Middle East में बढ़ा युद्ध का खतरा: ट्रंप सरकार ने ओमान से अमेरिकी कर्मचारियों की वापसी का दिया आदेश
खबर सार :-
पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य तनाव वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ओमान से अमेरिकी कर्मचारियों की वापसी, इराक में विमान दुर्घटना और कुवैत में ड्रोन-मिसाइल हमले इस अस्थिर स्थिति को दर्शाते हैं। यदि हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए तो क्षेत्रीय संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा पर पड़ सकता है।
खबर विस्तार : -
Middle East Tension: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने ओमान में तैनात अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को तत्काल देश छोड़ने का आदेश दिया है। सुरक्षा खतरों और क्षेत्र में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील हैं। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित किया है। इसी कारण एहतियाती कदम के रूप में ओमान में तैनात गैर-जरूरी अमेरिकी स्टाफ को वापस बुलाया जा रहा है।
सुरक्षा खतरे के कारण लिया गया फैसला
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह निर्णय क्षेत्र में बढ़ते खतरे को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। विभाग ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए उन्हें अस्थायी रूप से ओमान से हटाने का आदेश दिया गया है। हालांकि अमेरिकी सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि खतरे का स्तर कितना गंभीर है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ी सैन्य गतिविधियां और हमलों की घटनाएं इसके पीछे की बड़ी वजह हैं।
इराक में रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटना
इसी बीच गुरुवार को इराक में एक रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटना में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई। अमेरिकी रक्षा विभाग ने इन सैनिकों की पहचान जारी कर दी है। मारे गए सैनिकों में मेजर जॉन ए. क्लिनर (33), कैप्टन एरियाना जी. सैविनो (31), टेक्निकल सार्जेंट एश्ले बी. प्रुइट (34), कैप्टन सेठ आर. कोवल (38), कैप्टन कर्टिस जे. एंगस्ट (30) और टेक्निकल सार्जेंट टायलर एच. सिमंस (28) शामिल हैं। पेंटागन ने बताया कि इस दुर्घटना की जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि हादसा तकनीकी खराबी से हुआ या किसी अन्य कारण से।
युद्ध में बढ़ता अमेरिकी नुकसान
पेंटागन के आंकड़ों के अनुसार, ईरान के साथ जारी संघर्ष में अब तक कम से कम 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा सात सैनिक सीधे लड़ाई में मारे गए हैं। लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें आठ की हालत गंभीर है। यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि क्षेत्र में सैन्य टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।

ड्रोन हमलों को लेकर ईरान का आरोप
दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरान के खतम अल-अनबिया मुख्यालय ने दावा किया है कि अमेरिका और इजरायल ईरानी ड्रोन तकनीक की नकल कर हमले कर रहे हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि शाहेद और लुकास जैसे ड्रोन की कॉपी बनाकर हमले किए जा रहे हैं और फिर उसका आरोप ईरानी सेना पर लगाया जा रहा है। आईआरआईबी ब्रॉडकास्टर को दिए बयान में कमांड ने कहा कि हाल के दिनों में तुर्किए, कुवैत और इराक के कई ठिकानों पर हुए हमलों का आरोप भी ईरान पर लगाया गया है।
पड़ोसी देशों में बढ़ी चिंता
ईरान का आरोप है कि यह रणनीति क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने और ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने के लिए अपनाई जा रही है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की घटनाओं का मकसद तेहरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच तनाव पैदा करना है, ताकि ईरान की सैन्य और कूटनीतिक स्थिति कमजोर हो सके।
कुवैत में ड्रोन और मिसाइल हमले
इस बीच कुवैत में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। कुवैती नेशनल गार्ड के अनुसार पिछले 24 घंटों में पांच ड्रोन मार गिराए गए हैं। कुवैत के अधिकारियों ने बताया कि एक ड्रोन ने कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाया, जिससे एयरपोर्ट के रडार सिस्टम का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। इसके अलावा दो मिसाइलें अहमद अल-जबर एयरबेस के आसपास गिरीं, जिसमें तीन सैनिक घायल हो गए। इन घटनाओं ने पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है और कई देशों ने अपने सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए हैं।
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