मध्य प्रदेश में आयुष्मान योजना का बहिष्कार करेंगे निजी अस्पताल, 1000 एम्बुलेंस के साथ दिल्ली मार्च की तैयारी

खबर सार :-

मध्य प्रदेश के तीन बड़े मेडिकल संगठनों ने आयुष्मान योजना का अनिश्तिकालीन बहिष्कार का ऐलान किया है। इसके साथ ही दिल्ली तक मार्च करने का भी फैसला लिया गया है।
MP में आयुष्मान योजना का विरोध, संगठनों ने किया बहिष्कार का ऐलान

खबर विस्तार : -

भोपाल: मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों को परेशानी हो सकती है। राज्य के तीन बड़े मेडिकल संगठनों IMA मध्य प्रदेश, MP नर्सिंग होम एसोसिएशन और यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल डायरेक्टर्स एसोसिएशन ने आज (गुरुवार) से इस योजना का राज्य-व्यापी और अनिश्चितकालीन बहिष्कार करने का ऐलान किया है।

आज राज्य के प्राइवेट अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज नहीं होगा। मेडिकल संगठनों ने अनिवार्य NABH एक्रेडिटेशन (मान्यता) की शर्त को तुरंत हटाने की भी मांग की है। सरकार ने तय किया था कि योजना के तहत इलाज के लिए अस्पताल की पात्रता NABH सर्टिफिकेशन मिलने पर ही तय होगी; इसके जवाब में मेडिकल और हॉस्पिटल एसोसिएशन ने कड़ा विरोध करने का फैसला किया है। योजना के बहिष्कार के साथ-साथ, वे आज एम्बुलेंस के साथ नई दिल्ली तक मार्च भी करेंगे। हॉस्पिटल एसोसिएशन के मुताबिक, दिल्ली के लिए प्रस्तावित मार्च में लगभग 1,000 एम्बुलेंस शामिल करने की तैयारी चल रही है। एम्बुलेंस एक साथ नहीं निकलेंगी; बल्कि वे अलग-अलग चरणों में दिल्ली के लिए रवाना होंगी और राज्य के अलग-अलग जिलों से अलग-अलग समय पर अलग-अलग बैच में निकलेंगी।

नए नियम से अस्पतालों पर आर्थिक बोझ

हॉस्पिटल डायरेक्टर्स यूनियन (UPHDA) के उपाध्यक्ष डॉ. धनंजय मिश्रा ने कहा कि हालांकि अस्पताल क्वालिटी और मरीजों की सुरक्षा के मानकों का पूरा समर्थन करते हैं, लेकिन अनिवार्य NABH एक्रेडिटेशन को ज़बरदस्ती लागू करने से छोटे और मध्यम आकार के अस्पतालों पर भारी आर्थिक और प्रशासनिक बोझ पड़ता है। NABH एक्रेडिटेशन अनिवार्य होने के बजाय स्वैच्छिक और प्रोत्साहन-आधारित होना चाहिए। क्वालिटी मानक व्यावहारिक होने चाहिए और अस्पतालों के आकार, क्षमता और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप होने चाहिए। ऐसी नीतियां नहीं बनाई जानी चाहिए जिनसे छोटे और मध्यम आकार के अस्पतालों के लिए आयुष्मान योजना में भाग लेना मुश्किल हो जाए।

आयुष्मान के तहत भुगतान लंबे समय से लंबित

सलाहकार चेयरमैन डॉ. जीशान अहमद ने कहा कि आयुष्मान योजना के तहत लंबे समय से लंबित भुगतान के कारण छोटे और मध्यम आकार के प्राइवेट अस्पताल गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पोर्टल-1, पोर्टल-2, CPD क्लेम रिजेक्शन, ट्रिगर मैकेनिज्म, ऑथेंटिकेशन प्रोसेस और अन्य प्रक्रियात्मक कारणों से अटके हुए वैध क्लेम का भुगतान तुरंत किया जाना चाहिए। मरीजों के इलाज के दौरान अस्पताल पहले ही खर्च कर चुके हैं। यह उम्मीद करना अवास्तविक है कि अस्पताल बिना किसी रुकावट के सेवाएं देते रहें, जबकि उनका पैसा महीनों तक अटका रहे। सभी बकाया और सही भुगतान तुरंत किए जाने चाहिए, और भविष्य के सभी भुगतानों के लिए एक निश्चित समय-सीमा और जवाबदेही का सिस्टम बनाया जाना चाहिए।

अस्पताल संघों का कहना है कि मरीज का इलाज शुरू होने से पहले बीमारी, प्रस्तावित इलाज और लागू पैकेज के आधार पर प्री-ऑथराइजेशन (पहले से मंजूरी) लिया जाता है। इसके बाद, अस्पताल अपने संसाधनों और फंड का इस्तेमाल करके मरीज का इलाज करता है। ऐसे में, इलाज पूरा होने के बाद बिना किसी ठोस कारण के सही दावों को खारिज करना या बड़ी कटौती करना अस्पतालों के लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा करता है।

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भुगतान की समय-सीमा और जवाबदेही तय करना

UPHDA मध्य प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. विशाल सिंह बघेल ने कहा कि अस्पताल लंबे समय से बकाया भुगतान के निपटारे और पॉलिसी व प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं के व्यावहारिक समाधान की मांग कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक इन मुद्दों का संतोषजनक समाधान नहीं हो जाता, तब तक अस्पताल संघ संयुक्त आंदोलन में एकजुट रहेंगे। उन्होंने कहा कि अस्पतालों के बकाया भुगतान और दावों से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध समाधान जरूरी है। जिस तरह इलाज के लिए प्रोटोकॉल होते हैं, उसी तरह भुगतान के लिए भी निश्चित समय-सीमा और जवाबदेही होनी चाहिए ताकि अस्पतालों को आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।

राज्य में 739 अस्पताल इस योजना के तहत सूचीबद्ध

गौरतलब है कि आयुष्मान भारत 'निरामयम' योजना के तहत राज्य में सूचीबद्ध अस्पतालों के लिए 1 अक्टूबर, 2026 से एक नई शर्त लागू हुई है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों के लिए NABH (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स) सर्टिफिकेशन अनिवार्य है। यह नियम मूल रूप से 1 अप्रैल से लागू होना था, लेकिन अस्पतालों को तैयारी का समय देने के लिए समय-सीमा छह महीने बढ़ाकर 1 अक्टूबर कर दी गई थी। नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन चार शहरों में 739 अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध हैं। इनमें से 310 के पास NABH सर्टिफिकेशन है। सरकारी अस्पतालों को छोड़कर, लगभग 300 निजी अस्पताल ऐसे हैं जिनका आयुष्मान एम्पैनलमेंट (सूचीबद्धता) इस नए नियम से प्रभावित हो सकता है।

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