गड्ढों में दफन विकास! बदहाल सड़क पर ग्रामीणों का गुस्सा, विधायक की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
खबर सार :-
ग्रामीणों का आरोप है कि भाजपा सरकार बनने के बाद से लगातार इस सड़क के निर्माण और मरम्मत की मांग उठाई जा रही है। कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों को शिकायतें दी गईं, लेकिन करीब दो वर्ष बीत जाने के बाद भी स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।
खबर विस्तार : -
चाकसूः जयपुर जिले के चाकसू क्षेत्र में मण्डालिया मैदा–शक्करखावदा–चाकसू मार्ग की बदहाल स्थिति अब ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। बरसात के मौसम में सड़क पर बने गहरे गड्ढों और जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों ग्रामीण, किसान, मजदूर, छात्र-छात्राएं और व्यापारी आवागमन करते हैं, लेकिन सड़क की खराब हालत के कारण हर सफर जोखिम भरा बना हुआ है। लोगों का कहना है कि सड़क की बदहाली को लेकर लगातार आवाज उठाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई है।
सोशल मीडिया बना ग्रामीणों के आक्रोश का मंच
सड़क की खराब हालत को लेकर अब ग्रामीणों ने सोशल मीडिया का सहारा लिया है। फेसबुक और व्हाट्सएप पर सड़क की तस्वीरें और वीडियो लगातार साझा किए जा रहे हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रीय विधायक रामावतार बैरवा को टैग कर जल्द सड़क निर्माण और मरम्मत की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई तीखे सवाल भी उठाए जा रहे हैं। कुछ पोस्ट में लिखा गया है कि “कितनी लाशों के बाद सड़क बनेगी?” वहीं युवाओं का कहना है कि चुनाव के समय किए गए विकास के वादे आखिर कब पूरे होंगे। ग्रामीणों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों से इस समस्या को उठाने की अपील की है, ताकि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक उनकी आवाज पहुंच सके।
विकास के दावों पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में बुनियादी सुविधाएं ही बदहाल हैं। उनका कहना है कि गांवों को शहर से जोड़ने वाली मुख्य सड़कें यदि सुरक्षित नहीं होंगी तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान सड़क निर्माण और क्षेत्र के विकास को लेकर कई वादे किए गए थे, लेकिन चुनाव के बाद समस्या जस की तस बनी हुई है। लोगों का कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि मौके पर काम दिखाई देना चाहिए।
छात्र, किसान और मरीज सबसे अधिक प्रभावित
मण्डालिया मैदा–शक्करखावदा–चाकसू मार्ग आसपास के कई गांवों को चाकसू से जोड़ता है। इस सड़क का उपयोग बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं स्कूल और कॉलेज जाने के लिए करते हैं। किसान अपनी कृषि उपज मंडी तक पहुंचाने के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं, जबकि मजदूर रोजाना रोजगार के लिए इसी रास्ते से सफर करते हैं।
बरसात के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार दोपहिया वाहन चालक और अन्य राहगीर इन गड्ढों के कारण हादसों का शिकार हो चुके हैं। आपात स्थिति में एम्बुलेंस जैसी सेवाओं के पहुंचने में भी परेशानी हो सकती है।
ग्रामीणों की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि फिलहाल पूरी सड़क का निर्माण संभव नहीं है तो कम से कम बरसात के दौरान गहरे गड्ढों की अस्थायी मरम्मत करवाई जाए। उनका कहना है कि छोटी-सी पहल भी कई दुर्घटनाओं को रोक सकती है और लोगों को राहत मिल सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद सड़क की मरम्मत को लेकर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। अब लोग चाहते हैं कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान निकाले।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण या मरम्मत का काम शुरू नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर कार्रवाई दिखनी चाहिए।
बड़ा सवाल
जब हजारों ग्रामीण सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक सड़क की समस्या को लेकर आवाज उठा रहे हैं, तो क्या जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि इस जनआक्रोश को गंभीरता से लेंगे? या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही इस बदहाल सड़क की ओर ध्यान दिया जाएगा?
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