भारत-इजरायल की दोस्ती से क्यों सदमे में पाकिस्तान, विशेषज्ञ बोले ये बात
खबर सार :-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अपने दो दिन के इज़राइल दौरे के दूसरे दिन भारत-इज़राइल जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। PM मोदी ने कहा कि भारत और इज़राइल इस बात पर बिल्कुल साफ़ हैं कि दुनिया में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है। आतंकवाद किसी भी रूप में मंज़ूर नहीं है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के दौरे पर इज़राइल में हैं, जहां उन्हें इज़राइल का सबसे बड़ा सम्मान प्रदान किया गया। इस दौरे ने भारत और इज़राइल के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई दी है। विशेष रूप से डिफेंस, ट्रेड और सिक्योरिटी सेक्टर में दोनों देशों के बीच सहयोग मजबूत हुआ है। इस अवसर पर भारत और इज़राइल ने एक सुरक्षा समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जो भारत में वेपन सिस्टम के जॉइंट डेवलपमेंट, विशेषकर आयरन डोम सिस्टम के निर्माण पर केंद्रित है।
बहुत पुरानी है भारत-इज़राइल की दोस्ती
इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करना है। जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री मोदी के पहले इज़राइल दौरे के समय ही दोनों देशों के रिश्ते स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप के स्तर तक पहुँच गए थे। तब से लेकर अब तक कई दौरों और समझौतों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूत किया है। पीएम मोदी और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच गहरा भरोसा इस साझेदारी का मुख्य आधार बना हुआ है।
भारत-इज़राइल रक्षा संबंधों का इतिहास कारगिल युद्ध (17 जून 1999) और बालाकोट ऑपरेशन जैसे महत्वपूर्ण मोर्चों पर आधारित रहा है। कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 विमान ने द्रास और बटालिक सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों को निशाना बनाया। इस ऑपरेशन में लेज़र-गाइडेड बम और इज़राइली लाइटनिंग पॉड्स का इस्तेमाल किया गया था। बालाकोट में ऑपरेशन बंदर और ऑपरेशन सिंदूर में भी इज़राइली हथियार और तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, हेरॉन-TO और सर्चर मार्क 11 जैसे इज़राइली ड्रोन भारत की सीमा सुरक्षा के लिए सक्रिय हैं।
हेक्सागन अलायंस से बौखलाया पाकिस्तान ?
हाल के समझौते के तहत भारत और इज़राइल मिलकर हथियार और रक्षा प्रणालियों का निर्माण करेंगे। यह कदम पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय बन गया है। दरअसल, इज़राइली प्रधानमंत्री ने इस दौरे के दौरान भारत और अन्य देशों के बीच एक रीजनल गठबंधन (हेक्सागन अलायंस) बनाने की बात कही, जिससे पाकिस्तान की नाराज़गी और बढ़ गई। पाकिस्तान ने नेतन्याहू के खिलाफ संसद में प्रस्ताव पास किया, जिसमें इस गठबंधन को मुस्लिम-बहुल देशों को अलग-थलग करने और क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने का आरोप लगाया गया।
पाकिस्तान में मीडिया और प्राइम टाइम बहस का मुख्य विषय भी भारत-इज़राइल साझेदारी रही। पाक-चीन इंस्टीट्यूट के चेयरमैन मुशाहिद हुसैन सैयद और पूर्व डिप्लोमैट मलीहा लोधी ने इस गठबंधन की आलोचना करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य चीन और पाकिस्तान को अलग करना है। उन्होंने इसे एंटी-मुस्लिम और एंटी-पाकिस्तान कदम बताया। इसके बावजूद, अधिकारियों ने पाकिस्तान के दोहरे रवैये को उजागर किया, क्योंकि वह भारत-इज़राइल रणनीतिक साझेदारी की आलोचना करते हुए हमास जैसे आतंकवादी संगठनों का समर्थन करता है।
आधुनिक रक्षा प्रणाली देने का वादा
भारत ने स्पष्ट किया है कि उसकी इज़राइल के साथ रक्षा साझेदारी का मकसद केवल राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह किसी भी देश के खिलाफ नहीं है। दोनों देशों के बीच हथियार और तकनीकी सहयोग का केंद्र रक्षा, आतंकवाद निरोधक उपाय और साइबर सुरक्षा क्षेत्र में है। नए MoU के तहत भारत में आयरन डोम और अन्य सुरक्षा प्रणालियों के विकास पर फोकस रहेगा, जो सीमा सुरक्षा और आतंकवाद रोधी क्षमताओं को बढ़ाएगा।
व्यापारिक और आर्थिक क्षेत्र में भी भारत-इज़राइल संबंधों ने गति पकड़ी है। ई-कॉमर्स, टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया गया है। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे ने उच्च तकनीक और रक्षा उद्योग के क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं को गति दी। इसके अलावा, इज़राइल ने भारत को ड्रोन, मिसाइल और आधुनिक रक्षा प्रणाली प्रदान करने का आश्वासन दिया, जिससे भारत की घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
सामरिक और भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से यह साझेदारी पाकिस्तान के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। पाकिस्तान की चिंता मुख्य रूप से भारत की बढ़ती सुरक्षा और तकनीकी क्षमता से है। भारत-इज़राइल सहयोग के चलते पाकिस्तान को सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में कठिनाई हो रही है। साथ ही, यह साझेदारी पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव ला सकती है।
भारत को होगा सीधा फायदा
भारत और इज़राइल की रक्षा साझेदारी का महत्व केवल तकनीकी या सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह साझेदारी आतंकवाद विरोधी रणनीतियों, साइबर सुरक्षा, सीमा निगरानी और आधुनिक हथियार प्रणालियों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण है। दोनों देश साझा रिसर्च और विकास के माध्यम से नई तकनीक विकसित कर रहे हैं। इसका सीधा फायदा भारतीय सुरक्षा बलों को होगा।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया इस बात को दर्शाती है कि वह क्षेत्रीय गठबंधनों और रणनीतिक साझेदारी के प्रति संवेदनशील है। हालाँकि, भारत का रुख स्पष्ट है कि यह साझेदारी किसी भी देश के खिलाफ नहीं है और इसका उद्देश्य केवल अपने नागरिकों और क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारत-इज़राइल रणनीतिक साझेदारी का मकसद आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और साइबर खतरों से निपटना है।
भारत के लिए यह दौरा केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को नई दिशा देने वाला रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरे के दौरान रक्षा, तकनीकी और आर्थिक सहयोग पर बल दिया। इज़राइल ने भारत को उच्च तकनीक डिफेंस सिस्टम और सुरक्षा उपकरणों में समर्थन का आश्वासन दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-इज़राइल रणनीतिक साझेदारी पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय है। पाकिस्तान की नाराज़गी का कारण भारत का इज़राइल से हथियार और तकनीकी सहयोग में तेजी है। वहीं, भारत ने बार-बार स्पष्ट किया कि यह सहयोग किसी देश के खिलाफ नहीं है।
भारत-इज़राइल संबंध किसी के खिलाफ नहीं
इस दौरे के दौरान दोनों देशों ने डिफेंस और सुरक्षा के अतिरिक्त विज्ञान, कृषि और ऊर्जा क्षेत्र में भी समझौते किए। भारत और इज़राइल के बीच टैक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है। इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा क्षमता में वृद्धि होगी।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का इज़राइल दौरा द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाला रहा। रक्षा, आर्थिक और तकनीकी सहयोग के समझौते दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेंगे। पाकिस्तान की नाराज़गी इस साझेदारी की सशक्तता और क्षेत्रीय संतुलन बदलने की क्षमता को दर्शाती है।
भारत ने स्पष्ट किया है कि उसकी नीतियाँ सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और सामरिक संतुलन पर आधारित हैं। भारत-इज़राइल संबंध किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं हैं। नई दिल्ली ने यह भी कहा कि यह साझेदारी आतंकवाद विरोधी उपायों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
इस प्रकार, प्रधानमंत्री मोदी का इज़राइल दौरा भारत और इज़राइल के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने वाला कदम साबित हुआ है। इस दौरे से क्षेत्रीय सुरक्षा और ग्लोबल राजनीतिक परिदृश्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
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