अहमदाबादः अडानी ग्रुप बहुत ही तेजी के साथ एक के बाद एक रिकॉर्ड बनाता जा रहा है। अब अडानी पोर्ट्स ने कार्गो हैंडलिंग में नया रिकॉर्ड बनाया है। अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन यानी एपीएसईजेड ने वैश्विक मानकों पर देश की क्षमता को प्रदर्शित करते हुए 4.18 करोड़ टन कार्गो हैंडलिंग का नया बेंचमार्क स्थापित किया है, जो कंपनी के लिए सर्वकालिक रिकॉर्ड है। यह वर्ष 2024 की तुलना में 17 प्रतिशत की वृद्धि मानी जा रही है। यह देश में तेजी से विकसित हो रहे आर्थिक ढांचे और बुनियादी ढांचे के विकास की मजबूत नींव का प्रमाण भी है। इस शानदार प्रदर्शन के पीछे कंटेनर ट्रैफिक और ड्राई कार्गो मौजूद थे।
दरअसल, वैश्विक बंदरगाह कंपनियां जब मंदी और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से जूझ रही हैं, एपीएसईजेड ने न केवल स्थिरता बनाए रखी है, बल्कि तेजी से विस्तार भी किया है। कंपनी ने इस वर्ष मई तक कुल 7.93 करोड़ टन कार्गो हैंडलिंग की है, जो साल-दर-साल 10 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। कंटेनर हैंडलिंग में 21 प्रतिशत की वृद्धि एपीएसईजेड की परिचालन दक्षता और तकनीकी उन्नयन को भी उजागर करती है।
आंकड़ों पर गौर करें, तो मई में अडानी लॉजिस्टिक्स ने 0.6 लाख टीईयू रेल वॉल्यूम में सालाना औसतन 13 प्रतिशत की वृद्धि और 20.1 लाख टन जेनरल पर्पस वैगन इंवेस्टमेंट स्कीम यानी जीपीडब्ल्यूआईएस वॉल्यूम में सालाना औसतन चार प्रतिशत की वृद्धि दर्ज किया है। इस साल अब तक रेल वॉल्यूम 1.2 लाख टीईयू है, जो कि औसतन 15 प्रतिशत की वृद्धि है और जीपीडब्ल्यूआईएस वॉल्यूम 38 लाख टन तक पहुंच गया है। यह स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर कंपनी का रणनीतिक फोकस ठोस परिणाम दिखाने लगा है। वहीं दूसरी तरफ देश के अन्य प्रमुख बंदरगाहों, जिनमें जेएनपीटी और पारादीप पोर्ट शामिल हैं, ने मई में क्रमशः सात प्रतिशत और नौ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। वहीं, एपीएसईजेड ने 17 प्रतिशत की छलांग के साथ बढ़त हासिल की है, जो प्रतिस्पर्धा पर अपनी बढ़त का संकेत देता है।
अडानी पोर्ट्स ने देश में ही नहीं वैश्विक स्तर पर भी बड़ा मुकाम हासिल किया है। यह न केवल भारत का सबसे बड़ा निजी बंदरगाह संचाति करता है, बल्कि यह देश की वैश्विक व्यापार रणनीति का एक स्तंभ बन चुका है। भविष्य में एपीएसईजेड की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने वाली है। मल्टीमॉडल हब, स्मार्ट पोर्ट, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए कंपनी लॉजिस्टिक्स के भविष्य को आकार दे रही है। मई के आंकड़ों पर गौर करें, तो देश के लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तेजी से हो रहे बदलावों की झलक दिखाई देती है। अडानी पोर्ट्स ने यह साबित कर दिया है कि जब रणनीति, निवेश और इनोवेशन एक साथ काम करते हैं, तो भारत न केवल आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में नेतृत्व की भूमिका भी निभा सकता है।
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