Share Market News: पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने राहत की सांस ली और हरे निशान में खुला। घरेलू शेयर बाजार के दोनों प्रमुख बेंचमार्क-बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी ने शुरुआती कारोबार में अच्छी बढ़त दिखाई। निवेशकों को उम्मीद थी कि वैश्विक संकेतों में सुधार और अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता की सकारात्मक खबरों से बाजार में मजबूती बनी रहेगी, लेकिन यह तेजी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई।
आज सुबह करीब 9:20 बजे 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 278 अंक या 0.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ 84,156 के स्तर पर पहुंच गया था। वहीं निफ्टी 50 भी 82 अंक या 0.32 प्रतिशत चढ़कर 25,872 पर कारोबार कर रहा था। हालांकि, महज दस मिनट के भीतर ही बाजार का रुख बदल गया और 9:30 बजे तक सेंसेक्स 85 अंक या 0.10 प्रतिशत गिरकर 83,792 पर आ गया। निफ्टी भी 22 अंक या 0.08 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,768 पर फिसल गया।
हालांकि प्रमुख बेंचमार्क दबाव में रहे, लेकिन व्यापक बाजार ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.24 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.52 प्रतिशत चढ़ा। इससे यह संकेत मिला कि निवेशकों की दिलचस्पी चुनिंदा मिड और स्मॉलकैप शेयरों में बनी हुई है, भले ही बड़े शेयरों में मुनाफावसूली देखी जा रही हो।
सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वालों में रहा और इसमें 0.88 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके उलट एफएमसीजी, आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में करीब 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी फार्मा इंडेक्स भी 0.25 प्रतिशत फिसल गया, जिससे साफ है कि रक्षात्मक सेक्टरों में भी निवेशकों का भरोसा पूरी तरह मजबूत नहीं दिखा।
सेंसेक्स पैक में इटरनल, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, टेक महिंद्रा और बीईएल के शेयर टॉप गेनर्स की सूची में रहे। दूसरी ओर एलएंडटी, एचसीएल टेक, ट्रेंट, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एमएंडएम, भारती एयरटेल और टाटा स्टील जैसे दिग्गज शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला और ये टॉप लूजर्स में शामिल रहे।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान आगे भी बाजारों को प्रभावित करते रहेंगे। ट्रंप द्वारा टैरिफ को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की नीति पहले ही वैश्विक व्यापार पर नकारात्मक असर डाल चुकी है। उनकी हालिया घोषणा कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अमेरिका 25 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा, निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी।
भारतीय बाजार के लिए राहत की बात यह है कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयान कि दोनों देश 13 जनवरी से व्यापार वार्ता फिर शुरू करेंगे, के बाद बाजार में हाल ही में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझौता आगे बढ़ता है तो लंबी अवधि में भारतीय बाजार को समर्थन मिल सकता है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निकट भविष्य में तीसरी तिमाही के नतीजों का असर बाजार की दिशा तय करेगा। समग्र बाजार में बड़ी तेजी के बजाय चुनिंदा शेयरों में नतीजों के आधार पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
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