शहीद दिवस पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन, नागरिकों ने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उपेक्षा पर जताई चिंता
खबर सार :-
इस सोमवार को 'शहीद दिवस' के अवसर पर, स्थानीय गांधी मैदान में एक भव्य श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आयोजक अभिषेक अग्रहरि ने अमर शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
खबर विस्तार : -
ओबरा/सोनभद्र: शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस के पावन अवसर पर सोमवार को स्थानीय गांधी मैदान में ‘सोन चेतना सामाजिक संगठन’ के तत्वाधान में भव्य श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।
ओबरा की वर्तमान स्थिति पर व्यक्त की चिंता
कार्यक्रम के आयोजक अभिषेक अग्रहरी ने अमर शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और ओबरा नगर की वर्तमान जर्जर स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि जिन क्रांतिकारियों ने शोषण-मुक्त और न्यायपूर्ण भारत का सपना देखा था, आज उन्हीं के बलिदान की धरती प्रशासनिक उत्पीड़न और जनमानस की उपेक्षा का केंद्र बन चुकी है।
अभिषेक अग्रहरी ने बताया कि नगर में समस्याओं का अंबार है। ओबरा इंटर कॉलेज का निजीकरण कर गरीब बच्चों की शिक्षा छीनी जा रही है, ओबरा अस्पताल वेंटिलेटर की सुविधाओं पर निर्भर है, और स्थानीय परियोजनाओं में योग्यता होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार से वंचित किया जा रहा है। श्रमिक वर्ग की स्थिति भयावह है, जहाँ मजदूरों से 12-12 घंटे कठिन परिश्रम लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें केवल 8 घंटे का वेतन भी नहीं दिया जाता। CSR फंड का दुरुपयोग भी गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
आम आदमी का हो रहा शोषण
अग्रहरी ने स्पष्ट किया कि ओबरा की इस बदहाली का मुख्य कारण स्थानीय जनमानस का आपसी बिखराव और एकजुटता की कमी है। इसका सीधा लाभ उठाकर प्रशासनिक अधिकारी और ठेकेदार आम आदमी का शोषण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक नागरिक अपनी जाति और व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर संगठित नहीं होंगे, तब तक न्याय की उम्मीद बेमानी है।
ठेका आवंटन में पारदर्शिता की कमी और भुगतान में अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने पर भी न्याय न मिलना लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है।
कार्यक्रम में विकास पाठक, सूर्य पटेल, संजय गौतम, सिद्धांत पटेल, बाबूलाल सोनकर सहित अनेक जागरूक नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी मिलेगी जब ओबरा का जनमानस संगठित होकर अपने संवैधानिक अधिकारों, पारदर्शी प्रशासन और भ्रष्टाचार मुक्त ऊर्जा नगरी के लिए साझा संघर्ष का बिगुल फूंकेगा।
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