मण्डालिया मैदा में भगवान देवनारायण मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न, तीन दिन तक भक्ति, सेवा और आस्था का रहा अद्भुत संगम

खबर सार :-

तीन दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के समापन पर पूरे मण्डालिया मैदा गांव में भक्ति, सेवा, संस्कार और सामाजिक एकजुटता का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं का कहना था कि भगवान देवनारायण की कृपा से सम्पन्न हुआ।
मण्डालिया मैदा में भगवान देवनारायण मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न, तीन दिन तक भक्ति, सेवा और आस्था का रहा अद्भुत संगम

खबर विस्तार : -

चाकसूः ग्राम पंचायत मण्डालिया मैदा में गुर्जर समाज के आराध्य देव भगवान देवनारायण की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा एवं तीन दिवसीय धार्मिक महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। तीन दिनों तक पूरा गांव धर्ममय वातावरण में डूबा रहा। वैदिक मंत्रोच्चार, विशाल कलश यात्रा, 11 कुंडीय महायज्ञ, मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा, मध्यरात्रि जन्मोत्सव, भजन संध्या, देव दर्शन और विशाल भंडारे सहित विभिन्न धार्मिक आयोजनों ने इस महोत्सव को ऐतिहासिक बना दिया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति और ग्रामीणों की सामूहिक सहभागिता ने आयोजन को यादगार बना दिया।

यह भव्य धार्मिक आयोजन श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री बालकानन्द जी महाराज के पावन सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। वहीं देवधाम जोधपुरिया से आए भगवान देवनारायण मंदिर ट्रस्ट के भोपा एवं धार्मिक आयोजन दल ने वैदिक परंपराओं के अनुरूप सभी प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन किया। तीन दिनों तक मण्डालिया मैदा गांव धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहा, जहां दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने पहुंचे।

प्रथम दिन निकली भव्य कलश यात्रा

महोत्सव के पहले दिन हजारों महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर सिर पर कलश रखकर भव्य कलश यात्रा निकाली। भगवान देवनारायण के जयघोष, ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और भक्ति गीतों के बीच निकली यह यात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से होती हुई मंदिर परिसर पहुंची। रास्ते भर ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। पूरा गांव धार्मिक उत्साह और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा

दूसरे दिन विद्वान आचार्यों के सान्निध्य में 11 कुंडीय महायज्ञ एवं हवन का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान देवनारायण की दिव्य प्रतिमा का पूजन सम्पन्न कराया गया। इसके पश्चात कमल के पुष्प पर विराजमान भगवान देवनारायण की प्रतिमा की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा कर मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया गया।

जैसे ही प्राण-प्रतिष्ठा की प्रक्रिया पूर्ण हुई, पूरा मंदिर परिसर "भगवान देवनारायण की जय" के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने दर्शन कर परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

तीन दिन तक चला विशाल भंडारा

पूरे आयोजन के दौरान लगातार तीन दिनों तक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर महाप्रसादी ग्रहण की। आयोजन समिति, ग्रामीणों, युवाओं और महिला मंडलों ने सेवा भावना के साथ भोजन वितरण, पेयजल एवं अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने आयोजन की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए इसे अनुकरणीय बताया।

मध्यरात्रि में हुए भगवान के दिव्य दर्शन

रविवार मध्यरात्रि महोत्सव का सबसे विशेष और आध्यात्मिक क्षण तब आया, जब देवधाम जोधपुरिया से आए भोपाओं एवं धार्मिक दल ने परंपरागत विधि के अनुसार कांसे की थाली में निर्मित कमल के पुष्प में भगवान देवनारायण के दिव्य दर्शन कराए। श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा और भाव-विभोर होकर इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया।

जैसे ही भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इसे अलौकिक और जीवनभर याद रहने वाला आध्यात्मिक अनुभव बताया। देर रात तक मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भरा रहा।

श्रद्धा के साथ मनाया गया जन्मोत्सव

दिव्य दर्शनों के पश्चात मध्यरात्रि में भगवान देवनारायण का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मंदिर परिसर को दीपों से सजाया गया। भक्ति गीतों, जयकारों और आरती के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान के जन्मोत्सव में भाग लेकर अपनी आस्था प्रकट की।

भोपाओं ने सुनाई देवनारायण की गोठ

कार्यक्रम के दौरान देवधाम जोधपुरिया से आए भोपाओं ने भगवान देवनारायण की पारंपरिक "देवनारायण गोठ" का गायन किया। श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और भावनात्मक जुड़ाव के साथ इस धार्मिक परंपरा का श्रवण किया। वहीं बाहर से आए प्रसिद्ध भजन गायकों एवं लोक कलाकारों ने भजन संध्या और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से देर रात तक भक्तिमय वातावरण बनाए रखा। भजनों और लोकगीतों पर श्रद्धालु भक्ति भाव से झूमते नजर आए।

ग्रामीणों की एकजुटता बनी आयोजन की पहचान

तीन दिवसीय महोत्सव की सफलता में पूरे गांव की एकजुटता सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई। आयोजन समिति के साथ युवाओं, महिलाओं और ग्रामीणों ने मिलकर पार्किंग, पेयजल, भोजन, साफ-सफाई, सुरक्षा और श्रद्धालुओं के स्वागत सहित सभी व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित किया। सामूहिक सहयोग और सेवा भावना ने आयोजन को अनुशासित और सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सामाजिक समरसता का भी दिया संदेश

यह धार्मिक महोत्सव केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक समरसता, भाईचारे और सामूहिक सहभागिता का भी प्रेरक उदाहरण बना। विभिन्न गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान देवनारायण के दर्शन कर समाज में एकता, सद्भाव और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। लोगों ने कहा यह ऐतिहासिक आयोजन गांव के धार्मिक इतिहास में लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था एवं सामाजिक एकता का प्रेरणास्रोत बनेगा।

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