SIDBI Outlook Survey: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बाहरी जोखिमों के बावजूद देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में कारोबारी भरोसा मजबूत हुआ है। Small Industries Development Bank of India (SIDBI) द्वारा जारी “एमएसएमई आउटलुक सर्वे” के पांचवें संस्करण के अनुसार, अक्टूबर–दिसंबर 2025 तिमाही के लिए एमएसएमई बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स (M-BCI) में साल-दर-साल आधार पर उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। सर्वे के मुताबिक, घरेलू मैक्रोइकॉनॉमिक वातावरण ने क्षेत्र को स्थिरता और मजबूती प्रदान की है, जिससे कारोबारी भावनाओं में सकारात्मक उछाल आया है।
सर्वे में यह सामने आया कि कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) और कुल वित्त उपलब्धता से जुड़े संकेतकों में सबसे अधिक सुधार देखा गया। मजबूत मांग और स्थिर परिचालन स्थितियों के कारण बिक्री और समग्र कारोबारी माहौल भी बेहतर हुआ है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के 46 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कार्यशील पूंजी की उपलब्धता को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया, जो पिछली तिमाही के 35 प्रतिशत से काफी अधिक है। कुल वित्त उपलब्धता के प्रति सकारात्मक भावना बढ़कर 47 प्रतिशत तक पहुंच गई। Trading Sector में कार्यशील पूंजी को लेकर कुछ नरमी दिखी, लेकिन कुल वित्त उपलब्धता को लेकर भरोसा मजबूत बना रहा। वहीं, सर्विस सेक्टर में वित्तीय संकेतकों पर भावनाओं में मामूली सुधार दर्ज किया गया।

अक्टूबर–दिसंबर 2025 तिमाही के लिए समग्र एम-बीसीआई 60.8 आंका गया है। सेक्टर-वार विश्लेषण में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र (Manufacturing Sector) का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा, जहां एम-बीसीआई 62.9 से बढ़कर 64.1 हो गया। हालांकि ट्रेडिंग और सर्विस सेक्टर में हल्की नरमी दर्ज की गई, लेकिन समग्र कारोबारी भावना सकारात्मक बनी रही। एम-बीईआई (बिजनेस एक्सपेक्टेशन इंडेक्स) भी आशावादी संकेत दे रहा है। अगले तिमाही में इसके 63.7 और एक वर्ष बाद (अक्टूबर–दिसंबर 2026) 65.0 तक पहुंचने का अनुमान है, जो निकट भविष्य में बेहतर कारोबारी संभावनाओं की ओर इशारा करता है।
एमएसएमई निर्यातकों ने नीतिगत सहायता योजनाओं में खास दिलचस्पी दिखाई है। सर्वे के अनुसार, 43 प्रतिशत उत्तरदाता Reserve Bank of India की ट्रेड रिलीफ योजना का लाभ लेने की योजना बना रहे हैं। 46 प्रतिशत निर्यातकों ने क्रेडिट गारंटी योजना अपनाने की मंशा जताई है। लगभग 37 प्रतिशत उत्तरदाता दोनों विकल्पों का उपयोग करने की योजना बना रहे हैं। यह रुझान दर्शाता है कि MSME क्षेत्र सरकारी और नियामकीय समर्थन का सक्रिय रूप से लाभ उठाने के लिए तैयार है, जिससे निर्यात क्षमता और वित्तीय स्थिरता को मजबूती मिल सकती है।

सर्वे में नए श्रम संहिताओं (Labour Code) को लेकर भी प्रतिक्रिया सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, ये संहिताएं एमएसएमई को अपने परिचालन ढांचे को अधिक संगठित और औपचारिक बनाने का अवसर देती हैं। हालांकि, 34-36 प्रतिशत कंपनियों को अल्पकाल में अनुपालन लागत बढ़ने की आशंका है। उत्तरदाताओं ने सुझाव दिया कि 16-21 प्रतिशत के अनुसार स्पष्ट दिशा-निर्देश आवश्यक हैं। 17-19 प्रतिशत ने बेहतर प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों की जरूरत बताई। सर्वे में यह भी रेखांकित किया गया कि सफल क्रियान्वयन के लिए क्षमता निर्माण (Capacity Building) अत्यंत आवश्यक होगा।
मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में बिक्री को लेकर भरोसा मजबूत बना हुआ है और भविष्य में बिक्री बढ़ने की उम्मीद भी प्रबल है। हालांकि सर्विस और ट्रेडिंग सेक्टर में मौजूदा तिमाही में बिक्री भावनाओं में उल्लेखनीय सुधार नहीं दिखा, लेकिन आगामी तिमाहियों के लिए कारोबारी आशावाद बरकरार है। कुल मिलाकर, घरेलू आर्थिक मजबूती और नीतिगत सहयोग ने वैश्विक जोखिमों के बीच एमएसएमई क्षेत्र के विश्वास को मजबूत बनाए रखा है।
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