नई दिल्लीः भारत सरकार महंगाई को नियंत्रित करने में जुटी हुई है। खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने, किसानों को खाद और बीज पर सब्सिडी देने, कृषि ऋण देने समेत अनेकों कार्य किए जा रहे हैं। इन सभी प्रयासों का असर घर में बनने वाली खाने की थाली पर भी पड़ा है। अब खाने की थाली सस्ती हो गई है। इस संबंध में क्रिसिल रेटिंग एजेंसी ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिसमें गुरुवार को बताया गया कि उच्च आधार प्रभाव के कारण प्रमुख सब्जियों की कीमतों में तेज गिरावट की वजह से मई में घर में पकाई गई शाकाहारी और मांसाहारी थाली की कीमत में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शाकाहारी थाली की कीमत मासिक आधार पर स्थिर रही, जबकि मांसाहारी थाली की कीमत में पिछले महीने 2 प्रतिशत की कमी आई।
'रोटी राइस दर' यानी आरआरआर रिपोर्ट के अनुसार, मई में टमाटर की कीमतें 33 रुपए प्रति किलोग्राम से 29 प्रतिशत गिरकर 23 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गई थीं। प्याज और आलू की कीमतों में भी क्रमशः 15 प्रतिशत और 16 प्रतिशत की गिरावट आई है। घर पर थाली तैयार करने की औसत लागत की गणना उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में प्रचलित इनपुट कीमतों के आधार पर की जाती है। मासिक परिवर्तन आम आदमी के खर्च पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाता है। इससे पूर्व वर्ष 2024 में पश्चिम बंगाल में फसल को हुए नुकसान और बेमौसम बारिश के कारण आलू की कीमतों में उछाल आया था। इसी तरह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में पानी की उपलब्धता कम होने के कारण रबी की फसल के कम रकबे और उपज के कारण प्याज की कीमतों में उछाल आया था। अब आंकड़ों में जानकारी दी गई है कि अनाज, दालें, ब्रॉयलर, सब्जियां, मसाले, खाद्य तेल और रसोई गैस जैसी सामग्री थाली की कीमत को किस प्रकार बदल रही हैं।
क्रिसिल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर-रिसर्च, पुशन शर्मा ने घर में बनने वाली थाली की कीमतों को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि मई 2025 में थाली की लागत में मामूली अंतर आया है, जिसमें शाकाहारी थाली की कीमत तो स्थिर रही , लेकिन मांसाहारी थाली 02 प्रतिशत सस्ती हो गई। टमाटर और आलू महंगे हो गए, जबकि प्याज की कीमतों में गिरावट आई, जिससे शाकाहारी थाली की लागत क्रमिक रूप से स्थिर रही। हालांकि, ब्रॉयलर की कीमतों में गिरावट के कारण मांसाहारी थाली की लागत में कमी आई है। ब्रॉयलर की कीमतों में मई में 4 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है, जिससे मांसाहारी थाली की लागत में कमी आई है। यह भी बताया कि हम मौसमी बदलावों के कारण आने वाले समय में सब्जियों की कीमतों में बढ़ोत्तरी हो सकती है। और मजबूत घरेलू उत्पादन के बीच गेहूं और दालों की कीमतों में थोड़ी कमी आने की उम्मीद है।
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