वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में दिखा जबरदस्त जोश, सेंसेक्स 76 हजार के पार, निफ्टी 23,951
खबर सार :-
वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेत, अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भारतीय शेयर बाजार को मजबूती दी है। आईटी और बैंकिंग शेयरों की खरीदारी से सेंसेक्स 76 हजार के ऊपर पहुंच गया। यदि अंतरराष्ट्रीय माहौल सकारात्मक बना रहता है तो आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है।
खबर विस्तार : -
Indian stock market: मजबूत वैश्विक संकेतों और अमेरिकी बाजारों में आई तेजी का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बाजार हरे निशान में खुला और शुरुआती कारोबार में निवेशकों का भरोसा मजबूत नजर आया। बीएसई सेंसेक्स 213 अंकों की बढ़त के साथ 76,080 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 44 अंकों की तेजी के साथ 23,951 पर कारोबार करता दिखा। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान के बीच संभावित सीजफायर समझौते और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल तैयार किया है। इसी का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।
आईटी सेक्टर बना बाजार का सबसे बड़ा सहारा
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में आईटी शेयरों ने बाजार को मजबूती देने में सबसे अहम भूमिका निभाई। निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे अधिक बढ़त दर्ज करने वाला सेक्टर रहा। इंफोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी टेक बाजार में मजबूती और डॉलर की स्थिति स्थिर रहने से भारतीय आईटी कंपनियों को फायदा मिलने की उम्मीद बढ़ी है। यही वजह रही कि निवेशकों ने आईटी शेयरों में जमकर दांव लगाया। इसके अलावा निफ्टी पीएसयू बैंक, रियल्टी, फार्मा, मीडिया, हेल्थकेयर, प्राइवेट बैंक, सर्विसेज, एनर्जी और कमोडिटी सेक्टर भी बढ़त में कारोबार करते दिखाई दिए। हालांकि, निफ्टी इंडिया डिफेंस, इंफ्रा, पीएसई और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में हल्की कमजोरी दर्ज की गई।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मिला-जुला रुख
बाजार में बड़े शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में मिश्रित कारोबार देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स मामूली 18 अंकों की बढ़त के साथ 62,578 पर पहुंचा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 50 अंक चढ़कर 18,345 पर कारोबार करता दिखा। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं। यही कारण है कि ब्लूचिप कंपनियों में निवेश बढ़ा है।
सेंसेक्स के इन शेयरों ने दिखाई मजबूती
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में कई बड़े शेयर तेजी के साथ कारोबार करते नजर आए। इंफोसिस, ट्रेंट, एचसीएल टेक, टीसीएस, मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा, एलएंडटी, एक्सिस बैंक, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, एसबीआई, हिंदुस्तान यूनिलीवर और टाइटन प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे। वहीं दूसरी ओर भारती एयरटेल, आईटीसी, इंडिगो, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा और बजाज फिनसर्व जैसे शेयरों में हल्की बिकवाली देखी गई।
एशियाई बाजारों में भी दिखा सकारात्मक माहौल
भारतीय बाजार के साथ-साथ एशियाई बाजारों में भी तेजी का माहौल देखने को मिला। टोक्यो, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता के बाजार हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। हालांकि, शंघाई बाजार में कमजोरी बनी रही। अमेरिकी शेयर बाजार भी गुरुवार को मजबूती के साथ बंद हुए थे। डाओ जोन्स मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि नैस्डैक में करीब एक प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। अमेरिकी टेक शेयरों में आई मजबूती ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।
अमेरिका-ईरान वार्ता से बाजार को मिला सहारा
वैश्विक बाजारों में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच 60 दिन के सीजफायर को लेकर समझौते की दिशा में सकारात्मक प्रगति हुई है। हालांकि अंतिम मंजूरी अभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बाकी बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि इस समझौते का मकसद युद्धविराम को आगे बढ़ाने के साथ परमाणु कार्यक्रम पर औपचारिक बातचीत शुरू करना है। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट को खोलने को लेकर भी चर्चा जारी है।
कच्चे तेल में गिरावट से भारत को राहत
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 1.17 प्रतिशत टूटकर 87.88 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 0.85 प्रतिशत गिरकर 91.94 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट राहत की खबर मानी जाती है। इससे महंगाई पर दबाव कम होने और कंपनियों की लागत घटने की उम्मीद रहती है, जिसका सकारात्मक असर शेयर बाजार पर दिखाई देता है।
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