करवाचौथ की इच्छा मार देती हैं विवाहिताएं, मथुरा मेें यह गांव नहीं निभाता है परंपरा

खबर सार :-

करवाचौथ पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। इस बीच कुछ अपवाद स्वरूप करवाचौथ नहीं मनाने वाले एक गांव की चर्चा हो रही है। यह उत्तर प्रदेश के जिला मथुरा में है। यहां एक हत्या के बाद उसकी पत्नी ने अपनी जान देते समय श्राप दिया था।
नवविवाहिता ने दिया था श्राप, मथुरा में 250 साल से नहीं मना करवाचौथ

खबर विस्तार : -

मथुरा, एक नवविवाहिता ने कभी श्राप दिया था। उसके बाद अपनी जान दे दी। यह कदम उसने पति की हत्या के बाद उठाया था। उसके बाद से गांव में करवाचौथ नहीं मनाया गया। नव विवाहिता की मौत के बाद मोहल्ले में कई घटनाएं ऐसी हुईं, जिसमें नवविवाहिता विधवा बन गई। लगातार ऐसे मामले सामने आए और युवकों की मौत की घटनाएं मन में बसने लगीं। हर घर में उस स्वर्गवासी युवती की चर्चा उसके श्राप के साथ होने लगी।

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करवाचौथ मनाने की परंपरा तोड़ दी गई

ज्यादा समय नहीं बीता, इलाके में करवाचौथ मनने की परंपरा तोड़ दी गई। आज भी किसी में ऐसा साहस नहीं होता, क्योंकि यह जीवनभर का रिश्ता साथ निभाने वाला होता है। इसको सामने लाकर कोई भी पारंपरिक व्यवस्था में नहीं आना चाहता।  करवाचौथ पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। यह हिंदुस्तान के बाहर भी मनाया जाता है। हर हिंदू विवाहिताएं करवाचौथ को पारंपरिक तरीके से मनाती हैं।

इस बीच कुछ अपवाद स्वरूप करवाचौथ नहीं मनाने वाले एक गांव की चर्चा हो रही है। यह गांव उत्तर प्रदेश के जिला मथुरा में है।  आज हर ओर करवाचौथ का उत्साह देखा जा रहा है। बाजारों में आज भी खरीददारी की गई है। करवाचौथ में सुहागिन महिलाएं दिनभर भूखी प्यासी रहती हैं। वह जब तब चांद का दीदार नहीं कर लेती, भोजन नहीं करती हैं। यह पर्व के रूप में मनाया जाता है। सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। लेकिन ऐसा गांव भी है, जहां पर करवाचौथ नहीं मनाया जाता है।

लगभग 250 साल से यहां ऐसा ही चल रहा 

उत्तर प्रदेश के जनपद मथुरा के सुरीर कस्बे में बघा मोहल्ला है। यह मोहल्ला आज के दिन लोगों के लिए चर्चा बन जाता है। लो लोग इसके बारे में जानते हैं, वह उदाहरण देकर इसका उदाहरण पेश करते हैंंंं। जिनको कुछ जानकारी है, वह पूरी जुटाना चाहते हैं। जिज्ञासा में जब लोग सवाल उठाते हैं तो पता चलता है कि लगभग 250 साल से यहां ऐसा ही चल रहा है। 

आखिर वजह क्या है कि इतने सालों से करवा चौथ से दूरियां बनी हुई हैं। जवाब मिलजा है कि कभी एक हादसा हुआ था और उसके बाद से इससे दूरियां बना ली गई हैं। वह हादसा कहां हुआ था? यह सवाल बड़ा गंभीर है। इसमें आखिर ऐसा क्या था कि 250 साल बाद भी मान्यताओं से जुड़े पर्व को सुहागिन नहीं मनाती हैं। बताया जाता है कि करीब 250 साल पहले नौहझील थाना क्षेत्र के रामनगला गांव से जुड़ा हुआ यह मामला है। एक ब्राह्मण युवक अपनी नवविवाहिता पत्नी को गौना कराकर घर ले जा रहा था।

पति की मौत देखकर शती होने का निर्णय लिया

उस समय भैंसा-बुग्गी ही सवारी हुआ करती थी। इसकी अच्छी कीमत लग जाती थी। इसीलिए लूट का इरादा कर रास्ते में सुरीर के पास कुछ लोगों ने उसको रोक लिया। उन लोगों ने बुग्गी रोका और भैंसे पर अपना हक जता दिया। दोनों पक्षों में विवाद बढत़ा गया। लुटेरे तो आसपास के रहे होंगे, लेकिन वह ब्राह्मण युवक बाहर का था। उसकी सभी ने मिलकर हत्या कर दी गई। वह दौर भी महिलाओं के लिए कठिन हुआ करता था। इसीलिए उस नवविवाहिता ने पति की मौत देखकर शती होने का निर्णय लिया।

पति की मौत वह सह नहीं सकी,  खुद को एक यातना देने का निर्णय पलभर में कर लिया। उसने अपनी मौत से पहले मोहल्ले को श्राप दिया उसके बाद अपनी जान दे दी। आसपास के लोग इसीलिए कभी कभी चर्चा में करवाचौथ का जिक्र करते हैं। गांव में और सभी पर्व, त्योहार और उत्सव मनाए जाते हैं। लेकिन चाहकर भी नवविवाहिता अपनी इच्छा दबा देती हैं। 

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