झांसी: विकसित बस्तियों को उजाड़ने की तैयारी? आवास विकास के खिलाफ किसानों ने फूँकी प्रतीकात्मक अर्थी
खबर सार :-
झांसी में आवास विकास की योजना संख्या 4 के खिलाफ किसानों और व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। विकसित क्षेत्र के अधिग्रहण के विरोध में प्रतीकात्मक अर्थी फूँककर प्रदर्शन किया गया। विस्तार से पढ़ें।
खबर विस्तार : -
झांसी में उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की प्रस्तावित योजना संख्या 4 को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अपनी बेशकीमती जमीनों और रोजी-रोटी को बचाने के लिए पिछोर, कोछाभंवर, टाकोरी और मुस्तरा के किसान व व्यापारी अब सड़कों पर उतर आए हैं। प्रशासन के "टालमटोल" रवैये से क्षुब्ध होकर प्रदर्शनकारियों ने आवास विकास की प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर अपना उग्र विरोध दर्ज कराया है।
प्रशासन की चुप्पी और किसानों का बढ़ता आक्रोश
पिछले कई महीनों से क्षेत्र के भूमि स्वामी और स्थानीय व्यापारी इस अधिग्रहण के खिलाफ लामबंद हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आवास विकास परिषद उनकी आपत्तियों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। हाल ही में हुई नियोजन समिति की तीन दिवसीय बैठक में सैकड़ों जमीन स्वामियों ने स्पष्ट रूप से अपनी भूमि देने से इनकार कर दिया था। समिति ने इन आपत्तियों पर फैसला सुनाने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई। विभाग की इसी देरी ने आग में घी डालने का काम किया है, जिसके परिणामस्वरूप अब यह आंदोलन उग्र रूप ले चुका है।
"विकसित क्षेत्र को उजाड़ना सरासर अन्याय"
आंदोलनकारियों का तर्क है कि जिस जमीन को आवास विकास परिषद अधिग्रहीत करना चाहता है, वह कोई खाली बंजर भूमि नहीं बल्कि पूरी तरह विकसित इलाका है। विरोध का मुख्य कारण यहाँ का मौजूदा बुनियादी ढांचा है, जहाँ मेडिकल कॉलेज और पैरामेडिकल कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण संस्थान पहले से ही स्थापित हैं। इतना ही नहीं, यह क्षेत्र एक व्यावसायिक हब के रूप में भी पहचान बना चुका है, जहाँ कई बड़े शोरूम, निजी अस्पताल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान सफलतापूर्वक चल रहे हैं। आवासीय दृष्टिकोण से भी यहाँ झांसी विकास प्राधिकरण और नगर निगम के अंतर्गत आने वाली कई बड़ी कॉलोनियां बसी हुई हैं। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि एक ऐसे बसे-बसाए क्षेत्र को उजाड़ना न केवल आर्थिक रूप से नुकसानदेह है, बल्कि यह हजारों परिवारों की आजीविका छीनने और उन्हें विस्थापित करने की एक अमानवीय कोशिश है।
अर्थी दहन के साथ दी चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने आवास विकास परिषद की नीतियों को जनविरोधी बताते हुए उसकी अर्थी निकाली और दहन किया। यह प्रतीकात्मक विरोध इस बात का संकेत है कि यदि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तुरंत नहीं रोका गया, तो यह आंदोलन प्रशासन के लिए बड़ी कानून-व्यवस्था की चुनौती बन सकता है। इस विरोध प्रदर्शन में मुस्तरा प्रधान रघुनाथ यादव, रानू टाकोरी, संजीव यादव सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक, किसान और काश्तकार मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की है कि प्रशासन उनके द्वारा विकसित किए गए इस क्षेत्र को मुक्त करे और अधिग्रहण की योजना को वापस ले। झांसी का यह मामला विकास बनाम विनाश की बहस को फिर से जिंदा कर रहा है। एक तरफ जहां आवास विकास परिषद नई आवास योजना लाने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ पहले से विकसित शहर के हिस्से को बचाना स्थानीय लोगों के लिए अस्तित्व की लड़ाई बन गया है। अब देखना यह है कि प्रशासन जनहित को देखते हुए क्या कदम उठाता है।
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