ईरान में शोक और गुस्सा:"न कोई समझौता, न कोई समर्पण" के लग रहे नारे
खबर सार :-
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या के बाद पूरे देश में शोक और आक्रोश की लहर है। जनता सड़कों पर उतरकर "कोई समझौता नहीं, कोई समर्पण नहीं" के नारे लगा रही है। जानिए इस घटना के वैश्विक और क्षेत्रीय प्रभाव।
खबर विस्तार : -
तेहरान: ईरान के सबसे बड़े नेता सैयद अली खामेनेई की मौत की खबर ने न केवल ईरान बल्कि पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। रविवार सुबह जैसे ही यह खबर आई, ईरान के छोटे-बड़े शहरों में भीड़ उमड़ पड़ी। इजरायल और अमेरिका पर लगे हमले के आरोपों के बाद, ईरान के हालात अब बहुत नाजुक और तनावपूर्ण हो गए हैं।
सड़कों पर उतरी भारी भीड़: बस 'बदला' चाहिए
ईरान की राजधानी तेहरान में रविवार की सुबह आम दिनों जैसी नहीं थी। सूरज निकलते ही हजारों की संख्या में गुसाए लोग सड़कों पर आ गए। तेहरान यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ विरोध मार्च जब तक इंकलाब स्क्वायर पहुँचा, तब तक वह लोगों का समंदर बन चुका था। हर तरफ बस काला रंग और दुख का माहौल था। लोगों के हाथों में काले झंडे, देश का झंडा और कुरान थी। कई लोग अपने नेता की फोटो सीने से लगाकर रो रहे थे। भीड़ के नारों ने साफ कर दिया है कि ईरान अब पीछे हटने के मूड में नहीं है। लोगों का गुस्सा इतना ज्यादा था कि वे "हम लड़ेंगे, हम मरेंगे, पर हार नहीं मानेंगे" के नारे लगा रहे थे। चाहे जवान हों या बुजुर्ग, सबकी जुबान पर एक ही बात थी- अपने नेता की मौत का बदला लेना। इंकलाब स्क्वायर पर जमा भीड़ का संदेश साफ था: अब बातचीत का समय खत्म हो गया है और देश बदला लेने के रास्ते पर है।
पूरे देश में विरोध और दुख का माहौल
नेता की मौत का गुस्सा सिर्फ तेहरान तक ही नहीं रहा, बल्कि देश के कोने-कोने में फैल गया है। खबरों के मुताबिक, लगभग हर शहर में लोग खुद-ब-खुद सड़कों पर उतर आए हैं। इस्फाहन के मशहूर इमाम खुमैनी स्क्वायर पर हजारों लोग जमा हुए, जहाँ सब बहुत दुखी और गुस्से में थे। धार्मिक शहर कुम में भी दरगाह पर काला झंडा फहराया गया, जो इस बात का सबूत है कि देश बड़े संकट में है। मशहद, तबरीज, शिराज और अहवाज जैसे शहरों में भी कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। बाजार बंद हैं और लोग "अमेरिका की मौत" और "इजरायल की मौत" के नारे लगा रहे हैं। दुख की यह लहर अब एक बड़े आंदोलन और जवाबी कार्रवाई की मांग में बदल चुकी है।
सरकार का सख्त फैसला: 40 दिनों का शोक
ईरान सरकार ने इस घटना के बाद 40 दिनों के दुख (शोक) और 7 दिनों की छुट्टी का ऐलान किया है। इसी बीच, ईरान की सेना (IRGC) ने साफ कहा है कि वे इस हमले का जवाब देने के लिए तैयारी कर रहे हैं। सेना के बड़े अफसरों ने कहा है कि हमला करने वालों को अपने किए पर "पछताना" पड़ेगा।
मिडिल ईस्ट में बदल सकते हैं हालात
पिछले 30 सालों से सत्ता संभाल रहे नेता की मौत ईरान के इतिहास की सबसे बड़ी घटना है। "न समझौता, न हार" का नारा बता रहा है कि ईरान अब बातचीत के बजाय हथियारों का सहारा ले सकता है। सड़कों पर दिख रहा यह गुस्सा बता रहा है कि आने वाले दिनों में इस इलाके के हालात पूरी तरह बदल सकते हैं। पूरी दुनिया अब इस बात पर नजर गड़ाए बैठी है कि ईरान का अगला कदम क्या होगा, क्योंकि इससे एक बड़ी जंग छिड़ सकती है।
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