आग्रह के बाद भी नहीं मिला समय, जांच समिति की कार्रवाई पर शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल

खबर सार :-

जयपुर के चाकसू स्थित ग्राम पंचायत मण्डालिया मैदा में विकास कार्यों की जांच को लेकर शिकायतकर्ता कैलाश गुर्जर ने जांच समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। पारिवारिक आपात स्थिति के बीच 5 से 7 दिन का समय मांगने और निष्पक्ष जांच की मांग की।
आग्रह के बाद भी नहीं मिला समय, जांच समिति की कार्रवाई पर शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल

खबर विस्तार : -

जयपुर: जयपुर जिले के चाकसू क्षेत्र की ग्राम पंचायत मण्डालिया मैदा में विकास कार्यों की जांच को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। इस मामले के शिकायतकर्ता एवं पूर्व वार्ड पंच कैलाश गुर्जर ने जांच समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए जिला परिषद जयपुर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका आरोप है कि जिला परिषद के निर्देशों के अनुरूप उनकी उपस्थिति में निष्पक्ष भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया, जबकि वे पिछले करीब छह महीने से लगातार इसकी मांग कर रहे हैं।

कैलाश गुर्जर का कहना है कि उन्होंने शुरुआत से ही जांच समिति से अनुरोध किया था कि सभी विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन उनकी मौजूदगी में कराया जाए। इसके तहत वीडियो रिकॉर्डिंग, फोटोग्राफी, कोर कटिंग, लैब टेस्टिंग और गुणवत्ता परीक्षण जैसी प्रक्रियाएं भी पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएं। उनका कहना है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अब तक उनकी उपस्थिति में समुचित जांच नहीं कराई गई।

निष्पक्ष जांच की मांग

शिकायतकर्ता का दावा है कि जांच के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, फोटोग्राफ और विभिन्न बिंदुओं पर अपनी आपत्तियां समिति के समक्ष प्रस्तुत की हैं। उनके अनुसार कथित गलत जियो-टैग, विकास कार्यों के भुगतान में अनियमितताओं, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और अन्य तकनीकी मुद्दों की ओर भी समिति का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन इन बिंदुओं का मौके पर परीक्षण नहीं किया गया।

कैलाश गुर्जर ने बताया कि वर्तमान में उनके परिवार में गंभीर परिस्थितियां बनी हुई हैं। उनके अनुसार उनकी पत्नी गर्भावस्था के अंतिम चरण में हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण परिवार कठिन दौर से गुजर रहा है। इसी वजह से उन्होंने जांच समिति को लिखित आवेदन और व्हाट्सएप संदेश के माध्यम से केवल 5 से 7 दिनों का समय देने का अनुरोध किया था। उनका कहना है कि उन्होंने समिति के सदस्यों से फोन पर भी मानवीय आधार पर कुछ दिनों की मोहलत देने की अपील की, लेकिन उनके आवेदन पर विचार करने के बजाय लगातार नए पत्र और नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

शिकायतकर्ता का कहना है कि वह जांच से बचना नहीं चाहते, बल्कि चाहते हैं कि पूरी प्रक्रिया जिला परिषद जयपुर के निर्देशों के अनुरूप निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों के आधार पर पूरी हो। उनका तर्क है कि जब पिछले छह माह के दौरान उनकी उपस्थिति में भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया, तो पारिवारिक आपात स्थिति को देखते हुए कुछ दिनों का समय देने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी।

लगातार नोटिस जारी करने का आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी परिस्थितियों की जानकारी होने के बावजूद जिस तरह लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि अंतिम जांच प्रतिवेदन जल्दबाजी में तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उनका कहना है कि इससे जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

इस पूरे मामले को लेकर कैलाश गुर्जर ने जिला परिषद जयपुर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को विस्तृत आवेदन भी भेजा है। आवेदन में उन्होंने मांग की है कि जांच समिति को निर्देश दिए जाएं कि शिकायतकर्ता की उपस्थिति में प्रत्येक विकास कार्य का भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही वीडियो रिकॉर्डिंग, फोटोग्राफी, कोर कटिंग, लैब टेस्टिंग और गुणवत्ता परीक्षण जैसी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ही अंतिम जांच प्रतिवेदन तैयार किया जाए।

कैलाश गुर्जर ने अपने आवेदन में यह भी कहा है कि परिस्थितियां सामान्य होते ही वह स्वयं जांच में शामिल होकर प्रत्येक बिंदु पर समिति के साथ मौके पर सहयोग करेंगे। उन्होंने दोहराया कि उनका उद्देश्य किसी भी प्रकार से जांच में देरी करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों के आधार पर संपन्न हो, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

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