Iran Israel US War : ईरान-अमेरिका तनाव के बीच वैश्विक तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार
खबर सार :-
ईरान के युद्ध जारी रखने और अमेरिका से सीधी बातचीत के इनकार के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। इससे पूर्व संघर्ष विराम की बढ़ती उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई थी। वहीं, ईरान ने घोषणा की है कि वह मित्र देशों भारत समेत रूस, चीन, इराक और पाकिस्तान के जहाजों के होर्मुज जलमार्ग से गुजरने पर प्रतिबंध नहीं लगाएगा।
खबर विस्तार : -
मुंबई : ईरान ने युद्ध को जारी रखने और अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है। इस घटनाक्रम का असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। गुरुवार को वैश्विक तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।
मध्य-पूर्व में लगातार तनाव बढ़ना है प्रमुख कारण
ब्रेंट क्रूड वायदा 1.21 प्रतिशत बढ़कर 103.46 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 1.35 प्रतिशत उछलकर 91.54 डॉलर प्रति बैरल हो गया। इसका कारण मध्य पूर्व में लगातार तनाव बढ़ना है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार, तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थों के जरिए होने वाले संपर्क को बातचीत के तौर पर नहीं समझा जाना चाहिए। तेहरान की ओर से अमेरिका समर्थित संघर्ष-विराम प्रस्ताव को भी खारिज किए जाने की संभावना थी।
संघर्ष-विराम की बढ़ती उम्मीदों के बीच देखी गई थी कीमतों में भारी गिरावट
इससे पहले, बुधवार को पश्चिम एशिया क्षेत्र में संघर्ष-विराम की बढ़ती उम्मीदों के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट से भारत के महंगाई और चालू खाता घाटा (सीएडी) जैसे मैक्रोइकोनॉमिक संकेतकों को कुछ राहत मिल सकती है, हालांकि तकनीकी संकेतक बताते हैं कि प्रमुख समर्थन स्तरों की जांच की जा रही है।
भारत समेत पांच 'मित्र' देशों के जहाजों पर प्रतिबंध नहीं लगाएगा ईरान
भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल का हर बदलाव आमतौर पर जीडीपी के 0.3–0.5 प्रतिशत अंकों तक चालू खाता घाटे को प्रभावित करता है और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति को 20–30 आधार अंकों तक बढ़ाता है, जो कि कीमतों के आगे बढ़ने पर निर्भर करता है। इसी बीच, ईरान ने घोषणा की है कि वह भारत समेत पांच 'मित्र' देशों के जहाजों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाएगा, जिससे उन्हें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलमार्ग से गुजरने की अनुमति होगी, जबकि दूसरों के लिए पहुंच सीमित रहेगी।
विरोधी देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी
भारत के साथ-साथ रूस, चीन, पाकिस्तान और इराक के जहाजों को इस क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के बावजूद इस प्रमुख समुद्री मार्ग से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी गई है। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि जिन देशों को विरोधी माना जाता है, या जो चल रहे संघर्ष में शामिल हैं, उनसे जुड़े जहाजों को गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका, इजरायल और कुछ खाड़ी देशों के जहाजों को, जो मौजूदा संकट में भूमिका निभा रहे हैं, इस जलमार्ग से गुजरने के लिए मंजूरी नहीं दी जाएगी।
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