वाराणसी में दिखेगी दक्षिण भारत की संस्कृति, 28 नवंबर से शुरू होगा काशी-तमिल संगमम

खबर सार :-

काशी-तमिल संगमम का पांचवा संस्करण वाराणसी में 28 नवंबर से शुरू होने जा रहा है, जो 12 दिसंबर तक चलेगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश की विविध संस्कृतियों को आपस में बढ़ावा देना है।
उत्तर व दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक काशी-तमिल संगमम 28 से

खबर विस्तार : -

चेन्नई: 'काशी तमिल संगमम' एक महत्वपूर्ण आयोजन है, जिसे केंद्र सरकार की 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' पहल के तहत आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है। इसका लक्ष्य तमिलनाडु और काशी के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को पुनर्जीवित करना है, साथ ही दोनों क्षेत्रों के लोगों के बीच संवाद और आपसी समझ को बढ़ावा देना है। इस आयोजन का पांचवां संस्करण 28 नवंबर से 12 दिसंबर, 2026 तक वाराणसी में आयोजित किया जाएगा।

इस संस्करण की मुख्य थीम 'तिरुक्कुरल पयिलवोम' (Tirukkural Payilvom) है, जिसका अर्थ है—'आइए, तिरुक्कुरल सीखें।' यह थीम तमिल साहित्य की समृद्ध परंपरा और उसकी नैतिक शिक्षाओं को आम जनता तक पहुंचाने पर केंद्रित है। भाषा और साहित्य के प्रति रुचि जगाने के पिछले संस्करणों के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष का आयोजन 'तिरुक्कुरल' की शिक्षाओं के माध्यम से भारतीय जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को समझने पर विशेष जोर देगा।

काशी और तमिलनाडु के बीच ऐतिहासिक संबंध

'काशी तमिल संगमम' उन आयोजनों में एक विशिष्ट स्थान रखता है जो भारत की प्राचीन सभ्यता, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता का प्रतिनिधित्व करते हैं। गंगा नदी के तट पर स्थित वाराणसी भारत के सबसे पुराने शहरों में से एक है और हिंदू धर्म का एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है। वहीं, तमिलनाडु अपनी प्राचीन भाषा, मंदिरों, साहित्य, संगीत, कला और विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। तमिलनाडु और काशी के बीच का संबंध केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है; बल्कि यह महत्वपूर्ण साहित्यिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से भी आकार लेता रहा है। सदियों से, तमिलनाडु के श्रद्धालु काशी की तीर्थयात्रा करते आ रहे हैं। तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित 'तेनकाशी' (Tenkasi) नामक शहर का नाम भी इन गहरे सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों की याद दिलाता है। तमिल विद्वानों, संतों, आध्यात्मिक गुरुओं और श्रद्धालुओं ने पीढ़ियों से इन संबंधों को संजोया और मजबूत किया है।

काशी-तमिल संगमम की शुरुआत और उद्देश्य

पहला 'काशी-तमिल संगमम' नवंबर 2022 में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक पहल के तहत आयोजित किया गया था। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य काशी और तमिलनाडु के बीच प्राचीन संबंधों को उजागर करना, और लोगों को दोनों क्षेत्रों की सांस्कृतिक, साहित्यिक तथा आध्यात्मिक विरासत से परिचित कराना है। इस आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि एक साथ आते हैं, जिनमें छात्र, शिक्षक, लेखक, कलाकार, उद्यमी और आध्यात्मिक कार्यों से जुड़े लोग शामिल हैं। तमिलनाडु से आए प्रतिभागियों को काशी और उसके आसपास के ऐतिहासिक तथा धार्मिक स्थलों को देखने और वहां की स्थानीय परंपराओं को समझने का अवसर मिलता है। इसी तरह, उत्तर भारत के लोगों को तमिलनाडु की भाषा, साहित्य, कला और सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानने का मौका मिलता है।

साहित्य, भाषा और संस्कृति का आदान-प्रदान

'काशी तमिल संगमम' केवल पर्यटन या धार्मिक यात्रा तक सीमित कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, भाषा और संस्कृति के आदान-प्रदान का एक सशक्त मंच है। इसके माध्यम से तमिल साहित्य की प्राचीनता, संगम साहित्य की विशेषताएं और 'तिरुक्कुरल' में निहित नैतिक मूल्यों को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया जाता है। तिरुवल्लुवर द्वारा रचित 'तिरुक्कुरल' तमिल साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति है, जिसमें सदाचार, सामाजिक जीवन, मानवीय संबंधों, शासन-व्यवस्था और नैतिक आचरण से जुड़े विचार शामिल हैं। इसके संदेश भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से परे मानवता, कर्तव्य और सद्भाव जैसे सार्वभौमिक मूल्यों को सामने लाते हैं। इसलिए, इस वर्ष का साहित्य-केंद्रित विषय दोनों क्षेत्रों के लोगों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। संगोष्ठियों, चर्चाओं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को एक-दूसरे की परंपराओं, कलाओं और विचारों को समझने का मौका मिलता है। इस प्रकार, यह आयोजन भाषाई विविधता को आपसी सहयोग और सांस्कृतिक समृद्धि का माध्यम बनाता है।

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युवाओं और शिक्षा के लिए महत्व

'काशी तमिल संगमम' छात्रों और युवाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। इसके जरिए उन्हें भारत के विभिन्न क्षेत्रों की भाषाओं, खान-पान, पहनावे, पूजा-पद्धतियों और जीवनशैली को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलता है। ऐसे अनुभव उनकी सांस्कृतिक समझ का दायरा बढ़ाते हैं और अन्य क्षेत्रों की परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करते हैं। इसके अलावा, यह आयोजन शिक्षा, अनुसंधान, भाषा-विज्ञान और साहित्य के क्षेत्रों में नए संपर्क स्थापित करने की संभावनाएं भी बढ़ाता है। विभिन्न संस्थानों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और छात्रों के बीच संवाद से ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है। इससे भारतीय भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के अध्ययन को एक नई दिशा भी मिल सकती है।

'विविधता में एकता' का सशक्त संदेश

भारत कई भाषाओं, धर्मों, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक परंपराओं वाला देश है। राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए इस विविधता को समझना और उसका सम्मान करना आवश्यक है। यह आयोजन तमिलनाडु और उत्तर भारत के लोगों के बीच आपसी विश्वास, सम्मान और सांस्कृतिक निकटता बढ़ाने में सहायक है। साथ ही, यह नई पीढ़ी को देश की प्राचीन परंपराओं से परिचित कराता है और उन्हें अपनी विरासत को सहेजने के प्रति जागरूक करता है।

FAQ

1- काशी तमिल संगमम क्या है?

केंद्र सरकार की 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' पहल के तहत आयोजित होने वाला यह एक महत्वपूर्ण आयोजन है।

2- काशी तमिल संगमम कार्यक्रम का क्या उद्देश्य है?

इस कार्यक्रम का उद्देश्य तमिलनाडु और काशी के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को पुनर्जीवित करना है, साथ ही दोनों क्षेत्रों के लोगों के बीच संवाद और आपसी समझ को बढ़ावा देना है।

3- इस साल काशी तमिल संगमम का आयोजन कब और कहां हो रहा है?

काशी तमिल संगमम के पांचवे संस्करण का आयोजन 28 नवंबर से 12 दिसंबर, 2026 तक वाराणसी में किया जाएगा।

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