टीसीएस नासिक केस में एसआईटी की बड़ी कार्रवाई, दूसरी चार्जशीट दाखिल; धर्म परिवर्तन और उत्पीड़न के आरोपों की जांच तेज
खबर सार :-
नासिक टीसीएस केस में एसआईटी की दूसरी चार्जशीट दाखिल होने के बाद जांच और गंभीर हो गई है। महिला कर्मचारियों द्वारा लगाए गए उत्पीड़न और कथित धर्म परिवर्तन के आरोपों ने आईटी सेक्टर में कार्यस्थल सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और एसआईटी की आगे की कार्रवाई इस संवेदनशील मामले की दिशा तय करेगी।
खबर विस्तार : -
TCS Nasik Case: महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) कार्यालय में कथित यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों से जुड़े मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी जांच को और तेज कर दिया है। गुरुवार को एसआईटी ने नासिक की अदालत में दूसरी चार्जशीट दाखिल करते हुए कई आरोपियों के खिलाफ गंभीर आरोपों का विस्तृत ब्यौरा पेश किया। इस कार्रवाई को मामले की जांच में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
आठ एफआईआर से जुड़ी दूसरी चार्जशीट अदालत में पेश
अधिकारियों के अनुसार, यह दूसरी चार्जशीट मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज आठ अलग-अलग एफआईआर से संबंधित है। आरोपपत्र नासिक स्थित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दाखिल किया गया। चार्जशीट में जिन लोगों के नाम शामिल किए गए हैं उनमें रजा रफीक मेमन, शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी, अश्विनी अशोक चैनानी, तौसीफ बिलाल अत्तार, शफी भीखन शेख, दानिश एजाज शेख, निदा एजाज खान और अन्य आरोपी शामिल हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपियों पर महिला कर्मचारियों का शोषण करने, धार्मिक दबाव बनाने और मानसिक प्रताड़ना देने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
पहली चार्जशीट में 1500 पन्नों का ब्यौरा
इससे पहले 22 मई को एसआईटी ने देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज एक अन्य मामले में लगभग 1,500 पन्नों की पहली चार्जशीट दायर की थी। यह मामला भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। पहली चार्जशीट में दानिश एजाज शेख, तौसीफ बिलाल अत्तार, निदा एजाज खान और मतीन मजीद पटेल को आरोपी बनाया गया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, कई महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि उन्हें कार्यस्थल पर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने का दबाव बनाया गया।
व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए कथित दबाव बनाने के आरोप
शिकायतकर्ताओं ने एसआईटी को दिए अपने बयान में कहा कि कुछ आरोपी कर्मचारियों को व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए निशाना बनाते थे। आरोप है कि महिलाओं पर नमाज पढ़ने, मांसाहारी भोजन अपनाने और कुछ विशेष धार्मिक परंपराओं का पालन करने के लिए दबाव बनाया गया। कुछ पीड़िताओं ने यह भी दावा किया कि उनसे धार्मिक प्रतीक धारण करने और अपनी जीवनशैली बदलने के लिए कहा गया। जांच अधिकारियों के अनुसार, इन आरोपों की पुष्टि के लिए डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
एआईएमआईएम पार्षद मतीन पटेल से भी पूछताछ
मामले में राजनीतिक कड़ी भी सामने आई है। पुलिस ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पार्षद मतीन पटेल से भी पूछताछ की है। उन पर आरोप है कि उन्होंने आरोपी निदा खान को फरार रहने के दौरान कथित तौर पर शरण दी थी। अधिकारियों के अनुसार, मतीन पटेल से 25 मई को करीब नौ घंटे तक पूछताछ की गई। इसके बाद उन्हें एक बार फिर 1 जून को जांच में शामिल होने के लिए तलब किया गया है। एसआईटी इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों को किसी प्रकार की बाहरी मदद या संरक्षण मिला था।
जानें क्या है टीसीएस नासिक केस ?
महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) केंद्र से जुड़ा यौन उत्पीड़न और कथित जबरन धर्मांतरण मामला लगभग तीन महीने से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। मार्च और अप्रैल 2026 में कई महिला कर्मचारियों ने टीम लीडर्स और अधिकारियों पर मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न, शादी का झांसा देकर संबंध बनाने के दबाव और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए नासिक पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच के दौरान महिला पुलिसकर्मियों को गुप्त रूप से कंपनी में कर्मचारी बनाकर तैनात किया गया, ताकि सबूत जुटाए जा सकें। पुलिस ने जांच में निदा खान और दानिश शेख समेत कई कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। मामले की जांच के बाद 1500 पन्नों की पहली चार्जशीट अदालत में दाखिल की गई थी, जिसमें व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को अहम आधार बनाया गया है। टीसीएस ने भी आरोपियों को निलंबित कर जांच में सहयोग देने की बात कही है।
आईटी सेक्टर में कार्यस्थल सुरक्षा पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने आईटी सेक्टर में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। टीसीएस जैसी प्रतिष्ठित कंपनी का नाम सामने आने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि कंपनी की ओर से अब तक इस पूरे प्रकरण पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह मामला कार्यस्थल पर उत्पीड़न और धार्मिक दबाव से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। वहीं सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की है।
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