ढाका में गहराता ऊर्जा संकटः शासन की विफलता या सुधारों की आड़ में लापरवाही का नतीजा
खबर सार :-
बांग्लादेश का एलपीजी संकट केवल ऊर्जा आपूर्ति की समस्या नहीं, बल्कि शासन और नेतृत्व की परीक्षा है। अवामी लीग के आरोप इस ओर इशारा करते हैं कि अंतरिम सरकार बुनियादी प्रशासनिक जिम्मेदारियों में विफल रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता को और गहरा सकता है।
खबर विस्तार : -
Bangladesh LPG crisis: बांग्लादेश एक बार फिर गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। इस बार मार आम लोगों की रसोई पर पड़ी है। देश के कई हिस्सों में एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की भारी किल्लत देखी जा रही है। गैस सिलेंडर बाजारों से गायब हैं, कीमतें अस्थिर हैं और उपभोक्ता परेशान। इस पूरे हालात के लिए विपक्षी अवामी लीग ने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।
‘संकट अचानक नहीं, बल्कि टालने योग्य था’
अवामी लीग का कहना है कि मौजूदा एलपीजी संकट किसी वैश्विक ऊर्जा संकट या अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति बाधा का नतीजा नहीं है। पार्टी के अनुसार, यह पूरी तरह से घरेलू स्तर पर शासन और प्रशासन की विफलता है। बयान में कहा गया कि बांग्लादेश पहले भी वैश्विक ऊर्जा संकटों से जूझ चुका है, लेकिन तब सिस्टम को चरमराने से बचा लिया गया था।
बाजार में गैस नहीं, लेकिन कमी भी नहीं!
पार्टी ने एक अहम सवाल उठाया है—जब उपभोक्ता भुगतान के लिए तैयार हैं, आयात में कोई बाधा नहीं है और संसाधन मौजूद हैं, तो फिर एलपीजी सिलेंडर बाजार से क्यों गायब हैं? अवामी लीग का दावा है कि यह स्थिति सप्लाई चेन के पूरी तरह अव्यवस्थित होने का संकेत है। उनके अनुसार, यह संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि प्रशासनिक पक्षाघात का प्रमाण है।
नेतृत्व बनाम संसाधन
अवामी लीग ने साफ कहा कि यह संसाधनों की विफलता नहीं, बल्कि नेतृत्व की विफलता है। पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय संभावित गैस संकट का पूर्वानुमान लगाया जाता था। एलएनजी आयात, एलपीजी और सीएनजी सब्सिडी, तथा सक्रिय सरकारी हस्तक्षेप के जरिए हालात को संभाला जाता था। मौजूदा अंतरिम सरकार पर इन सभी मोर्चों पर निष्क्रिय रहने का आरोप लगाया गया है।
‘सुधार’ के नाम पर बुनियादी जिम्मेदारियों से बचाव?
अवामी लीग ने अंतरिम सरकार की “सुधार” नीति पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि सरकार बड़े-बड़े सुधारों की बातें तो करती है, लेकिन शासन की सबसे बुनियादी जिम्मेदारी—देश को सुचारु रूप से चलाना—उसमें विफल रही है। नतीजतन, एक मैनेज की जा सकने वाली चुनौती अब राष्ट्रीय आपातकाल का रूप ले चुकी है।
सिस्टम की विफलता के स्तर पर पहुंचा मामला
पार्टी के अनुसार, गैस संकट अब शॉर्ट-टर्म समस्या नहीं रहा, बल्कि सिस्टम फेलियर के स्तर तक पहुंच चुका है। मौजूदा बुनियादी ढांचे और आयात चैनलों के बावजूद सरकार आपूर्ति प्रबंधन, बाजार नियंत्रण और निरंतरता बनाए रखने में असफल रही है। इससे ऊर्जा तक पहुंच आम नागरिकों के लिए अनिश्चित होती जा रही है।
2024 के बाद की गई लापरवाहियां
बांग्लादेश की राजनीतिक पार्टी अवामी लीग ने आरोप लगाया कि 2024 में सत्ता संभालने के बाद से अंतरिम सरकार ने ऊर्जा संकट से बचाव के लिए कुछ भी नहीं किया। आज जो भी ऊर्जा संकट जनता झेल रही है, वह सरकार की नाकामियों का नतीजा है।
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गैस खरीद प्रणाली में कोई ठोस सुधार नहीं किया
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एलएनजी फाइनेंसिंग का पुनर्गठन नहीं किया
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एलपीजी और सीएनजी बाजार के लिए स्थिरीकरण तंत्र नहीं बनाया,
- घरेलू गैस खोज के विस्तार की कोई पहल नहीं की।
- इसके अलावा सप्लाई प्लानिंग तदर्थ रही, स्टोरेज बफर की अनदेखी हुई और बाजार निगरानी कमजोर पड़ गई।
‘कुछ भी न करने’ की कीमत
अवामी लीग का कहना है कि व्यवहार में “सुधार” एक नारा बनकर रह गया है, जिसका इस्तेमाल देरी और निष्क्रियता को छिपाने के लिए किया जा रहा है। पार्टी के मुताबिक मौजूदा गैस संकट किसी सुधार प्रक्रिया की कीमत नहीं, बल्कि सरकार द्वारा कुछ भी न करने का सीधा नतीजा है।
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