Varun Gandhi PM Modi Meeting: क्या पीलीभीत के पूर्व सांसद की भाजपा में शुरू होगी 'दूसरी पारी'?
खबर सार :-
Varun Gandhi PM Modi Meeting: वरुण गांधी ने सपरिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। जानें क्या हैं इसके राजनीतिक मायने और क्या भाजपा में शुरू होने वाली है वरुण गांधी की नई पारी? विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: भारतीय राजनीति के गलियारों में पिछले कुछ समय से शांत दिख रहे वरुण गांधी ने एक बार फिर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पीलीभीत के पूर्व सांसद वरुण गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सपरिवार मुलाकात की। इस शिष्टाचार भेंट की तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। इसे वरुण गांधी की मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय वापसी और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके रिश्तों पर जमी बर्फ के पिघलने के तौर पर देखा जा रहा है।
भावुक संदेश के साथ जताया प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद वरुण गांधी ने सोशल मीडिया पर इस भेंट की कुछ झलकियां साझा कीं। उन्होंने पीएम मोदी के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त करते हुए उनके व्यक्तित्व को 'पितृवत स्नेह' और 'संरक्षण' देने वाला बताया। वरुण ने अपने पोस्ट में लिखा, "आपसे हुई भेंट इस विश्वास को और भी दृढ़ बना देती है कि आप देश और देशवासियों के सच्चे अभिभावक हैं।" इस मुलाकात में वरुण गांधी की पत्नी और उनकी छोटी पुत्री भी साथ थीं, जिनके प्रति प्रधानमंत्री का स्नेह साफ नजर आया।
बागी तेवरों से लेकर टिकट कटने तक का सफर
याद दिला दें कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले वरुण गांधी और भाजपा के बीच की दूरियां जगजाहिर थीं। वरुण गांधी अपनी ही सरकार की कुछ नीतियों, विशेषकर किसानों के मुद्दे, बेरोजगारी और महंगाई जैसे विषयों पर काफी मुखर रहे थे। उनके इन बयानों को अक्सर 'बागी तेवर' के रूप में देखा गया। परिणाम स्वरूप, 2024 के आम चुनाव में भाजपा ने उन्हें पीलीभीत से टिकट न देकर जितिन प्रसाद को मैदान में उतारा था।
संयम और चुप्पी ने बदली सियासी हवा
टिकट कटने के बाद वरुण गांधी ने पीलीभीत की जनता के नाम एक भावुक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने खुद को वहां का 'बेटा' बताया था। हालांकि, कयास लगाए जा रहे थे कि वे कांग्रेस या किसी अन्य दल का दामन थाम सकते हैं, लेकिन वरुण ने पूरी तरह से संयम बनाए रखा। उन्होंने न तो पार्टी के खिलाफ कोई बयान दिया और न ही चुनाव में किसी विपक्षी दल का प्रचार किया। उनकी इसी चुप्पी और अब प्रधानमंत्री से इस गर्मजोशी भरी मुलाकात ने सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है।
वरुण गांधी की भविष्य की भूमिका: क्या है संकेत?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी के लिए 'अभिभावक' जैसे शब्दों का प्रयोग करना इस बात का संकेत है कि वरुण गांधी और पार्टी आलाकमान के बीच संवाद के रास्ते फिर से खुल गए हैं। पीलीभीत की राजनीति में गांधी परिवार का दशकों पुराना वर्चस्व रहा है और वरुण गांधी की छवि एक प्रखर वक्ता और विद्वान नेता की रही है। ऐसे में भाजपा उन्हें आने वाले समय में संगठन के भीतर कोई बड़ी जिम्मेदारी या किसी राज्य में महत्वपूर्ण भूमिका सौंप सकती है।
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