यूपीआई का ग्लोबल विस्तार देने में जुटी सरकार: पूर्वी एशिया में डिजिटल भुगतान की नई राह पर भारत

खबर सार :-
यूपीआई का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भारत के डिजिटल नेतृत्व को नई ऊंचाई देने की दिशा में अहम कदम है। पूर्वी एशिया पर विशेष फोकस से न केवल भारतीय फिनटेक को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि डिजिटल भुगतान को आसान, सुरक्षित और सुलभ बनाने का भारत का सपना भी साकार होगा। इससे आर्थिक समावेशन और व्यापार दोनों को मजबूती मिलेगी।

यूपीआई का ग्लोबल विस्तार देने में जुटी सरकार: पूर्वी एशिया में डिजिटल भुगतान की नई राह पर भारत
खबर विस्तार : -

Digital Payment UPI: भारत अपने स्वदेशी डिजिटल भुगतान सिस्टम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम नागराजू ने कहा है कि सरकार की विशेष नजर पूर्वी एशिया के देशों पर है, ताकि यूपीआई को एक वैश्विक भुगतान प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित किया जा सके।

यूपीआई के माध्यम से हो रहा 50 प्रतिशत डिजिटल लेनदेन

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ग्लोबल इन्क्लूसिव फाइनेंस इंडिया समिट में बोलते हुए नागराजू ने बताया कि यूपीआई ने भारत में डिजिटल भुगतान को अभूतपूर्व गति दी है। आज देश में होने वाले कुल डिजिटल लेनदेन का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा यूपीआई के माध्यम से हो रहा है, जो इसकी लोकप्रियता और भरोसे को दर्शाता है। भारत अब इस सफल डिजिटल मॉडल को दूसरे देशों तक ले जाने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य न केवल भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली की वैश्विक पहचान बनाना है, बल्कि विदेशों में रहने और यात्रा करने वाले भारतीयों को भी सुविधा प्रदान करना है।

आठ देशों में यूपीआई से ट्रांजेक्शन की सुविधा

 वर्तमान समय में यूपीआई के जरिए 8 देशों में ट्रांजेक्शन की सुविधा उपलब्ध है। इनमें भूटान, सिंगापुर, कतर, मॉरीशस, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका और फ्रांस शामिल हैं। विदेशों में यूपीआई की सुविधा मिलने से भारतीय पर्यटकों और प्रवासी नागरिकों को बड़ा लाभ हो रहा है। उन्हें नकद मुद्रा रखने या महंगे अंतरराष्ट्रीय डेबिट-क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती। सिर्फ मोबाइल फोन के जरिए सुरक्षित और तेज भुगतान संभव हो जाता है। एम नागराजू ने बताया कि सरकार अब यूपीआई को और अधिक देशों में शुरू करने के लिए रणनीतिक स्तर पर काम कर रही है। खासतौर पर पूर्वी एशिया के देश भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल में रुचि दिखा रहे हैं। इससे भारत की फिनटेक क्षमताओं को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलेगी।

2025 में यूपीआई से 21 अरब से अधिक का लेनदेन

नागराजू ने बताया कि यूपीआई की तेजी से बढ़ती उपयोगिता के आंकड़े भी साझा किए। नागराजू के अनुसार, केवल दिसंबर 2025 में ही यूपीआई के माध्यम से 21 अरब से अधिक लेनदेन दर्ज किए गए। यह आंकड़ा बताता है कि भारत में डिजिटल भुगतान अब आम लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। डिजिटल भुगतान के विस्तार के पीछे एक अहम कारण प्रधानमंत्री जनधन योजना को भी माना गया। इस योजना के तहत करोड़ों लोगों के बैंक खाते खुले, जिससे वित्तीय समावेशन को मजबूती मिली। नागराजू ने बताया कि इन खातों में जमा औसत राशि भी धीरे-धीरे बढ़ रही है, जो लोगों की वित्तीय स्थिति में सुधार का संकेत है। यूपीआई का संचालन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) करता है। एनपीसीआई भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय बैंक संघ के सहयोग से बनी संस्था है, जो देश की खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों को संभालती है।

सूक्ष्म उद्यमों की स्थिति

डिजिटल भुगतान के साथ-साथ डीएफएस सचिव ने देश के सूक्ष्म उद्यमों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत में करोड़ों सूक्ष्म उद्यम हैं, लेकिन इनमें से बहुत कम ही मध्यम या बड़े उद्यम बन पाते हैं। अगर इन उद्यमों को बाजार तक बेहतर पहुंच, आधुनिक तकनीक, उत्पादन बढ़ाने के संसाधन और मशीनें उपलब्ध कराई जाएं, तो वे देश की आर्थिक वृद्धि में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

 

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