New Start Agreement का अंत: अमेरिका-रूस के बीच परमाणु संतुलन पर मंडराया संकट
खबर सार :-
न्यू स्टार्ट समझौते के समाप्त होने के साथ ही अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियार नियंत्रण का एक अहम अध्याय बंद हो गया है। रूस के सख्त संकेत और अमेरिका की अनिश्चित प्रतिक्रिया आने वाले समय में वैश्विक सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती है। हालांकि कूटनीतिक बातचीत की संभावना अब भी बची है, लेकिन फिलहाल दुनिया एक नए रणनीतिक तनाव के दौर में प्रवेश करती दिख रही है।
खबर विस्तार : -
New START Agreement: मॉस्को से आई एक अहम घोषणा ने वैश्विक सामरिक संतुलन को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। रूस के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि अमेरिका और रूस के बीच हुआ न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (न्यू स्टार्ट) अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है और इसके तहत दोनों देशों पर अब किसी भी तरह की बाध्यता लागू नहीं रहती। मंत्रालय का कहना है कि समझौते की अवधि खत्म होने के बाद इसके नियमों का पालन करना अब किसी पक्ष के लिए अनिवार्य नहीं है।
अमेरिका की चुप्पी पर रूस की नाराजगी
रूस ने यह भी बताया कि उसने समझौते की समाप्ति के बाद भी परमाणु हथियारों की सीमा को स्वेच्छा से बनाए रखने का प्रस्ताव अमेरिका के सामने रखा था। हालांकि, अमेरिका की ओर से अब तक इस पर कोई स्पष्ट और औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह चुप्पी मौजूदा अनिश्चितता को और बढ़ा रही है। गौरतलब है कि न्यू स्टार्ट समझौता 5 फरवरी को औपचारिक रूप से खत्म हो गया।
अब दोनों देश खुद तय करेंगे अगला कदम
रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वर्तमान हालात में वह यह मानता है कि न्यू स्टार्ट से जुड़े सभी पक्ष अब इसकी शर्तों, नियमों और आपसी घोषणाओं से मुक्त हो चुके हैं। इसमें समझौते के मूल प्रावधान भी शामिल हैं, जो परमाणु हथियारों और उन्हें ले जाने वाले साधनों की संख्या को सीमित करते थे। ऐसे में अब रूस और अमेरिका दोनों अपने-अपने रणनीतिक और सैन्य कदम स्वतंत्र रूप से तय कर सकते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा हुआ तो सख्त जवाब
रूस ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को किसी नए खतरे का सामना करना पड़ा, तो वह उससे निपटने के लिए सैन्य और तकनीकी स्तर पर कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, हालांकि रूस ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि परिस्थितियां अनुकूल होती हैं, तो वह रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक बातचीत के लिए तैयार है।
क्या था न्यू स्टार्ट समझौता
न्यू स्टार्ट समझौता वर्ष 2010 में अमेरिका और रूस के बीच हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के परमाणु हथियारों और उन्हें ले जाने वाले मिसाइल सिस्टम, बमवर्षकों आदि की संख्या को सीमित करना था। यह समझौता 5 फरवरी 2011 से लागू हुआ था और इसकी शुरुआती अवधि 10 साल की थी। बाद में दोनों देशों की सहमति से इसकी अवधि बढ़ाकर 5 फरवरी 2026 तक कर दी गई थी।
पुतिन और ट्रंप के बयान
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सितंबर 2025 में कहा था कि यदि अमेरिका ऐसे कदम नहीं उठाता जिससे रणनीतिक संतुलन बिगड़े, तो रूस समझौते की मूल सीमाओं का पालन समाप्ति के बाद भी एक साल तक करता रहेगा। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी में कहा था कि उन्हें इस समझौते के खत्म होने की ज्यादा चिंता नहीं है और उन्हें उम्मीद है कि दोनों देश भविष्य में किसी नए हथियार नियंत्रण समझौते पर पहुंच सकते हैं।
हथियार नियंत्रण का कमजोर होता ढांचा
न्यू स्टार्ट समझौता अमेरिका और रूस के बीच हथियार नियंत्रण से जुड़ा आखिरी बड़ा समझौता था। इससे पहले अमेरिका वर्ष 2019 में इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज (INF) ट्रीटी से बाहर निकल चुका है। ऐसे में न्यू स्टार्ट का अंत वैश्विक परमाणु सुरक्षा ढांचे को और कमजोर करता नजर आ रहा है।
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