कोल इंडिया में हिस्सेदारी बेचकर सरकार जुटाएगी 5,000 करोड़ रुपये, OFS को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स

खबर सार :-
कोल इंडिया में दो फीसदी हिस्सेदारी बिक्री को शुरुआती चरण में ही मजबूत निवेशक समर्थन मिला है। सरकार इस ओएफएस के जरिए करीब 5,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है। डिस्काउंट प्राइसिंग और कंपनी की मजबूत बाजार स्थिति ने संस्थागत निवेशकों को आकर्षित किया है। यह कदम सरकार के विनिवेश कार्यक्रम को गति देने के साथ पूंजी बाजार में सरकारी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कोल इंडिया में हिस्सेदारी बेचकर सरकार जुटाएगी 5,000 करोड़ रुपये, OFS को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स
खबर विस्तार : -

Coal India Stake Sale: केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कोयला खनन कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Limited) में अपनी दो फीसदी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार ने बुधवार को बिक्री पेशकश यानी ऑफर फॉर सेल (OFS) को गैर-खुदरा निवेशकों के लिए खोल दिया। इस हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को करीब 5,000 करोड़ रुपये जुटने की उम्मीद है।

सरकार ने इस ओएफएस के लिए न्यूनतम मूल्य 412 रुपये प्रति शेयर तय किया है, जो मंगलवार के बंद भाव से लगभग 10 प्रतिशत कम है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए रखा गया यह डिस्काउंट बाजार में चर्चा का विषय बना हुआ है। शुरुआती संकेतों से साफ है कि निवेशकों ने इस बिक्री पेशकश में मजबूत रुचि दिखाई है।

दो दिन तक चलेगी हिस्सेदारी बिक्री प्रक्रिया

कोल इंडिया में हिस्सेदारी बिक्री की यह प्रक्रिया दो दिनों तक चलेगी। सरकार कुल लगभग 12.32 करोड़ शेयर बेच रही है। इसमें एक फीसदी का ग्रीनशू विकल्प भी शामिल किया गया है, जिससे मांग अधिक होने पर अतिरिक्त शेयर भी बेचे जा सकेंगे। गैर-खुदरा निवेशकों के लिए बोली प्रक्रिया बुधवार को शुरू हुई, जबकि खुदरा निवेशकों को 29 मई को निवेश का मौका मिलेगा। 28 मई को शेयर बाजार बंद रहने के कारण खुदरा श्रेणी के लिए अलग दिन निर्धारित किया गया है। सरकार की यह पहल चालू वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान किसी सरकारी कंपनी में दूसरी बड़ी हिस्सेदारी बिक्री मानी जा रही है। इससे पहले सरकार Central Bank of India में 8.08 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 2,266 करोड़ रुपये जुटा चुकी है।

पहले घंटे में ही OFS को मिला शानदार रिस्पॉन्स

ओएफएस खुलने के महज एक घंटे के भीतर ही गैर-खुदरा निवेशकों की ओर से भारी प्रतिक्रिया देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक निवेशकों ने करीब 27.39 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई। यह गैर-खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित 5.54 करोड़ शेयरों से कई गुना अधिक है। संकेतात्मक बोली मूल्य लगभग 414.57 रुपये प्रति शेयर रहा, जो सरकार द्वारा तय न्यूनतम मूल्य से थोड़ा ऊपर है। इससे यह संकेत मिलता है कि संस्थागत निवेशकों को कंपनी के भविष्य और कोयला क्षेत्र की मांग पर भरोसा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में लगातार बढ़ती मांग और कोल इंडिया की मजबूत बाजार स्थिति निवेशकों को आकर्षित कर रही है। देश में बिजली उत्पादन के लिए कोयले की जरूरत लगातार बनी हुई है, जिससे कंपनी के कारोबार को स्थिरता मिल रही है।

शेयर बाजार में दिखा दबाव

हालांकि हिस्सेदारी बिक्री की घोषणा के बाद शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों पर दबाव भी देखने को मिला। बुधवार को कारोबार के दौरान कोल इंडिया का शेयर करीब 2.30 प्रतिशत गिरकर 447.70 रुपये पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार विश्लेषकों के अनुसार ओएफएस में डिस्काउंट पर शेयर उपलब्ध होने की वजह से खुले बाजार में शेयर की कीमतों पर अस्थायी दबाव बनना सामान्य बात है। हालांकि लंबी अवधि में कंपनी की मजबूत बुनियाद और स्थिर नकदी प्रवाह निवेशकों का भरोसा बनाए रख सकते हैं।

विनिवेश लक्ष्य की दिशा में सरकार का बड़ा कदम

केंद्र सरकार लगातार विनिवेश कार्यक्रम के जरिए सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी कम कर राजस्व जुटाने पर जोर दे रही है। कोल इंडिया में हिस्सेदारी बिक्री भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार का उद्देश्य बाजार से पूंजी जुटाने के साथ-साथ सार्वजनिक कंपनियों में खुदरा और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौजूदा ओएफएस सफल रहता है तो आने वाले महीनों में अन्य सरकारी कंपनियों में भी हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

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