चेन्नई में बढ़े फ्लू, डेंगू, सांस की बीमारियों के मरीज, ओपीडी में लग रही मरीजों की लंबी कतारें
खबर सार :-
चेन्नई में फ्लू, डेंगू और सांस से जुड़े संक्रमण के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अस्पतालों की ओपीडी में लंबी कतारें लग रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर संक्रमण हल्के हैं।
खबर विस्तार : -
चेन्नई: चेन्नई में फ्लू, डेंगू और सांस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। चेन्नई के निजी अस्पतालों में फ्लू, सांस से जुड़े संक्रमण और डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके चलते ओपीडी में लंबी कतारें लग रही हैं। मरीजों से वार्ड भरे हुए हैं और मरीजों को भर्ती करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ अस्पतालों में तो इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को बेड के लिए 12 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, आईसीयू से जनरल वार्ड में शिफ्ट होने वाले मरीजों को भी कमरों की कमी के कारण देरी हो रही है।
हल्के हैं ज्यादातर संक्रमण
डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर संक्रमण हल्के हैं और मरीज दवा, आराम तथा पानी पीने से ठीक हो रहे हैं। हालांकि, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से ग्रस्त लोगों के लिए ये बीमारियां गंभीर हो सकती हैं। कमजोर मरीजों में मौत के मामले कम हैं लेकिन खतरा बना हुआ है।
बच्चों-किशोरों में लंबे समय तक बुखार और बहुत ज्यादा थकान
मरीजों में तेज बुखार, गले में खराश, जुकाम, लगातार खांसी, बदन और पैरों में तेज दर्द, सीने में तकलीफ, थकान और भूख न लगने जैसे लक्षण दिख रहे हैं। बच्चों और किशोरों में लंबे समय तक बुखार और बहुत ज्यादा थकान देखी जा रही है। कुछ बच्चों में बुखार के कारण घबराहट या भ्रम की स्थिति भी बन रही है। कुछ मरीजों को नेबुलाइजेशन या फ्लूइड की जरूरत पड़ रही है, जिससे अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या बढ़ रही है।
वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी
चेन्नई के एक प्राइवेट अस्पताल की संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. आर. राजम्मल ने बताया कि वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। उन्होंने कहा, "जब मरीज इमरजेंसी में आते हैं तो कमरे या बेड के लिए 12 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसी तरह आईसीयू से बाहर शिफ्ट होने वाले मरीजों को भी जनरल वार्ड में बेड के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ओपीडी में भी इंतजार का समय काफी बढ़ गया है।
डॉक्टरों की सलाह बुखार को न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों के अनुसार, मौजूदा मामलों में बड़ा हिस्सा रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी), एडेनोवायरस, राइनोवायरस और पैराइन्फ्लुएंजा जैसे वायरस के कारण हो रहा है। इसके अलावा इन्फ्लुएंजा, जिसमें एच1एन1 भी शामिल है, और डेंगू के मामले भी काफी आ रहे हैं। डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि बुखार को नजरअंदाज न करें और खुद से दवा न लें, खासकर जब लक्षण बने रहें। लोगों से हाथों की सफाई रखने, संक्रमित लोगों से दूरी बनाए रखने और भीड़ वाली जगहों पर मास्क पहनने की अपील की गई है।
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