West Asia Conflict: यूरोपीय देशों को ट्रंप का कड़ा संदेश, नाटो को दी ये बड़ी चेतावनी
खबर सार :-
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो से होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में मदद की मांग की है, यह संदेश यूरोपीय देशों और अन्य सहयोगियों के लिए स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका इस सामरिक जलमार्ग की सुरक्षा को गंभीरता से ले रहा है। इसके साथ ही, ट्रंप ने नाटो के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई है।
खबर विस्तार : -
West Asia Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्य देशों से आग्रह किया है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में मदद करें, अन्यथा नाटो के भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। यह बयान ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स से फोन पर दिए गए एक साक्षात्कार में दिया, जहां उन्होंने यूरोपीय देशों को इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की सुरक्षा में योगदान देने का कड़ा संदेश दिया। ट्रंप ने कहा, "जो लोग इस जलडमरूमध्य से लाभ उठा रहे हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करने में मदद करनी चाहिए कि वहां कुछ भी गलत न हो।"
यूरोपीय देशों को ट्रंप की चेतावनी
राष्ट्रपति ट्रंप ने यूरोपीय देशों को चेतावनी दी कि अगर वे होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में सहयोग नहीं करते, तो यह नाटो के भविष्य के लिए "बहुत बुरा" होगा। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, ईरान के साथ बढ़ते तनावों के बीच इस जलमार्ग की सुरक्षा को लेकर सहयोगियों से मदद मांग रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर यूरोपीय देशों की ओर से कोई जवाब नहीं मिलता है, तो नाटो की भूमिका और भविष्य पर सवाल उठ सकते हैं।
रूस और यूक्रेन पर भी दिया बयान
ट्रंप ने यूक्रेन को रूस के खिलाफ मदद देने के संदर्भ में कहा, "हमें यूक्रेन के मामले में उनकी मदद करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। अब हम देखेंगे कि वे हमारी मदद करते हैं या नहीं।" ट्रंप ने इस समय नाटो की भूमिका पर भी ध्यान दिलाया और कहा कि उन्हें नाटो से "जो भी जरूरी हो" मदद चाहिए, जिसमें बारूदी सुरंग नष्ट करने वाले जहाज भी शामिल हो सकते हैं। उनका यह बयान यह दर्शाता है कि ट्रंप नाटो देशों से सीधे सैन्य सहायता की उम्मीद कर रहे हैं, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर।
ट्रंप ने दोहराया समर्थन
नाटो, एक प्रमुख सैन्य गठबंधन है, जिसे शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने और सदस्य देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थापित किया गया था। नाटो का उद्देश्य किसी ऐसे देश को मदद देना नहीं है जो खुद युद्ध शुरू करे, बल्कि यह गठबंधन सदस्य देशों की सामूहिक सुरक्षा के लिए काम करता है। हालांकि, ट्रंप ने नाटो के प्रति अपने समर्थन को बार-बार दोहराया और कहा कि वह हमेशा नाटो के साथ खड़े रहेंगे। फ्लोरिडा से व्हाइट हाउस लौटते हुए एयर फोर्स वन से ट्रंप ने यह बयान दिया कि यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा देश "बहुत छोटे से काम में" उनकी मदद नहीं करता।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री की नाराजगी
राष्ट्रपति ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर भी अपनी नाराजगी व्यक्त की, क्योंकि स्टार्मर ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के तुरंत समर्थन में कोई कदम नहीं उठाया था। ट्रंप ने कहा, "ब्रिटेन को शायद हमारा सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी माना जाता है। जब मैंने उनसे मदद मांगी तो वह साथ नहीं आए।" यह बयान ट्रंप के लिए एक और कड़ा संकेत था कि अमेरिका के सहयोगी देशों से अपेक्षाएँ और भी बढ़ चुकी हैं, खासकर जब सुरक्षा की बात हो।
जापान ने बताया अपना रुख
इस मसले पर जापान ने भी अपना रुख स्पष्ट किया। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने सोमवार को कहा कि जापान फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में मदद करने के लिए जहाज भेजने की कोई योजना नहीं बना रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जापान सरकार इस मामले में जरूरी कदम उठाने के तरीकों पर विचार कर रही है। जापान ने अब तक अमेरिका से सीधा कोई अनुरोध नहीं किया है, लेकिन प्रधानमंत्री ताकाइची और ट्रंप गुरुवार को वाशिंगटन में मिलने वाले हैं, जिससे इस विषय पर आगे की चर्चा हो सकती है।
नाटो का विस्तार
नाटो के सदस्य देशों की संख्या वर्तमान में 32 हो चुकी है, जिसमें स्वीडन हाल ही में शामिल हुआ है। इसके संस्थापक सदस्य देशों में बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, लक्ज़मबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। नाटो का मुख्य उद्देश्य वैश्विक सुरक्षा का समर्थन करना है, लेकिन ट्रंप का बयान यह साफ करता है कि वे नाटो से ऐसी सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं जो वैश्विक सुरक्षा से कहीं अधिक सामरिक दृष्टिकोण से जुड़ा हो, जैसे कि होर्मुज जलडमरूमध्य की रक्षा।
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