BSE Sensex-Nifty 50 Index: भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को मजबूती के साथ कारोबार का समापन किया है। प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 479.95 अंक यानी 0.58 प्रतिशत की बढ़त के साथ 83,294.66 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 141.75 अंक यानी 0.55 प्रतिशत चढ़कर 25,713 के स्तर पर पहुंच गया। लगातार दूसरे सत्र में आई इस तेजी ने निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया।
व्यापक बाजार में मिश्रित रुझान देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई स्मॉलकैप इंडेक्स 0.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ हरे निशान में रहा। सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 1.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ शीर्ष पर रहा। इसके अलावा मिडस्मॉल हेल्थकेयर इंडेक्स में 1.03 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई। दूसरी ओर, निफ्टी आईटी और निफ्टी केमिकल्स इंडेक्स दबाव में रहे और दिन के कमजोर सेक्टर के रूप में उभरे।

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में अदाणी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावरग्रिड, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में प्रमुख बढ़त देखने को मिली। वहीं इंफोसिस, टेक महिंद्रा, ट्रेंट, एचसीएल टेक, बजाज फिनसर्व और आईटीसी में गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पीएसयू बैंक और वित्तीय शेयरों में खरीदारी ने सूचकांकों को सहारा दिया। साथ ही वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने भी निवेशकों का मनोबल बढ़ाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पारस्परिक टैरिफ नीति को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध ठहराए जाने की खबर से वैश्विक निवेश धारणा में सुधार आया, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखा।
इस बीच, इक्विरस सिक्योरिटीज की ताजा रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में स्मॉलकैप कंपनियों ने आय के मामले में लार्जकैप और मिडकैप को पीछे छोड़ दिया। स्मॉलकैप शेयरों ने साल-दर-साल 22 प्रतिशत की आय वृद्धि दर्ज की, जबकि मिडकैप में 15 प्रतिशत और लार्जकैप में 14 प्रतिशत की बढ़त रही। रिपोर्ट के अनुसार, कुल राजस्व में 10 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई, जबकि ईबीआईटीडीए और पीएटी में क्रमशः 14 और 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। लगभग 36 प्रतिशत कंपनियों के प्रति शेयर आय (ईपीएस) में सुधार हुआ, जो मांग में मजबूती और बेहतर परिचालन प्रदर्शन का संकेत है।

ऑटोमोबाइल, बैंकिंग एवं एनबीएफसी, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं, एफएमसीजी और आईटी क्षेत्रों में ईपीएस में बढ़त दर्ज की गई। हालांकि भवन निर्माण सामग्री, सीमेंट, बुनियादी ढांचा, रसायन, रियल एस्टेट और खुदरा क्षेत्र में दबाव बना रहा। विश्लेषकों का मानना है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों से कंपनियों की बढ़ती भागीदारी पूंजी बाजार में नई ऊर्जा भर रही है। आने वाली तिमाही में निवेशक एनएचएआई के ऑर्डर फ्लो, उपभोक्ता मांग, अमेरिकी बाजार की स्थिति और आरबीआई की ब्याज दर नीति पर नजर रखेंगे।
भारतीय शेयर बाजार में सीमेंट की कीमतों में सुधार और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एक्जिम गतिविधियों की बहाली से निकट भविष्य में समर्थन मिल सकता है। वहीं नई क्षमता वृद्धि उपयोग दर पर दबाव डाल सकती है। वित्तीय सेवाओं में परिसंपत्ति गुणवत्ता स्थिर बनी हुई है, जबकि ऋण वृद्धि की रफ्तार सकारात्मक संकेत दे रही है। कुल मिलाकर, बाजार में निवेशकों का रुझान फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है, हालांकि वैश्विक संकेत और नीतिगत फैसले आगे की दिशा तय करेंगे।
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