मुंबईः वैश्विक बाजार में ऊहापोह की स्थिति के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया के अन्य विकासशील देशों की अपेक्षा बेहतर प्रदर्शन कर रही है। विदेशी निवेशकों ने अपना ध्यान भारतीय इक्विटी पर केंद्रित किया हुआ है। आंकड़ों पर गौर करें तो, इस सप्ताह विदेशी निवेशकों ने इक्विटी में लगभग 8,500 करोड़ रुपए का निवेश किया है, जो केवल तीन कारोबारी सत्रों, मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को हुआ है। इस सप्ताह सार्वजनिक अवकाश होने के कारण सोमवार और शुक्रवार को शेयर बाजार बंद रहे। इसके बावजूद निवेशकों ने बड़ा निवेश किया है। यह निश्चित तौर पर इक्विटी सेगमेंट में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की ओर से लगातार कई महीनों तक की गई बिकवाली के बाद आया सकारात्मक बदलाव है। एफआईआई की वापसी से बाजारों में सप्ताह के अंत में काफी मजबूती और मदद मिली है।
भारतीय शेयर बाजारों की बात करें, तो उससे जुड़े बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी 50 ने सप्ताह के अंत में 4.5 प्रतिशत से अधिक की मजबूत रिकवरी के साथ समापन किया, जो घरेलू और वैश्विक कारकों से मिले सकारात्मक संकेतों के कारण हुआ है। विदेशी कंपनियों की ओर से भारत में निवेश की बाढ़ मुख्य रूप से ट्रंप प्रशासन के टैरिफ को स्थगित करने और चुनिंदा उत्पादों पर हाल ही में दी गई छूट की वजह से है, जिससे निश्चित तौर पर वैश्विक व्यापार पर पड़ने वाले कुप्रभाव को कम करने की उम्मीद बढ़ी है। निवेश की इस नई लहर के पीछे एक प्रमुख कारण अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना भी है। डॉलर की कीमतों में धीरे-धीरे जिस तरह से गिरावट आ रही है और भारतीय रुपये में धीरे-धीरे जैसी मजबूती आ रही है, वैश्विक निवेशकों के लिए भारत जैसे उभरते बाजारों में फंड स्थानांतरित करना अधिक आकर्षक होता जा रहा है। हालांकि, एफआईआई के निवेश से बाजार में फिलहाल तेजी आई है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले सप्ताह महत्वपूर्ण होंगे।
आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक विदेशी निवेशक इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि क्या यह सकारात्मक रुझान जारी रहता है या वैश्विक कारक एक बार फिर भारतीय शेयरों में विदेशी निवेश को प्रभावित करते हैं। बाजार विशेषज्ञों की मानें तो इंफोसिस, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसी प्रमुख कंपनियों की तिमाही आय के नतीजे आने वाले सप्ताह में निवेशकों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होंगे। यही नहीं एचसीएल टेक्नोलॉजीज, एक्सिस बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर और मारुति सुजुकी इंडिया सहित कई दूसरी बड़ी कंपनियां भी अपने वित्तीय परिणाम जारी करने का निर्णय कर चुकी हैं, जो आने वाले समय में बेहतर परिणाम देगा। हालांकि, अप्रैल डेरिवेटिव सीरीज की समाप्ति के कारण बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। वैश्विक मोर्चे पर, टैरिफ से संबंधित किसी भी घटनाक्रम और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों पर उनके संभावित प्रभाव पर भी बारीकी से नजर रखी जाएगी।
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