निवेशकों की आय बढ़ी, मुनाफा घटा: 13 तिमाहियों बाद Nifty 50 की कमाई में झटका

खबर सार :-
अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में आय बढ़ने के बावजूद निफ्टी 50 के मुनाफे में 13 तिमाहियों बाद गिरावट ने बाजार को चौंकाया है। नए श्रम कानूनों का एकमुश्त प्रभाव इसका प्रमुख कारण रहा। वैश्विक अस्थिरता और सेक्टोरल दबाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी फिलहाल संतुलन की तलाश में हैं। आने वाले महीनों में आय सुधार और नीति स्थिरता बाजार की दिशा तय करेंगे।

निवेशकों की आय बढ़ी, मुनाफा घटा: 13 तिमाहियों बाद Nifty 50 की कमाई में झटका
खबर विस्तार : -

Indian Stock Market: वैश्विक बाजारों में जारी अनिश्चितता और घरेलू स्तर पर कॉरपोरेट नतीजों के मिश्रित संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार नई दिशा की तलाश में है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक, आय में दोहरे अंकों की वृद्धि के बावजूद NIFTY 50 के मुनाफे में 13 तिमाहियों बाद गिरावट दर्ज की गई है।

उद्योग आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर तिमाही में निफ्टी 50 की आय में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मार्च 2023 के बाद यह पहली बार है जब आय में दोहरे अंकों की बढ़ोतरी देखने को मिली। हालांकि, नए श्रम कानूनों के एकमुश्त लेखांकन प्रभाव के चलते कुल शुद्ध लाभ में 8.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो सितंबर 2022 तिमाही के बाद पहली नकारात्मक वृद्धि है।

वैश्विक बाजारों का रुख: सतर्कता और अस्थिरता

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी निवेशक सतर्क बने हुए हैं। अमेरिका और यूरोप में ब्याज दरों की दिशा, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार की चाल को प्रभावित किया है। वॉल स्ट्रीट में हालिया सत्रों में सीमित दायरे में कारोबार हुआ, जबकि एशियाई बाजारों में मिश्रित रुख देखने को मिला। वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों, खासकर भारत, पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का रुख तिमाही के दौरान सतर्क रहा, जिससे घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा।

सेंसेक्स और निफ्टी: आंकड़ों में बाजार की स्थिति

भारतीय शेयर बाजार में प्रमुख सूचकांकों BSE Sensex और NIFTY 50 ने तिमाही के दौरान अस्थिर रुख दिखाया। सेंसेक्स में सीमित बढ़त के साथ उतार-चढ़ाव जारी है। निफ्टी 50 में आय वृद्धि के बावजूद मुनाफे में गिरावट का असर दिखा। आईटी और बैंकिंग शेयरों में दबाव, जबकि ऑटो और एफएमसीजी में स्थिरता देखी गई। विश्लेषकों के मुताबिक, बाजार फिलहाल कॉरपोरेट आय, वैश्विक संकेतों और नीतिगत फैसलों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।

किन सेक्टरों पर पड़ा असर?

बैंकों, वित्तीय सेवाओं और तेल एवं गैस कंपनियों को छोड़कर, तिमाही में कुल आय में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। परिचालन लाभ (EBITDA) में 7.5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई, जो सितंबर तिमाही के 6.1 प्रतिशत और पिछले वर्ष के 5 प्रतिशत से बेहतर है। हालांकि, नए श्रम कानूनों के प्रभाव ने कंपनियों के शुद्ध लाभ को प्रभावित किया। नए नियमों के तहत मूल वेतन को कुल लागत-से-कंपनी (CTC) का 50 प्रतिशत तक बढ़ाना अनिवार्य किया गया है, साथ ही ग्रेच्युटी प्रावधानों में भी वृद्धि हुई है। विश्लेषकों का अनुमान है कि श्रम संहिता में बदलाव के कारण कर पश्चात लाभ में लगभग 5 प्रतिशत की कमी आई है।

IT Sector पर बड़ा असर

प्रौद्योगिकी क्षेत्र में लगभग 13 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है। रिपोर्टों के मुताबिक, Tata Consultancy Services, Infosys और HCL Technologies ने मिलकर नए नियमों के कार्यान्वयन से संबंधित 4,373 करोड़ रुपये से अधिक का एकमुश्त शुल्क वहन किया। इस एकबारगी खर्च के चलते आईटी कंपनियों के तिमाही मुनाफे में दोहरे अंकों की गिरावट आई। हालांकि, मांग में स्थिरता और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती जरूरत से लंबी अवधि में सेक्टर के लिए संभावनाएं बनी हुई हैं।

एक्सपर्ट्स की राय: उम्मीदें और चुनौतियां

वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में आय वृद्धि में क्रमिक सुधार देखा गया और यह 16 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंची। विशेष रूप से वस्तु एवं सेवा कर (GST) में कटौती लागू होने के बाद मांग में सुधार के संकेत मिले हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और घरेलू मांग मजबूत बनी रहती है, तो आने वाली तिमाहियों में मुनाफे में फिर से सुधार संभव है। फिलहाल, बाजार की नजर तीन प्रमुख कारकों-वैश्विक ब्याज दरों की दिशा, कच्चे तेल की कीमतें, घरेलू नीति और सुधार पर है।

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