Union Bank Report: जीएसटी कटौती से मांग में उछाल, तीसरी तिमाही में 8.3% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान, नए बेस ईयर से आंकड़ों में बदलाव की संभावना

खबर सार :-
जीएसटी दरों में कटौती से बढ़ी मांग ने अर्थव्यवस्था को नई गति दी है और तीसरी तिमाही में 8.3 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान इसी मजबूती को दर्शाता है। हालांकि बेस ईयर में बदलाव और वैश्विक अनिश्चितताएं आगे की तस्वीर बदल सकती हैं। यदि घरेलू खपत और निवेश का रुख सकारात्मक बना रहा, तो भारत निकट भविष्य में भी उच्च विकास दर कायम रख सकता है।

Union Bank Report: जीएसटी कटौती से मांग में उछाल, तीसरी तिमाही में 8.3% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान, नए बेस ईयर से आंकड़ों में बदलाव की संभावना
खबर विस्तार : -

Union Bank Report GDP Growth: वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में हालिया कटौती के बाद बाजार में बढ़ी मांग का असर अब अर्थव्यवस्था के आंकड़ों में भी दिख सकता है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 8.3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। हालांकि, पिछले वर्ष के ऊंचे आधार प्रभाव (बेस इफेक्ट) के कारण तुलना का पैमाना चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।

यूनियन बैंक की रिपोर्ट में क्या कहा गया?

सरकारी बैंक Union Bank of India की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में सकल मूल्य वर्धन (GVA) वृद्धि दर 8 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष की समान तिमाही के 6.5 प्रतिशत से काफी अधिक है, हालांकि दूसरी तिमाही के 8.1 प्रतिशत की तुलना में हल्की नरमी संभव है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 27 फरवरी को जारी होने वाले आधिकारिक आंकड़ों में जीडीपी वृद्धि 8.3 प्रतिशत रह सकती है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 6.4 प्रतिशत से उल्लेखनीय रूप से ज्यादा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी दरों में कटौती से उपभोक्ता खर्च में तेजी आई है, जिससे विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को बल मिला है।

नॉमिनल जीडीपी और महंगाई का असर

रिपोर्ट के अनुसार, नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर घटकर 8.5 प्रतिशत रह सकती है। यह दूसरी तिमाही के 8.7 प्रतिशत और पिछले वर्ष की समान अवधि के 10.3 प्रतिशत से कम होगी। इसकी प्रमुख वजह महंगाई में कमी और जीडीपी डिफ्लेटर में गिरावट मानी जा रही है। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, महंगाई में नरमी से उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ी है, लेकिन नॉमिनल वृद्धि दर पर इसका सांख्यिकीय प्रभाव पड़ता है। वास्तविक वृद्धि मजबूत रहने के बावजूद नाममात्र वृद्धि दर में गिरावट का संकेत इसी कारण मिलता है।

बेस ईयर में बदलाव से बदल सकती है तस्वीर

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मौजूदा अनुमान पुराने बेस ईयर पर आधारित हैं। Ministry of Statistics and Programme Implementation (एमओएसपीआई) द्वारा जीडीपी के लिए बेस ईयर में बदलाव के बाद आंकड़ों में संशोधन संभव है। सरकार ने नई जीडीपी श्रृंखला के लिए वित्त वर्ष 2022-23 को आधार वर्ष चुना है। संशोधित आंकड़े जारी होने के बाद विकास दर के अनुमानों में बदलाव हो सकता है। बैंक ने कहा है कि जब तक नए बेस ईयर के प्रभाव को पूरी तरह समझा नहीं जाता, तब तक वार्षिक वृद्धि अनुमानों की समीक्षा आवश्यक होगी।

संस्थागत क्षेत्रों पर फोकस

नई श्रृंखला में निजी कंपनियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) से जुड़े क्षेत्रों के आंकड़ों को बेहतर तरीके से शामिल करने का प्रयास किया गया है। लंबे समय से इन क्षेत्रों में डेटा की कमी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। नए इनपुट्स के जरिए इन क्षेत्रों के वास्तविक योगदान को अधिक सटीक तरीके से मापने की कोशिश की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई सीरीज में इन क्षेत्रों का योगदान पहले से अधिक सामने आता है, तो भारत की विकास दर की तस्वीर और मजबूत दिख सकती है।

वित्त वर्ष 2026 और आगे के संकेत

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 के लिए विकास अनुमान फिलहाल मजबूत बना हुआ है। साथ ही वित्त वर्ष 2027 के शुरुआती संकेत भी सकारात्मक नजर आ रहे हैं। घरेलू मांग, सरकारी पूंजीगत व्यय और सेवा क्षेत्र की मजबूती को प्रमुख सहारा माना जा रहा है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और निर्यात मांग जैसे कारक आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि महंगाई नियंत्रित रहती है और निवेश चक्र में तेजी आती है, तो भारत उच्च विकास दर की राह पर बना रह सकता है।

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