पश्चिम बंगाल में CAA के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के मामलों की होगी जांच, स्पेशल सेल गठित

खबर सार :-
पश्चिम बंगाल में 2019 में नागरिक संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामलों की दोबारा विस्तृत जांच की जाएगी। राज्य सरकार के आदेश के बाद स्पेशल सेल गठित हो गया है।
पश्चिम बंगाल में CAA के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के मामलों की होगी जांच, स्पेशल सेल गठित
खबर विस्तार : -

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को कथित नुकसान के मामलों की जांच के आदेश दिए हैं। इस संबंध में राज्य के कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (DGP) सिद्धनाथ गुप्ता को निर्देश जारी किए गए हैं।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, उस समय दर्ज सभी शिकायतों की विस्तृत जांच करने का निर्देश जारी किया गया है, जिसमें राज्य के विभिन्न हिस्सों में तोड़-फोड़, आगजनी और सरकारी व सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप शामिल हैं। इस उद्देश्य के लिए राज्य पुलिस के भीतर एक विशेष जांच इकाई (स्पेशल सेल) गठित करने का निर्णय भी लिया गया है।

2019 में दर्ज सभी मामलों की होगी जांच

सूत्रों का कहना है कि इस विशेष सेल का कार्यालय भवानीपुर में स्थापित किया जाएगा, जो मुख्यमंत्री का विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र है। यह इकाई 2019 में दर्ज सभी मामलों की फिर से जांच करेगी और नई केस फाइलें तैयार करेगी। सरकार के निर्णय के तहत, यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप साबित होते हैं, तो नुकसान के लिए मुआवजा वसूलने की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, रेलवे संपत्ति से संबंधित मामलों की जांच के लिए रेलवे पुलिस का सहयोग लेने का भी निर्णय लिया गया है।

कई जिलों में सरकारी संपत्ति को नुकसान

गौरतलब है कि दिसंबर 2019 में संसद के दोनों सदनों द्वारा विधेयक पारित होने के बाद CAA कानून बना, जिससे देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान पश्चिम बंगाल में भी कई जगहों पर हिंसा और तोड़-फोड़ की घटनाएं सामने आईं। मुर्शिदाबाद, उलुबेरिया (हावड़ा) और बर्धमान सहित कई जिलों में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप सामने आए। बेलडांगा पुलिस स्टेशन क्षेत्र में तोड़-फोड़ और आगजनी की रिपोर्ट दर्ज की गईं, जबकि उलुबेरिया में ट्रेनों और स्टेशन की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। राज्य सरकार के इस निर्णय को 2019 की घटनाओं की व्यापक समीक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

 

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