ईडी की झांसी में बड़ी कार्रवाई, पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव से जुड़े 11 ठिकानों पर छापेमारी

खबर सार :-

झांसी, लखनऊ समेत 11 ठिकानों पर ईडी ने पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छापेमारी की। जांच में 23.02 करोड़ रुपये की कथित आय से अधिक संपत्ति और शेल कंपनियों के नेटवर्क की जांच की जा रही है।
ईडी की झांसी में बड़ी कार्रवाई, पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव से जुड़े 11 ठिकानों पर छापेमारी

खबर विस्तार : -

झांसी: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उत्तर प्रदेश के झांसी, लखनऊ और अन्य स्थानों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए गरौठा के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव से जुड़े 11 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत प्रयागराज सब-जोनल कार्यालय द्वारा 8 जुलाई 2026 को की गई। ईडी के अनुसार, छापेमारी मनी लॉन्ड्रिंग और कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले में चल रही जांच का हिस्सा है।

विभिन्न स्थानों पर चला तलाशी अभियान

ईडी ने बताया कि इस मामले की जांच उत्तर प्रदेश सरकार के विजिलेंस स्थापना द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। एजेंसी का आरोप है कि जांच अवधि के दौरान पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव ने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक लगभग 23.02 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की। इसी आरोप की वित्तीय जांच के तहत विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।

प्रवर्तन निदेशालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दीप नारायण सिंह यादव के खिलाफ झांसी समेत उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें डकैती, हत्या के प्रयास, रंगदारी, गैर-इरादतन हत्या के प्रयास, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। ईडी का कहना है कि ये मामले पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराध की श्रेणी में आते हैं, जिसके आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की जा रही है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपी ने कथित रूप से आपराधिक गतिविधियों और अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर अपराध से अर्जित धन को वैध दिखाने के लिए कई कंपनियों का नेटवर्क तैयार किया। ईडी के मुताबिक, इनमें कुछ शेल कंपनियां भी शामिल थीं, जिनका इस्तेमाल धन के स्रोत को छिपाने और वित्तीय लेनदेन को वैध स्वरूप देने के लिए किया गया।

महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने का दावा

ईडी की जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि परिवार के सदस्यों, करीबी सहयोगियों और रिश्तेदारों के नाम पर चल और अचल संपत्तियां खरीदी गईं। एजेंसी के अनुसार, इन संपत्तियों के जरिए कथित अपराध से अर्जित धन को वैध संपत्ति के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। जांच में कई वित्तीय लेनदेन और संपत्ति खरीद से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है।

तलाशी अभियान के दौरान ईडी को अंतर-कंपनी लेनदेन, संदिग्ध वित्तीय ट्रांजैक्शन, तृतीय पक्ष समझौतों, लक्जरी संपत्तियों और कथित बेनामी अचल संपत्तियों से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है। एजेंसी के अनुसार, जांच के दौरान कुछ ऐसी कंपनियां भी सामने आईं जो केवल कागजों पर संचालित होती थीं और उनके वास्तविक व्यावसायिक संचालन के कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले।

ईडी ने बताया कि छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को जब्त कर लिया गया है। अब इन दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि धन के प्रवाह, संपत्तियों के स्वामित्व और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल ईडी बरामद दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है ताकि कथित अवैध संपत्तियों और लेनदेन की पूरी श्रृंखला का पता लगाया जा सके।

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