राष्ट्र प्रथम और पंच परिवर्तन : संघ के शताब्दी वर्ष में सामाजिक समरसता का शंखनाद, अवध प्रान्त के 48 लाख परिवारों से सम्पर्क, 2728 स्थानों पर हुए हिन्दू सम्मेलन
खबर सार :-
आरएसएस अपने शताब्दी वर्ष को 'राष्ट्र प्रथम' और 'पंच परिवर्तन' के संकल्प के साथ मना रहा है। लखनऊ में अवध प्रांत के पदाधिकारियों ने सामाजिक समरसता और संगठन विस्तार का पूरा रोडमैप साझा किया।
खबर विस्तार : -
लखनऊ: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा है। इस ऐतिहासिक पड़ाव पर संघ ने समाज में 'राष्ट्र प्रथम' की भावना और 'पंच परिवर्तन' के संस्कार को आत्मसात करने का आह्वान किया है। बीते दिनों ही हरियाणा के समालखा में संपन्न हुई 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' के निर्णयों की जानकारी देते हुए अवध प्रांत के पदाधिकारियों ने लखनऊ में संघ के भविष्य के रोडमैप और सामाजिक एकता के संकल्पों को साझा किया। जियामऊ स्थित विश्व संवाद केंद्र में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रांत संघचालक सरदार स्वर्ण सिंह ने बताया कि संघ इस वर्ष संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष को बड़े स्तर पर मना रहा है। इस संदर्भ में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के जारी वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि संत रविदास ने भक्ति मार्ग के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव को जड़ से मिटाने का कार्य किया था। वर्तमान परिदृश्य में, जब कुछ विभाजनकारी शक्तियां समाज को जाति और वर्ग के नाम पर बांटने का षड्यंत्र रच रही हैं, तब संत रविदास के जीवन मूल्य और उनकी 'वाणी' समाज को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है।
शताब्दी वर्ष के दौरान संघ की योजना युवा पीढ़ी को राष्ट्रबोध से जोड़ने की
संघ का मानना है कि संत रविदास ने श्रम की प्रतिष्ठा और पारदर्शी आचरण को जो महत्व दिया, वही आज के विकसित भारत की आधारशिला है। संघ ने आगामी वर्ष के लिए पांच प्रमुख विषयों यानी 'पंच परिवर्तन' पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। इसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवन शैली और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। शताब्दी वर्ष के दौरान संघ की योजना युवा पीढ़ी को राष्ट्रबोध से जोड़ने की है। युवाओं में संगठन के प्रति उत्साह बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए अधिक से अधिक शाखाएं खड़ी करने और युवाओं को सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना बनाई गई है। यह केवल उत्सव का वर्ष नहीं, बल्कि राष्ट्र जीवन के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का वर्ष है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष समाज की 'सुप्त शक्ति' को जगाने का अभियान है। अवध प्रांत के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संघ का कार्य निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। आगामी विजयादशमी तक चलने वाले इन कार्यक्रमों के माध्यम से 'राष्ट्र प्रथम' का भाव हर नागरिक के स्वभाव में लाना ही मुख्य लक्ष्य है। अंत में, प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. अशोक दुबे ने सभी पत्रकार बंधुओं का आभार व्यक्त किया और होली के पावन पर्व की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर क्षेत्र के प्रचार प्रमुख सुभाष जी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने समाज की सज्जन शक्ति से राष्ट्र निर्माण में सहयोग की अपील की।
शताब्दी वर्ष और संगठन का विस्तार
सह प्रांत कार्यवाह संजय सिंह ने संगठन की प्रगति रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि विजयादशमी से संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम विधिवत प्रारंभ हो चुके हैं। अवध प्रांत में संघ का कार्य तीव्र गति से बढ़ रहा है। प्रेस वार्ता के दौरान अवध प्रांत में संघ की पैठ और उसकी सांगठनिक शक्ति का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया गया। सह प्रांत कार्यवाह संजय सिंह ने बताया कि प्रांत के कुल 2888 मंडल एवं बस्तियों में से 2860 स्थानों पर संघ की सक्रिय शाखाएं न केवल संचालित हो रही हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के विचार को पुष्ट भी कर रही हैं। संघ की पहुंच केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचलों में भी स्वयंसेवकों ने अभूतपूर्व कार्य किया है। प्रांत के कुल 18,993 गांवों में से 15,864 गांवों में स्वयंसेवकों द्वारा घर-घर जाकर सीधा संपर्क स्थापित किया गया है, जिससे संघ की विचारधारा जन-जन तक पहुंची है।
वैचारिक संवाद के तैयार किए गए विभिन्न मंच
संजय सिंह ने बताया कि अवध प्रान्त में 2728 स्थानों पर हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सामाजिक सद्भाव की 294 बैठकें एवं 124 केन्द्रों पर प्रमुख जन गोष्ठियों का आयोजन किया गया। अवध प्रान्त के प्रांत संघचालक सरदार स्वर्ण सिंह ने बताया कि शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम आगामी विजयदशमी तक सम्पन्न होंगे, आगे युवा पीढ़ी में राष्ट्रबोध, संगठन स्वभाव एवं समाज परिवर्तन के प्रयत्न की वृद्धि को ध्यान में रखकर युवकों में कार्य बढ़ाने की योजना है, कार्य विस्तार की दृष्टि से अधिकतम स्थानों पर अधिकतम कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाते हुए अधिकतम शाखाएं खड़ी करने की योजना है। संघ का काम निरंतर चलने वाला काम है, शताब्दी वर्ष वास्तव में संघ की 100 वर्ष की यात्रा का अनुवर्तन ही है। शताब्दी वर्ष में समाज की बहुत बड़ी सज्जन शक्ति, सुप्त शक्ति एवं उत्सुक शक्ति का अनुवर्तन करते हुए 'राष्ट्र प्रथम का भाव' एवं 'पंच परिवर्तन का स्वभाव' उत्तरोत्तर बढ़ता रहे इस हेतु आवाहन किया गया। इस बात पर विशेष जोर दिया कि संघ का अंतिम लक्ष्य समाज की सबसे छोटी इकाई तक पहुंचना और उसे सक्रिय करना है। 'कुटुंब प्रबोधन' जैसे कार्यक्रमों और सद्भाव बैठकों के माध्यम से संघ प्रत्येक परिवार और समाज के हर वर्ग में नैतिक मूल्यों का बीजारोपण कर रहा है, ताकि एक सुदृढ़ और संस्कारित राष्ट्र का पुनर्निर्माण सुनिश्चित हो सके।
सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने की अपील
सह प्रांत कार्यवाह संजय सिंह ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में संघ ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। लोगों से सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने की अपील की गई है। पर्यावरण को प्रदूषण से कैसे बचाया जाए, इस दिशा में भी काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि देश के सामने लव जेहाद बड़ी समस्या बन गया है। हिंदू समाज की बेटियां इससे कैसे बचें, इस दिशा में भी संघ काम कर रहा है। हिंदू समाज को जागृत किया जा रहा है।
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