शादी का झांसा देकर ठगी: झांसी में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 610 लोग बने शिकार
खबर सार :-
झाँसी साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो शादी के झूठे वादे करके लोगों से पैसे ऐंठने में माहिर था। यह गिरोह उन्हें ब्लैकमेल करता था, उनकी वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देता था, जिसके चलते पीड़ित लोग बदनामी के डर से पुलिस के पास मदद के लिए नहीं जा पाते थे।
खबर विस्तार : -
झांसीः उत्तर प्रदेश के झांसी में साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो शादी का झांसा देकर लोगों से पैसे ऐंठने का काम कर रहा था। इस गिरोह ने अब तक 610 लोगों को अपना शिकार बनाया और उनसे लाखों रुपये की ठगी की। खास बात यह है कि ठगी के बाद पीड़ितों को ब्लैकमेल भी किया जाता था, जिससे वे बदनामी के डर से पुलिस तक नहीं पहुंच पाते थे।
लड़की पसंद आने के बाद लूटते थे रुपए
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह मुख्य रूप से 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के ऐसे पुरुषों को निशाना बनाता था, जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के साथ-साथ अकेलेपन से जूझ रहे होते थे। गिरोह के सदस्य उन्हें फोन कर शादी के लिए संपर्क करते, उनका बायोडाटा लेते और उनकी पसंद के अनुसार रिश्ते का झांसा देते थे। शुरुआत में 500 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस ली जाती थी, लेकिन लड़की पसंद आने के बाद उनसे हजारों रुपये वसूले जाते थे।
22 अप्रैल को पुलिस को सूचना मिली कि सीपरी बाजार क्षेत्र के सरयू बिहार कॉलोनी में एक रिहायशी मकान के टॉप फ्लोर पर कॉल सेंटर संचालित हो रहा है। जांच के बाद साइबर क्राइम और स्थानीय पुलिस टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए वहां छापा मारा। मौके पर 17 महिलाएं काम करती हुई पाई गईं, जिन्हें बाद में रेस्क्यू कर उनके परिजनों को सौंप दिया गया।
महिलाओं को दिया जाता था प्रशिक्षण
जांच में सामने आया कि यह कॉल सेंटर “शगुन मैरिज” के नाम से पिछले एक साल से संचालित हो रहा था। यहां काम करने वाली अधिकांश महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर थीं और उन्हें महज 5 हजार रुपये मासिक वेतन पर रखा गया था। उन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर ग्राहकों से बातचीत करने और उन्हें जाल में फंसाने का तरीका सिखाया जाता था।
गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद सुनियोजित थी। ग्राहक को आकर्षित करने के लिए लड़कियों की फोटो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए तैयार कर भेजी जाती थी। जब ग्राहक फोटो पसंद करता, तो उससे और पैसे मांगे जाते थे। पैसे मिलने के बाद उसे वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया जाता था।
9 बैंक खाते फ्रीज
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 30 कीपैड मोबाइल, 7 कंप्यूटर, 5 एंड्रॉयड मोबाइल, एक टैबलेट, 29 रजिस्टर और कई यूपीआई कोड बरामद किए हैं। पुलिस ने इस मामले में 9 बैंक खातों को सीज कर दिया है और करीब 50 हजार रुपये फ्रीज किए गए हैं।
इस गिरोह की मास्टरमाइंड हिना कौशर को गिरफ्तार कर लिया गया है, जो कॉल सेंटर का संचालन और लेखा-जोखा संभालती थी। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि इस पूरे नेटवर्क को सतीश छीपा और नीतू प्रजापति संचालित करते थे, जो फिलहाल फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अब तक मिले दस्तावेजों से पता चलता है कि गिरोह ने 30 से 40 लाख रुपये तक की ठगी की है। मामले की जांच जारी है और जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना है।
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