भारत–मालदीव के बीच तीन गुना बढ़ा भरोसा, व्यापारिक रिश्तों को मिली नई ऊँचाई

खबर सार :-
भारत–मालदीव संबंध अब पारंपरिक पड़ोसी रिश्तों से आगे बढ़कर एक परिपक्व, बहुआयामी साझेदारी बन चुके हैं। प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता और द्विपक्षीय निवेश संधि भविष्य में आर्थिक सहयोग को और मजबूत करेंगे। बढ़ता व्यापार, पर्यटन और रणनीतिक सहयोग इस रिश्ते को दीर्घकालिक स्थिरता और समृद्धि की ओर ले जा रहा है।

भारत–मालदीव के बीच तीन गुना बढ़ा भरोसा, व्यापारिक रिश्तों को मिली नई ऊँचाई
खबर विस्तार : -

India-Maldives trade: भारत और मालदीव के द्विपक्षीय संबंध बीते आठ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुए हैं। खास तौर पर व्यापार के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग नई ऊँचाइयों पर पहुँचा है। आंकड़े बताते हैं कि इस अवधि में द्विपक्षीय व्यापार तीन गुना बढ़ा है, जो क्षेत्रीय साझेदारी की मजबूती और आपसी निर्भरता को दर्शाता है।

व्यापारिक आंकड़े: निर्यात और आयात में तेज़ उछाल

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का मालदीव को निर्यात दोगुना होकर 680 मिलियन डॉलर तक पहुँच गया है। वहीं मालदीव से भारत का आयात 20 गुना बढ़कर 119 मिलियन डॉलर हो गया। यह वृद्धि केवल संख्यात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। भारत से मालदीव जाने वाले पेट्रोलियम उत्पाद, दवाइयाँ, खाद्य सामग्री और उपभोक्ता वस्तुएँ वहाँ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

प्रधानमंत्री की यात्रा और ऐतिहासिक समझौते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया मालदीव यात्रा ने द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा दी है। इस दौरान आठ अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें 565 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन, ऋण राहत, यूपीआई–रुपे एकीकरण, मत्स्य पालन सहयोग, आवास परियोजनाएँ और जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय शामिल हैं। इनसे मालदीव पर सालाना ऋण चुकौती का बोझ लगभग 40 प्रतिशत तक कम होगा।

रणनीतिक आयात और निर्यात का महत्व

हालाँकि मूल्य के लिहाज से मालदीव से भारत का आयात कम है, फिर भी इसका रणनीतिक महत्व अधिक है। भारत मुख्य रूप से मछली और समुद्री उत्पाद आयात करता है, जो खाद्य सुरक्षा और समुद्री व्यापार के लिहाज से अहम हैं। वहीं मशीनरी, विद्युत उपकरण और परिवहन वाहन जैसे भारतीय उत्पाद मालदीव की बुनियादी जरूरतों को पूरा करते हैं।

पर्यटन: सबसे मजबूत सेतु

पर्यटन भारत और मालदीव के रिश्तों का सबसे जीवंत पहलू है। भारतीय पर्यटक लगातार शीर्ष देशों में शामिल रहे हैं। इससे मालदीव की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलती है, खासकर तब जब यूरोप या पूर्वी एशिया से आने वाले पर्यटकों की संख्या घटती-बढ़ती रहती है।

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