US Iran Tensions: आखिर क्यों ट्रंप ने पाकिस्तान को बनाया अपना 'मैसेंजर'? पर्दे के पीछे की पूरी कहानी
खबर सार :-
US Iran Tensions: जानें कैसे अमेरिका ने ईरान के साथ तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान को मोहरा बनाया। डोनाल्ड ट्रंप की 15-सूत्रीय योजना और जनरल आसिम मुनीर की गुप्त भूमिका का पूरा खुलासा।
खबर विस्तार : -
वाशिंगटन/इस्लामाबाद: अंतरराष्ट्रीय राजनीति के शतरंज पर कई बार चालें सीधी नहीं, बल्कि टेढ़ी चली जाती हैं। ईरान और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध के बादलों को छांटने के लिए व्हाइट हाउस ने इस बार एक चौंकाने वाला रास्ता चुना। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को अपनी शर्तों पर लाने के लिए पाकिस्तान का सहारा लिया। यह महज एक संयोग नहीं, बल्कि ट्रंप प्रशासन की एक सोची-समझजी 'बैक-चैनल' कूटनीति का हिस्सा था।
US Iran Tensions: बैक-चैनल कूटनीति: पाकिस्तान बना संदेशवाहक
लंदन स्थित प्रतिष्ठित समाचार पत्र 'फाइनेंशियल टाइम्स' की एक हालिया रिपोर्ट ने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, जब अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत के सारे रास्ते बंद नजर आ रहे थे, तब वॉशिंगटन ने इस्लामाबाद को 'संदेश संवाहक' (Messenger) के रूप में इस्तेमाल किया। इस रणनीति के पीछे तर्क यह था कि ईरान एक मुस्लिम बहुल पड़ोसी देश (पाकिस्तान) से आने वाले प्रस्तावों पर अधिक गंभीरता और सहजता से विचार कर सकता है। हालांकि, इस भूमिका ने पाकिस्तान की अपनी कूटनीतिक स्वायत्तता पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
US Iran Tensions: जनरल आसिम मुनीर और 15-सूत्रीय गुप्त योजना
इस पूरी गोपनीय कूटनीतिक कवायद के केंद्र में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की भूमिका सबसे अहम रही। सूत्रों के अनुसार, मुनीर ने अमेरिकी नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा और जब डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई समयसीमा समाप्त होने के करीब थी, तब उन्होंने स्वयं राष्ट्रपति ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ सीधी और गहन चर्चा की। इस दौरान दोनों देशों के बीच प्रस्तावों का एक बेहद जटिल आदान-प्रदान देखने को मिला, जहाँ अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान तक अपनी 15-सूत्रीय शांति योजना पहुंचाई। इसके जवाब में तेहरान ने भी अपनी ओर से 5 और 10 बिंदुओं वाले जवाबी प्रस्ताव अमेरिका तक भेजे। इस पूरी मशक्कत का मुख्य लक्ष्य यह था कि ईरान को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए फिर से खोलने और अपनी सैन्य गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के लिए राजी किया जा सके।
US Iran Tensions: कूटनीति का परिणाम, दो हफ्तों का युद्धविराम
महीनों की गोपनीय बातचीत और पाकिस्तान की मध्यस्थता का असर आखिरकार रंग लाया। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच दो हफ्तों के अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ जहाँ पर्दे के पीछे समझौते की पटकथा लिखी जा रही थी, वहीं सार्वजनिक मंच पर डोनाल्ड ट्रंप का लहजा बेहद सख्त बना रहा। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि उनकी शर्तें नहीं मानी गईं, तो ईरान को इसके विनाशकारी परिणाम भुगतने होंगे।
US Iran Tensions: 'स्क्रिप्टेड' सोशल मीडिया पोस्ट और पाकिस्तान की भूमिका
रिपोर्ट्स में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप की डेडलाइन बढ़ाने को लेकर जो सोशल मीडिया पोस्ट किया था, वह कथित तौर पर व्हाइट हाउस की मंजूरी के बाद ही जारी किया गया था। यह इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान और अमेरिका के बीच तालमेल कितना गहरा था। पाकिस्तान असल में दोनों देशों के लिए एक 'एग्जिट रूट' (सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता) तैयार कर रहा था ताकि किसी भी पक्ष की साख को बट्टा न लगे।
US Iran Tensions: रणनीतिक जीत या मजबूरी?
इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक कूटनीति में 'दुश्मन का दोस्त' अक्सर सबसे बड़ा हथियार साबित होता है। अमेरिका ने पाकिस्तान की भौगोलिक और धार्मिक पहचान का लाभ उठाकर ईरान को टेबल पर आने को मजबूर किया। हालांकि, इस पूरे प्रकरण ने पाकिस्तान को वैश्विक पटल पर एक स्वतंत्र राष्ट्र के बजाय एक 'सहयोगी' के रूप में अधिक मजबूती से स्थापित कर दिया है, जिसका उपयोग अमेरिका अपनी क्षेत्रीय जरूरतों के हिसाब से कर रहा है।
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