रुके हुए विकास कार्यों पर पार्षदों का हल्लाबोल, 31 मार्च तक काम पूरे करने के निर्देश
खबर सार :-
नगर निगम की बैठक में यात्रा भत्ते में वृद्धि का प्रस्ताव भी सामने आया, लेकिन महापौर ने इसे फिलहाल टालते हुए पुनरीक्षित बजट में इस पर विचार करने का आश्वासन दिया। बैठक में नगर निगम के कई वरिष्ठ अधिकारी और पार्षद मौजूद रहे।
खबर विस्तार : -
झांसीः नगर निगम की हालिया बैठक मूल बजट पर चर्चा के उद्देश्य से बुलाई गई थी, लेकिन यह बैठक पिछले सत्र की अनुपालन आख्या से जुड़े मुद्दों में ही उलझकर समाप्त हो गई। करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक में बजट जैसे महत्वपूर्ण विषय पर मात्र 12 मिनट ही चर्चा हो सकी, जबकि शेष समय पार्षदों द्वारा उठाए गए सवालों और आरोप-प्रत्यारोप में बीत गया। बैठक के दौरान पार्षदों ने कई गंभीर मुद्दों पर तीखे सवाल उठाए, जिससे माहौल काफी गर्म हो गया।
फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की चर्चा
बैठक का मुख्य आकर्षण महापौर और नगर आयुक्त के बीच हुई तीखी नोकझोंक रही। पार्षदों के सवालों को आधार बनाते हुए महापौर ने नगर आयुक्त आकांक्षा राणा से सीधे सवाल किए, जिस पर दोनों के बीच बहस छिड़ गई। महापौर ने विकास कार्यों की क्रॉस जांच की प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे अनावश्यक बताया। उनका कहना था कि इससे जरूरी कार्यों में देरी हो रही है और जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
इसके जवाब में नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि क्रॉस जांच का उद्देश्य फिजूलखर्ची पर रोक लगाना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि इसी प्रक्रिया के चलते पेंटिंग के बिल में लगभग 95 लाख रुपये की कटौती की गई। इसके अलावा कई सड़कों पर दोबारा होने वाले कार्यों को भी रोका गया, जिससे नगर निगम को बड़ी आर्थिक बचत हुई है। उन्होंने दावा किया कि इस व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और इसे जारी रखना जरूरी है।
विकास कार्य रुकने से नाराजगी
हालांकि पार्षदों ने विकास कार्यों के ठप होने पर तीखी नाराजगी जताई। उनका आरोप था कि पिछले पांच महीनों से अधिकांश विकास कार्य रुके हुए हैं और टेंडर जारी होने के बावजूद काम शुरू नहीं हो पा रहा है। निजी कॉलोनियों के हैंडओवर और वहां विकास कार्यों को लेकर भी अधिकारियों को घेरा गया। महापौर ने इस पर निर्देश देते हुए कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा किया जाए और उन्हें अनावश्यक जांच प्रक्रियाओं में न फंसाया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्षद निधि से स्वीकृत कार्य 31 मार्च से पहले हर हाल में पूरे किए जाएं।
बैठक में उपसभापति आशीष तिवारी ने भी अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक हैं और यदि इसी तरह काम चलता रहा तो इसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है। उन्होंने अधिकारियों से जवाबदेही और तत्परता के साथ काम करने की अपेक्षा जताई।
वहीं पार्षद मुकेश सोनी ने नगर निगम की गौशाला में पल रहे गोवंश और वहां से होने वाले दूध उत्पादन का हिसाब मांगा। इस पर पशु कल्याण अधिकारी डॉक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि हर महीने 10 से 12 हजार रुपये की आय दूध से हो रही है, जिसे निगम के खाते में जमा किया जा रहा है। इस पर उपसभापति ने तंज कसते हुए कहा कि इतनी आय तो एक सामान्य घर में भी हो जाती है और मात्र 4 से 5 लीटर दूध उत्पादन पर आश्चर्य जताया।
कई अहम मुद्दों पर बनी सहमति
पार्षद भरत सेन ने निजी कॉलोनियों के हैंडओवर और वहां हो रहे कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। लगभग ढाई घंटे तक चले आरोप-प्रत्यारोप के बाद अंततः लेखा अधिकारी ने मूल बजट पेश किया। इस दौरान पार्षद विकास खत्री और महेश गौतम ने बजट के कुछ बिंदुओं पर सवाल उठाए और स्पष्टीकरण मांगा। चर्चा के बाद करीब 490 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी गई।
इसके अलावा कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी। इनमें नगर निगम में सफाई कर्मियों, गार्ड और माली की नियुक्ति, पार्षद निधि से 10 लाख रुपये तक के कार्य, नई बस्ती में पांच महीने से लंबित कार्यों को पांच दिनों में पूरा करना, सीपरी बाजार के तांगा स्टैंड से सब्जी विक्रेताओं को हटाना और शहर की सड़कों से पोटा केबिन हटाना शामिल है।
सदन प्रभारी एवं पशु कल्याण अधिकारी डॉक्टर राघवेंद्र सिंह ने बैठक का संचालन किया। कुल मिलाकर यह बैठक विवादों और बहस के बीच संपन्न हुई, जिसमें विकास कार्यों की गति और पारदर्शिता को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठे, लेकिन मूल बजट पर अपेक्षित गंभीर चर्चा नहीं हो सकी।
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