Indian Stock Market DII Strong: भारतीय शेयर बाजार में वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की भारी बिकवाली देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद घरेलू निवेशकों ने बाजार को मजबूती से संभाले रखा। नई रिपोर्टों के अनुसार, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) और लगातार बढ़ते एसआईपी निवेश ने भारतीय इक्विटी मार्केट को स्थिरता प्रदान की है। यही वजह है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी पूंजी निकासी के बावजूद भारतीय बाजार अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है।
वेंचुरा की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में एफआईआई ने रिकॉर्ड स्तर पर बिकवाली की। इस दौरान विदेशी निवेशकों ने 1,31,122 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की, जो अब तक का सबसे बड़ा तिमाही आउटफ्लो माना जा रहा है। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 2,44,052 करोड़ रुपए का निवेश कर बाजार को मजबूत सहारा दिया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय निवेशकों का शेयर बाजार पर भरोसा लगातार मजबूत हुआ है। वित्त वर्ष 2026 में डीआईआई निवेश बढ़कर 8,43,206 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 5,71,959 करोड़ रुपए था। यानी एक साल में घरेलू निवेश में भारी उछाल दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि म्यूचुअल फंड में लगातार एसआईपी निवेश, रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और लंबी अवधि के निवेश के प्रति जागरूकता ने भारतीय बाजार को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। यही कारण है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद बाजार में घबराहट सीमित रही।
रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में अब तक एफआईआई द्वारा 30,374 करोड़ रुपए की बिकवाली की जा चुकी है। इसके साथ ही साल 2026 में कुल विदेशी बिकवाली का आंकड़ा 2,22,343 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा पूरे साल 2025 की कुल बिकवाली 1,66,283 करोड़ रुपए से भी काफी ज्यादा है। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और अन्य देशों के बाजारों में बेहतर रिटर्न मिलने की वजह से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से दूरी बना रहे हैं। इसके अलावा भारत में कंपनियों की आय वृद्धि में सुस्ती भी एफआईआई की चिंता का कारण बनी हुई है।
मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी संभव है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि भारतीय रुपया स्थिर रहता है और कंपनियों की आय में सुधार होता है, तो एफआईआई दोबारा भारतीय बाजार में निवेश बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, उपभोक्ता मांग और दीर्घकालिक विकास क्षमता अब भी वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। हालांकि निकट भविष्य में वैश्विक ब्याज दरों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर बाजार पर बना रह सकता है।
इससे पहले आई जेफरीज की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि भारतीय बाजार की मजबूती के पीछे घरेलू निवेशकों की बड़ी भूमिका है। रिपोर्ट के अनुसार, लगातार बढ़ते एसआईपी निवेश ने बाजार में नकदी बनाए रखी, जिससे विदेशी निवेशकों को बाजार से निकलने का रास्ता मिला लेकिन बाजार पर अत्यधिक दबाव नहीं पड़ा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हाल में रुपये में आई कमजोरी केवल चालू खाते के घाटे या कच्चे तेल की कीमतों की वजह से नहीं थी, बल्कि इसका एक कारण विदेशी निवेशकों की निकासी भी रही। इसके बावजूद घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने भारतीय बाजार को संतुलित बनाए रखा।
अन्य प्रमुख खबरें
भारत-कनाडा रिश्तों में नई उड़ान: साल के अंत तक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर लग सकती है मुहर
2026-05-26
2026-05-26
दिल्ली में CNG का झटका: 11 दिनों में 6 रुपए महंगी हुई गैस, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी इजाफा
2026-05-26
NBCC का Q4 प्रदर्शन: मुनाफा बढ़ा, आय में हल्की गिरावट के बावजूद मजबूत नतीजे
2026-05-25
वैश्विक राहत की हवा से बाजार में तूफानी उछाल: सेंसेक्स 1,073 अंक उछला, निफ्टी 24,000 के पार
2026-05-25
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का दावाः “भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, डर नहीं विश्वास जरूरी”
2026-05-25
2026-05-25
भारतीय शेयर बाजार को मिला ग्लोबल बूस्ट, सेंसेक्स 76 हजार के पार, निवेशकों में उत्साह
2026-05-25
उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक हर जगह पेट्रोल, डीजल की मार, दाम पहुंचा 100 के पार
2026-05-25
पेट्रोल, डीजल के साथ सीएनजी के दाम में भी इजाफा, पिछले 10 दिनों में 5 रुपये बढ़ा
2026-05-23
भारत के UPI को साइप्रस में मिली एंट्री, एनपीसीआई और यूरोबैंक के बीच हुआ समझौता
2026-05-23
2026-05-22
SBI कर्मचारियों द्वारा हड़ताल, 5 दिन प्रभावित रहेंगे बैंक के काम
2026-05-22
वैश्विक तनाव के बीच सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव, सीमित दायरे में हो रहा कारोबार
2026-05-22
2026-05-22