दर जैसे बाहरी कारक चुनौती बने रह सकते हैं, लेकिन घरेलू नीतिगत स्थिरता और पूंजी प्रवाह में सुधार से भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति और सशक्त होने की संभावना है।

CEA Big statement: भारत बनेगा दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
खबर विस्तार : -

Indian Economic Survey: भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने विश्वास जताया है कि भारत अगले कुछ वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। उनका कहना है कि मौजूदा आर्थिक रुझान और विकास दर के अनुमान इस दिशा में स्पष्ट संकेत दे रहे हैं।

वर्ष 2026 में देश की नई  GDP श्रृंखला में वृद्धि

सीईए के अनुसार, 2022-23 को आधार वर्ष मानते हुए नई जीडीपी श्रृंखला में वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के लिए देश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पूरे वित्त वर्ष के लिए यह दर 7.6 प्रतिशत रहने की संभावना है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था न केवल स्थिर है बल्कि निरंतर प्रगति की राह पर अग्रसर है। नागेश्वरन ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद भारत की विकास दर दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज बनी हुई है। उन्होंने बताया कि जी20 देशों के बीच भी भारत वृद्धि दर के मामले में अग्रणी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि किसी विशेष वैश्विक रैंक तक पहुंचना केवल घरेलू प्रदर्शन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि विनिमय दर जैसे बाहरी कारकों का भी प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि 2025 में विनिमय दर भारत के पक्ष में नहीं रही, जिसका स्वाभाविक असर देखने को मिला।

Indian Economy-Economic Reforms-GDP

नीतिगत सुधार और संरचनात्मक बदलाव

सीईए ने जोर देते हुए कहा कि भारत को उन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो उसके नियंत्रण में हैं। उन्होंने बताया कि नीतिगत सुधार और संरचनात्मक बदलाव देश में कम से कम 7 प्रतिशत वास्तविक और 10 से 11 प्रतिशत नॉमिनल, गैर-मुद्रास्फीति आधारित वृद्धि का आधार तैयार कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह सतत विकास भारत को वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में मजबूत स्थिति दिलाएगा। उन्होंने व्यापार समझौतों और भारत में तेजी से विकसित हो रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इकोसिस्टम को भी भविष्य की बड़ी ताकत बताया। नागेश्वरन के अनुसार, जो पहलू कभी 2025 में कमजोरी माने जा रहे थे, वे अब भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त में बदल सकते हैं। इन पहलों से विदेशी पूंजी प्रवाह में सुधार होगा और विनिमय दर को स्थिरता मिलेगी।

भारतीय GDP का डॉलर मूल्य

सीईए का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय जीडीपी का डॉलर मूल्य रुपए में अर्थव्यवस्था के वास्तविक प्रदर्शन को अधिक सटीक रूप से दर्शाएगा। इससे भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति और स्पष्ट होगी। इस बीच, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि संशोधित जीडीपी श्रृंखला भारतीय अर्थव्यवस्था की अधिक सशक्त और सटीक तस्वीर पेश करती है। उनके अनुसार, इन आंकड़ों का वास्तविक प्रभाव समय के साथ स्पष्ट होगा, लेकिन मौजूदा संकेतक सकारात्मक दिशा की ओर इशारा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत इसी गति से आगे बढ़ता रहा, तो वह न केवल आकार में बल्कि गुणवत्ता और स्थिरता के लिहाज से भी वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में उभरेगा। मजबूत नीतियां, सुधारों की निरंतरता और तकनीकी नवाचार इस लक्ष्य को हासिल करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

 

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