तीन साल बाद प्रशासनिक कार्रवाई से गरमाई सियासत, पटवारी-कानूनगो संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी

खबर सार :-

अब तीन साल बाद पटवारी पर हुई कार्रवाई ने इस पुराने मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है। एक ओर प्रशासन ने कार्रवाई की है, वहीं कर्मचारी संगठन इसे गलत बताते हुए विरोध की राह पर हैं। पटवारी संगठनों का कहना है कि कार्रवाई से पहले सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए था। वहीं प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में अभी तक कोई नया बयान सामने नहीं आया है।
तीन साल बाद प्रशासनिक कार्रवाई से गरमाई सियासत, पटवारी-कानूनगो संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी

खबर विस्तार : -

भीलवाड़ाः जिले के शाहपुरा तहसील क्षेत्र के नरसिंहपुरा गांव में 2 अगस्त 2023 को हुए बहुचर्चित कोटड़ी कोयला भट्टी कांड का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। करीब तीन वर्ष बाद जिला प्रशासन की ओर से तत्कालीन गिरड़िया पटवार हल्के के पटवारी हरदेव बैरवा को राजकीय सेवा से बर्खास्त किए जाने के बाद प्रशासनिक और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

इस कार्रवाई के बाद राजस्थान कानूनगो एवं पटवार संघ ने विरोध का ऐलान कर दिया है। संघ ने इसे एकतरफा और अन्यायपूर्ण कार्रवाई बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं कर्मचारी अधिकारी विकास संस्थान ने भी पटवारी के समर्थन में उतरने का निर्णय लिया है।

तीन साल बाद हुई बड़ी कार्रवाई, कर्मचारियों में नाराजगी

जिला प्रशासन की ओर से 22 जुलाई 2026 को जारी आदेश में पटवारी हरदेव बैरवा को सेवा से बर्खास्त किया गया। आदेश सामने आने के बाद जिलेभर के पटवारी और कानूनगो संगठनों में नाराजगी फैल गई। राजस्थान कानूनगो एवं पटवार संघ की जिला शाखा की आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में आंदोलन की रणनीति तैयार की गई। संघ ने निर्णय लिया कि सोमवार, 27 जुलाई को जिले के सभी उपखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा और उपखंड अधिकारियों के माध्यम से जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि यदि प्रशासन अपने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करता है तो बुधवार से भीलवाड़ा जिले के सभी पटवारी और कानूनगो पूर्ण कार्य बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं। संघ ने यह भी कहा है कि हड़ताल के कारण आमजन को होने वाली परेशानियों और राजस्व कार्यों में आने वाली बाधाओं की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

कर्मचारी अधिकारी विकास संस्थान भी समर्थन में उतरा

पटवारी हरदेव बैरवा के समर्थन में कर्मचारी अधिकारी विकास संस्थान भी सामने आया है। रविवार को भीलवाड़ा के अंबेडकर भवन, पुर में संस्थान की बैठक आयोजित की गई, जिसमें पूरे मामले पर चर्चा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सोमवार शाम 4 बजे जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। संस्थान के पदाधिकारियों ने सभी सदस्यों से आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।

बर्खास्त पटवारी ने वीडियो जारी कर बताई पीड़ा

सेवा से बर्खास्त किए गए पटवारी हरदेव बैरवा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी स्थिति बताई है। उन्होंने दावा किया कि 2 अगस्त 2023 को घटना के बाद सभी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे थे और संबंधित अतिक्रमण भी हटा दिया गया था। बैरवा का कहना है कि उन्हें 14 अगस्त तक धारा 91 के तहत अतिक्रमण संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। उन्होंने दावा किया कि जांच के दौरान तहसील प्रशासन और उपखंड प्रशासन ने उन्हें निर्दोष माना था, इसके बावजूद जिला प्रशासन ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बिना पर्याप्त आधार के कार्रवाई का सामना करना पड़ा और उन्हें इस मामले में बलि का बकरा बनाया गया।

वीडियो संदेश में उन्होंने बताया कि बर्खास्तगी की जानकारी मिलने के बाद उनकी तबीयत खराब हो गई। उन्होंने कहा कि 13 दिसंबर 2025 को उन्हें हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उदयपुर में स्टेंट डलवाना पड़ा था। स्वास्थ्य में सुधार के बाद 1 जून 2026 को ही उन्हें कोटड़ी हल्के के बोरड़ा में नई पोस्टिंग मिली थी, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस मामले पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

क्या था कोटड़ी कोयला भट्टी कांड?

2 अगस्त 2023 को भीलवाड़ा जिले के नरसिंहपुरा गांव में हुई घटना ने पूरे राजस्थान को झकझोर दिया था। आरोप था कि एक नाबालिग युवती के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर शव को कोयला बनाने वाली भट्टी में डाल दिया गया था।

इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया था। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने कई दिनों तक आंदोलन किया था। दोषियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन और सड़क जाम किए गए थे। यह मामला लंबे समय तक प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता रहा था।

राजस्व व्यवस्था पर पड़ सकता है असर

यदि कर्मचारी संगठनों की प्रस्तावित हड़ताल होती है तो जिले की राजस्व व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना है। नामांतरण, सीमांकन, फसल गिरदावरी, भूमि संबंधी अन्य कार्यों सहित कई महत्वपूर्ण सेवाओं पर असर पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर सोमवार को होने वाले प्रदर्शन और जिला प्रशासन के रुख पर टिकी हुई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन अपने फैसले पर कायम रहता है या कर्मचारी संगठनों के विरोध को देखते हुए मामले में पुनर्विचार करता है।

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