Bengal Political Crisis 2026 : बंगाल में 'खेला' खत्म, ममता ने नहीं छोड़ा मोह, राज्यपाल ने बर्खास्त की सरकार और भंग की विधानसभा
खबर सार :-
Bengal Political Crisis 2026 : पश्चिम बंगाल में बड़ा राजनीतिक धमाका! चुनाव हारने के बाद भी ममता बनर्जी ने नहीं दिया इस्तीफा, तो राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा भंग कर दी। जानें बंगाल के इस बड़े संवैधानिक संकट की पूरी कहानी।
खबर विस्तार : -
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज वह ऐतिहासिक और नाटकीय मोड़ आ गया, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। सत्ता के गलियारों में महीनों से चल रही खींचतान का अंत अंततः लोकतंत्र के सबसे कठोर संवैधानिक फैसले के साथ हुआ। राज्यपाल आरएन रवि ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अड़ियल रुख को देखते हुए राज्य विधानसभा को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।
Bengal Political Crisis 2026 :कुर्सी पर अड़ी 'दीदी', राज्यपाल का कड़ा प्रहार
पिछले कई दिनों से बंगाल की राजनीति में अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे थे। 2026 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी शिकस्त के बावजूद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया था। संवैधानिक संकट को गहराता देख राज्यपाल आरएन रवि ने संविधान के अनुच्छेद 174 (2) (बी) के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए ममता कैबिनेट को बर्खास्त कर दिया।
कोलकाता स्थित राजभवन से जारी आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया है कि राज्य में संवैधानिक मशीनरी के ठप होने और जनादेश का अपमान होने की स्थिति में यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
Bengal Political Crisis 2026 : जनादेश बनाम जिद- क्यों पैदा हुए ये हालात?
2026 के चुनावी नतीजों ने बंगाल की राजनीति की पूरी तस्वीर बदल दी है। 293 सदस्यीय विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी ने 207 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया है। वहीं, 2011 से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी की पार्टी महज 80 सीटों पर सिमट कर रह गई।
ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा झटका उनकी अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से लगा, जहाँ भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें 15 हजार से अधिक वोटों के अंतर से धूल चटा दी। बावजूद इसके, ममता बनर्जी ने हार स्वीकार करने के बजाय 'चुनावी धांधली' का राग अलापा। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा, "हम हारे नहीं हैं, हमें साजिश के तहत हराया गया है। मैं इस्तीफा नहीं दूंगी।"
Bengal Political Crisis 2026 : संवैधानिक संकट और राजभवन की कार्रवाई
ममता बनर्जी के इस रुख ने बंगाल को एक ऐसे चौराहे पर खड़ा कर दिया था, जहाँ विजेता पार्टी (भाजपा) के पास बहुमत होते हुए भी सरकार बनाने का रास्ता बाधित हो रहा था। राज्यपाल ने बार-बार ममता बनर्जी को गरिमापूर्ण तरीके से पद त्यागने की सलाह दी, लेकिन जब मुख्यमंत्री अपनी जिद पर अड़ी रहीं, तो राज्यपाल ने कैबिनेट को भंग करने का कड़ा फैसला लिया।
अब राज्य में राष्ट्रपति शासन या नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। भाजपा की ओर से इस कदम का स्वागत किया गया है, जबकि टीएमसी ने इसे 'लोकतंत्र की हत्या' करार दिया है। बंगाल की जनता, जिसने स्पष्ट जनादेश दिया था, अब इस अभूतपूर्व राजनीतिक ड्रामे के बाद नई सरकार के शपथ ग्रहण का इंतजार कर रही है।
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