Strait of Hormuz में भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर सस्पेंस: भारत का दावा, ईरान का इनकार
खबर सार :-
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय तेल टैंकरों की सुरक्षा पर सस्पेंस बना हुआ है। भारत के दावे और ईरान के खंडन के बीच क्या है पूरी सच्चाई? पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली/तेहरान: पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। इस संकट के बीच भारत की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर है, जहाँ से भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। गुरुवार, 12 मार्च 2026 को भारत ने दावा किया कि उसे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सुरक्षित आवाजाही का आश्वासन मिला है, लेकिन ईरान के विरोधाभासी बयानों ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है।
क्या भारत को मिला सुरक्षित गलियारा? दावों की हकीकत
भारत के सरकारी सूत्रों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को जानकारी दी है कि ईरान ने भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को बिना किसी बाधा के निकलने देने का भरोसा दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच तीन बार उच्च स्तरीय बातचीत हुई है। हाल ही में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच फोन पर हुई चर्चा में समुद्री सुरक्षा और भारत की ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता दी गई। भारत का कहना है कि इस बातचीत के बाद ही भारतीय जहाजों के लिए रास्ता साफ हुआ है।
ईरान का खंडन: क्या वाकई कोई समझौता हुआ है?
भारतीय दावों के विपरीत, ईरान की ओर से आ रहे संकेत कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। रॉयटर्स ने ईरानी सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारत के साथ ऐसा कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है। तेहरान के आधिकारिक बयान में फारस की खाड़ी में अस्थिरता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया गया है, लेकिन भारतीय जहाजों को विशेष छूट देने के मुद्दे पर चुप्पी साधी गई है। जानकारों का मानना है कि ईरान के भीतर अलग-अलग केंद्रों से आ रहे ये विरोधाभासी बयान भारत के लिए "वेट एंड वॉच" (इंतजार करो और देखो) की स्थिति पैदा कर रहे हैं।
होर्मुज में 'लाइसेंस राज' और भारत की स्थिति
होर्मुज जलडमरूमध्य वर्तमान में एक "पॉकेट-डिप्लोमेसी" का केंद्र बन गया है। जहाँ चीन अपने 'शैडो फ्लीट' के जरिए आसानी से व्यापार कर रहा है और बांग्लादेश को कूटनीतिक राहत मिली है, वहीं पश्चिमी देशों के जहाजों के लिए यह रास्ता लगभग बंद है। भारत इस समय कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि उसकी ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित न हो।
होर्मुज जलडमरूमध्य का डेटा और सुरक्षा स्थिति
होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूदा सुरक्षा स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है, जो सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत होने के बाद से अब तक ईरान इस संकरे समुद्री मार्ग में कम से कम 16 व्यापारिक जहाजों पर हमला कर चुका है। इन हमलों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लाइनों में खौफ पैदा कर दिया है। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि वर्तमान में भारतीय ध्वज वाले लगभग 28 बड़े जहाज इसी अशांत क्षेत्र के पूर्व और पश्चिम में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन जहाजों पर कुल 778 भारतीय नाविक सवार हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर भारत सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार जहाज प्रबंधन कंपनियों और स्थानीय दूतावासों के साथ समन्वय कर रहे हैं।
समुद्री सुरक्षा के इस संकट ने वैश्विक तेल बाजार में भी अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। तेहरान ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि इस क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ा, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और यह 200 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर तक पहुंच सकती हैं। भारत की चिंताएं तब और बढ़ गईं जब बुधवार को गुजरात के कांडला बंदरगाह की ओर आ रहे एक थाई जहाज पर होर्मुज जलडमरूमध्य में हमला हुआ। इस घटना पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि चल रहे संघर्ष के बीच निर्दोष व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। इन हमलों में भारतीय नागरिकों की जान जाना भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक और मानवीय संकट बन गया है, जिससे निपटने के लिए नई दिल्ली अब फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।
भारतीय विदेश मंत्रालय का रुख
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया जाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। भारत अपने नाविकों की सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन और दूतावासों के साथ निरंतर संपर्क में है। हालांकि, ईरान की ओर से आधिकारिक पुष्टि के अभाव में, भारतीय तेल कंपनियों और शिपिंग एजेंसियों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
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