रेलवे सुरक्षा में बड़ा बदलाव: अब सिविल पुलिस संभालेगी ट्रेनों का मोर्चा, यात्रियों को मिलेगा अभेद्य सुरक्षा कवच
खबर सार :-
भारतीय रेलवे में यात्रियों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए अब सिविल पुलिस के जवानों को जीआरपी में तैनात किया जाएगा। जानें कैसे झांसी समेत अन्य जिलों से मिलने वाला यह अतिरिक्त बल ट्रेनों को सुरक्षित बनाएगा।
खबर विस्तार : -
झांसी : भारतीय रेलवे में सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। पिछले कई दशकों से मैनपावर की कमी से जूझ रही राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) को अब नागरिक पुलिस (Civil Police) का साथ मिलने जा रहा है। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) के नए निर्देशों के बाद, जिलों से पुलिसकर्मियों को विशेष ड्यूटी के तहत रेलवे में तैनात करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
28 साल का सूखा खत्म: जीआरपी को मिलेगी नई ताकत
रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी लंबे समय से कर्मचारियों की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो जीआरपी में पिछले लगभग 28 वर्षों से बल की संख्या में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है। वर्तमान में स्थिति यह है कि जीआरपी की हर शाखा सीमित संसाधनों और कम कर्मियों के साथ काम कर रही है। त्योहारों और बड़े आयोजनों के दौरान जब यात्रियों की भीड़ बढ़ती है, तो सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी कमी को दूर करने के लिए अब जिलों से सिविल पुलिस के जवानों को एक वर्ष की विशेष प्रतिनियुक्ति पर जीआरपी भेजा जा रहा है।
झांसी मॉडल: 468 पुलिसकर्मियों की तैनाती से रेल सुरक्षा को मिलेगा नया आधार
इस अभिनव योजना के क्रियान्वयन में झांसी जिले ने एक महत्वपूर्ण और बड़ी पहल की है। रेलवे सुरक्षा के इस नए ढांचे के तहत अकेले झांसी से कुल 468 पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम का चयन किया गया है। सुरक्षा के इस बेड़े में केवल पुरुष बल ही नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए महिला सिपाहियों को भी शामिल किया गया है। इस फोर्स की संरचना काफी व्यापक है, जिसमें 451 उप-निरीक्षक (SI) के साथ-साथ अनुभवी इंस्पेक्टर और मुस्तैद कांस्टेबल कंधे से कंधा मिलाकर रेल सुरक्षा की कमान संभालेंगे।
इस विशेष तैनाती की कार्यप्रणाली भी काफी अनूठी रखी गई है। इन जवानों का कार्यकाल प्रारंभिक तौर पर एक वर्ष के लिए निर्धारित किया गया है, जिसे परिस्थितियों और आवश्यकता को देखते हुए भविष्य में बढ़ाया भी जा सकेगा। प्रशासनिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये जवान भले ही जीआरपी के साथ मिलकर काम करेंगे, लेकिन इनकी वेतन व्यवस्था इनके मूल जिलों से ही संचालित होती रहेगी, जिससे बजट संबंधी कोई बाधा उत्पन्न नहीं होगी। इन पुलिसकर्मियों का कार्यक्षेत्र केवल ट्रेनों के भीतर 'स्क्वाड' ड्यूटी तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ये प्लेटफॉर्मों पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और वहां की समग्र सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
बिना गार्ड के चलने वाली ट्रेनों को मिलेगा 'स्क्वाड'
वर्तमान में झांसी स्टेशन से रोजाना 150 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण केवल 100 ट्रेनों में ही जीआरपी का सुरक्षा दस्ता (स्क्वाड) चल पाता है। कई साप्ताहिक और विशेष ट्रेनें बिना किसी सुरक्षा घेरे के गंतव्य तक पहुँचती हैं। जीआरपी पुलिस अधीक्षक विपुल कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, "सिविल पुलिस से अतिरिक्त बल मिलने के बाद हमारा प्राथमिक लक्ष्य उन ट्रेनों को कवर करना है जो अभी तक बिना स्क्वाड के चल रही हैं। इसके लिए अलग से ड्यूटी रोस्टर तैयार किया जा रहा है ताकि मेला स्पेशल और अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनों में सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।"
यात्रियों के लिए सुरक्षा का नया सवेरा: क्या बदलेगा जमीनी स्तर पर?
रेलवे के इस बड़े फैसले का सीधा और सकारात्मक असर ट्रेनों में सफर करने वाले आम यात्रियों के अनुभव पर पड़ेगा। अक्सर यात्रा के दौरान मोबाइल चोरी, बैग की झपट्टामारी और विशेषकर महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी रहती थीं, लेकिन अब अतिरिक्त फोर्स की तैनाती से सुरक्षा का यह ढांचा पूरी तरह बदलने वाला है। सबसे बड़ा बदलाव ट्रेनों में पुलिस की विजिबिलिटी यानी मौजूदगी के रूप में दिखेगा। जब खाकी वर्दी का पहरा कोच के भीतर लगातार बना रहेगा, तो इससे न केवल अपराधियों में डर पैदा होगा, बल्कि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में पुलिस की त्वरित कार्रवाई भी सुनिश्चित हो सकेगी।
इतना ही नहीं, यह कदम प्लेटफार्मों पर उमड़ने वाली बेकाबू भीड़ के बेहतर प्रबंधन में भी मील का पत्थर साबित होगा। अक्सर बड़े स्टेशनों पर भीड़ की वजह से होने वाली अव्यवस्था और हादसों का डर बना रहता है, जिसे अब सिविल पुलिस के अनुभवी जवान कुशलता से संभाल सकेंगे। रेलवे सुरक्षा में सिविल पुलिस का यह समावेश वाकई एक स्वागत योग्य कदम है, जो जीआरपी के कंधों से काम का बोझ कम करने के साथ-साथ भारतीय रेल के सफर को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुखद बनाने की दिशा में एक नई इबारत लिखेगा। डीजीपी के इस दूरदर्शी फैसले से आने वाले दिनों में रेल अपराधों पर पूरी तरह नकेल कसे जाने की प्रबल उम्मीद है।
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