अगर यूएस-इजरायल ने दोबारा हमला किया तो ईरान जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार : अराघची
खबर सार :-
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान, इजरायल या अमेरिका के साथ युद्ध नहीं चाहता, लेकिन दोबारा हमला हुआ तो वह जवाब देने को तैयार है। ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अमेरिका के साथ बातचीत के लिए भी तैयार है, बशर्ते बातचीत वॉशिंगटन के हुक्म के बजाय आपसी सम्मान पर आधारित हो।
खबर विस्तार : -
बेरूत : ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि उनका देश इजरायल या अमेरिका के साथ जंग नहीं चाहता, लेकिन अगर दोबारा हमला हुआ तो वह जवाब देने के लिए तैयार है। गुरुवार को बेरूत पहुंचने पर अब्बास अराघची ने रिपोर्टरों से कहा कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अमेरिका के साथ बातचीत के लिए भी तैयार है, बशर्ते बातचीत वॉशिंगटन के "हुक्म" के बजाय आपसी सम्मान पर आधारित हो।
हम किसी भी विकल्प के लिए तैयार हैं
अराघची की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कई लोगों को डर है कि यह जून में हुए 12 दिन के इजरायल-ईरान संघर्ष जैसा हो सकता है, जिसमें अमेरिका ने ईरान की खास न्यूक्लियर इकाइयों पर हमले भी किए थे। लेबनान के दो दिन के दौरे की शुरुआत में बेरूत में अराघची ने दावा किया, “अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर अपने हमले को टेस्ट किया। लेकिन यह हमला और रणनीति पूरी तरह फेल हो गई। अगर वे इसे दोहराते हैं, तो उन्हें वही नतीजे भुगतने होंगे। अराघची ने आगे कहा, “हम किसी भी विकल्प के लिए तैयार हैं। हम जंग नहीं चाहते लेकिन हम इसके लिए तैयार हैं।
न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत के लिए तैयार है तेहरान
उन्होंने दोहराया कि तेहरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत के लिए तैयार है, “लेकिन मेरा कहना है कि बातचीत आपसी सम्मान और आपसी हितों पर आधारित होनी चाहिए। ईरानी विदेश मंत्री बोले, “हमारा मानना है कि एक बार जब अमेरिकी इस नतीजे पर पहुंच जाएंगे कि हुक्म चलाने के बजाय रचनात्मक और सकारात्मक बातचीत ही फ्रेमवर्क है, तो इसके नतीजे फायदेमंद होंगे।
बढ़ती महंगाई, अधिकारों को लेकर सड़क पर हैं लोग
ईरान में आम लोग बढ़ती महंगाई और अपने अधिकारों को लेकर सड़क पर हैं। लगातार दूसरे हफ्ते विरोध प्रदर्शन जारी है। इस बीच गोलियां भी चलाई गई हैं। बिगड़ते हालात को लेकर हाल ही में अमेरिका की ओर से टिप्पणी की गई। ट्रूथ पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा था कि अगर ईरानी सत्ता अपनी कार्रवाई नहीं रोकेगी, तो ईरानी नागरिकों को बचाने के लिए यूएस हस्तक्षेप कर सकता है। इस बयान को लेकर तेहरान ने नाराजगी भी जताई। सरकार ने इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और भ्रामक करार दिया था।
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