राजकोट में डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया की रोकथाम की कोशिश, ड्रोन से मच्छरों के पनपने की 4,731 जगहें चिन्हित
खबर सार :-
राजकोट म्युनिसिपल काॅर्पोरेशन मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए ड्रोन और AI का इस्तेमाल कर रहा है। 4,731 संभावित जगहों की पहचान की गई है और 1,340 जगहों पर कीटनाशक का छिड़काव किया है।
खबर विस्तार : -
राजकोट: राजकोट म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (RMC) ने शहर में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया को कंट्रोल करने की कोशिशों में एक बेहतरीन मिसाल कायम की है। ड्रोन-बेस्ड सर्वे और AI-असिस्टेड मॉनिटरिंग का इस्तेमाल करके, नगर निकाय ने 59.39 वर्ग किलोमीटर के इलाके में मच्छरों के पनपने की 4,731 संभावित जगहों की पहचान की है।
शुक्रवार को RMC द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, फील्ड स्टाफ ने पहचानी गई जगहों में से 1,340 जगहों पर कीटनाशक का छिड़काव किया है और मच्छरों के पनपने के स्रोतों को खत्म करने के उपाय किए हैं, जबकि ड्रोन ने कुल 40 घंटे और नौ मिनट तक कीटनाशक का छिड़काव किया है। यह सर्वे ज्यादा जोखिम वाले वार्डों में किया जा रहा है, जिनमें वार्ड 11, 18, 3, 4 और 13 शामिल हैं। अब तक सर्वे किए गए इलाके RMC के कुल 161.85 वर्ग किलोमीटर के अधिकार क्षेत्र में से 59.39 वर्ग किलोमीटर को कवर करते हैं।
स्वास्थ्य कर्मियों के साथ शेयर किया जा रहा डेटा
ड्रोन ऑपरेशन में नालियां, पानी जमा होने वाली जगहें, अलग-अलग आकार के गड्ढे, नदी के तल में बने गड्ढे और ऐसी दूसरी जगहें शामिल हैं, जहां मच्छर पनप सकते हैं। RMC ने कहा कि इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल खास तौर पर उन इलाकों में किया जा रहा है, जहां पारंपरिक कीटनाशक छिड़काव के तरीकों को अपनाना मुश्किल या खतरनाक है। ड्रोन सर्वे से मिले डेटा को संबंधित वार्डों और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य कर्मियों के साथ शेयर किया जा रहा है। स्वास्थ्य कर्मी इन जगहों का निरीक्षण करते हैं और जरूरत पड़ने पर कीटनाशक का छिड़काव करते हैं और मच्छरों के पनपने के स्रोतों को खत्म करते हैं। ड्रोन-बेस्ड ऑपरेशन के साथ-साथ, 17 से 23 सितंबर के बीच RMC के पारंपरिक कीट नियंत्रण उपाय भी जारी रहे। फील्ड वर्करों, शहरी आशा वर्करों और MPHW ने 150,172 घरों में लार्विसाइड डालने का काम किया, जबकि 933 घरों में फॉगिंग की गई।
ये भी पढ़ें:- चेन्नई में तेजी से बढ़ रही फ्लू, डेंगू और सांस के मरीजों की संख्या
कई जगहों पर फॉगिंग मशीनों का इस्तेमाल
जिन इलाकों में मच्छरों की संख्या ज्यादा थी, वहां गाड़ियों पर लगी फॉगिंग मशीनों का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, संवेदनशील हाउसिंग सोसायटियों, सार्वजनिक सड़कों और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर भी फॉगिंग की गई। स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरों के पनपने की जगहों की पहचान करने के लिए 409 गैर-आवासीय जगहों का भी निरीक्षण किया; इनमें कंस्ट्रक्शन साइट्स, स्कूल, अस्पताल, होटल, इंडस्ट्रियल यूनिट्स, हॉस्टल, कॉम्प्लेक्स, स्क्रैप यार्ड, बेसमेंट, हॉल, कम्युनिटी वेन्यू, पार्टी प्लॉट, धार्मिक स्थल, पेट्रोल पंप और सरकारी दफ्तर शामिल थे।
404 लोगों को नाटिस जारी, वसूला शुल्क
मच्छरों के पनपने की जगहों के बारे में रिहायशी इलाकों में 312 लोगों और कमर्शियल इलाकों में 92 लोगों को नोटिस जारी किए गए। इसके अलावा, लागू नियमों के तहत प्रशासनिक शुल्क वसूलने जैसी कार्रवाई भी की गई। नगर निगम ने बताया कि डेंगू से बचाव के उपायों में घरों, दुकानों, अपार्टमेंट, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, इंडस्ट्रियल यूनिट्स और अन्य जगहों की जांच शामिल है। पानी जमा करने वाले कंटेनरों की जांच पर खास ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि ये एडीज मच्छरों के पनपने की जगह बन सकते हैं। साथ ही, नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े फील्ड स्टाफ के जरिए पानी से होने वाली बीमारियों पर नजर रखी।
सर्वे में लगभग 3,04,556 लोग शामिल
17 से 23 सितंबर के बीच किए गए सर्वे में लगभग 3,04,556 लोगों को शामिल किया गया। इस दौरान 6,559 क्लोरीन टैबलेट और 743 ORS पैकेट बांटे गए, और 3,484 RC टेस्ट किए गए। नगर निगम ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों के अंदर या आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरों के पनपने की जगहों को खत्म करने में स्वास्थ्य टीमों का सहयोग करें और पीने के पानी की सफाई का ध्यान रखें, यानी पानी को उबालकर या ठीक से साफ करके ही पिएं। इसके अलावा, निवासियों से यह भी कहा गया है कि वे मच्छरों के पनपने की जगहों का पता लगाने के लिए किए जाने वाले ड्रोन-आधारित सर्वे के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमों का सहयोग करें।
FAQ
1- डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया कैसे फैलते हैं?
डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलते हैं।
2- मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए क्या करना चाहिए?
मच्छरों के लार्वा पानी में पनपते हैं, इसलिए अपने घर के आसपास पानी न जमा होने दें।
3- आरएमसी मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए तकनीक का इस्तेमाल किस तरह कर रहा है?
राजकोट म्युनिसिपल काॅर्पोरेशन (आरएमसी) मच्छरों के पनपने के जगहों की तलाश के लिए ड्रोन से सर्वे कर रहा है। इससे प्राप्त डेटा को स्वास्थ्य कर्मियों के साथ शेयर किया जा रहा है। वे इन जगहों का निरीक्षण कर जरूरत पड़ने पर कीटनाशक का छिड़काव करते हैं।
ये भी पढ़ें:- असम के गोलपाड़ा में डेंगू का कहर! रबर के कपों में पनप रहे मच्छर, 19 नए मामले दर्ज
अन्य प्रमुख खबरें
-
मध्य प्रदेश में 10-11 अक्टूबर को बारिश के आसार, IMD ने जताई संभावना
2026-10-09
-
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, सपा का प्रदर्शन
2026-10-08
-
भोपाल के न्यू मार्केट में सिलेंडर ब्लास्ट, धू-धू कर जलीं दुकानें
2026-10-08
-
MP में आयुष्मान योजना का विरोध, संगठनों ने किया बहिष्कार का ऐलान
2026-10-08
-
बारिश और हवा के कारण तापमान में गिरावट, कल तक गोमती का जलस्तर घटने की उम्मीद
2026-10-08
-
UP: दुकान में आग लगने से मां-बेटी की जलकर मौत
2026-10-08
-
MP में चीतों की संख्या 60 पहुंची, CM बोले- वन्यजीव हमारे वनों के आभूषण
2026-10-08
-
हिमाचल में ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान, 9 अक्टूबर तक बारिश का अलर्ट
2026-10-07
-
कुमाऊं में महिलाएं बना रहीं रेशम का धागा, स्वरोजगार के खुले नए रास्ते
2026-10-07
-
यूपी में 20 IPS अफसरों का तबादला, रवीना त्यागी बनी बाराबंकी की नई एसपी
2026-10-07
-
वृंदावन के गुरुकुल में सेप्टिक टैंक साफ कर रहे 4 छात्रों की मौत
2026-10-07
-
इलाइट-शिवपुरी मार्ग बनेगा मॉडल रोड, सौंदर्यीकरण को मिली मंजूरी
2026-10-07
-
मध्य प्रदेश में मौसम सिस्टम सक्रिय, आज 16 जिलों में बारिश की संभावना
2026-10-07
-
MP के दुर्गावती टाइगर रिजर्व में आज दो चीते छोड़ेंगे सीएम मोहन यादव
2026-10-07
-
LUCKNOW नगर निगम देर से जागा, घर हो रहे अब तक खाली, kitchens तक पहुंचा पानी
2026-10-06