डिजिटल और पारदर्शी बनेगी रेलवे की पार्सल व्यवस्था, 5 साल तक सुरक्षित रहेगा बुकिंग रिकॉर्ड

खबर सार :-

भारतीय रेलवे ने पार्सल मैनेजमेंट सिस्टम के लिए नई डेटा रिटेंशन पॉलिसी लागू की है। अब पार्सल बुकिंग का रिकॉर्ड 5 वर्ष तक सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे शिकायतों की जांच, बीमा दावों और पार्सल ट्रैकिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी।
डिजिटल और पारदर्शी बनेगी रेलवे की पार्सल व्यवस्था, 5 साल तक सुरक्षित रहेगा बुकिंग रिकॉर्ड

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने पार्सल बुकिंग व्यवस्था को अधिक डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेलवे बोर्ड ने पार्सल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएमएस) के लिए नई डेटा रिटेंशन पॉलिसी लागू करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब पार्सल बुकिंग से संबंधित रिकॉर्ड को पांच वर्ष तक सुरक्षित रखा जाएगा। इससे पार्सल ट्रैकिंग, शिकायतों की जांच, बीमा दावों के निस्तारण और न्यायिक मामलों में रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में काफी सुविधा होगी।

क्या है नई पॉलिसी

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अब तक निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद पार्सल से संबंधित डेटा सिस्टम से हट जाता था। इसके कारण कई मामलों में जांच प्रभावित होती थी और रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने से यात्रियों, व्यापारियों तथा बीमा कंपनियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नई नीति लागू होने के बाद इन समस्याओं में काफी कमी आने की उम्मीद है।

नई डेटा रिटेंशन पॉलिसी के अनुसार, पार्सल से जुड़े सभी ट्रांजैक्शन डेटा को अंतिम गतिविधि की तिथि से लगभग छह माह तक ऑनलाइन सर्वर पर सुरक्षित रखा जाएगा। इसके बाद पूरी तरह डिलीवर हो चुके पार्सलों का डेटा डेटा वेयरहाउस में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, जहां इसे पांच वर्षों तक सुरक्षित रखा जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर इस रिकॉर्ड को आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा।

रेलवे का मानना है कि लंबे समय तक रिकॉर्ड सुरक्षित रहने से शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता बढ़ेगी। यदि किसी पार्सल के गुम होने, क्षतिग्रस्त होने या डिलीवरी से जुड़े विवाद का मामला सामने आता है, तो संबंधित रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध रहेगा। इससे जांच एजेंसियों, रेलवे अधिकारियों और बीमा कंपनियों को तथ्यों का सत्यापन करने में मदद मिलेगी।

कर्मचारियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण

रेलवे बोर्ड ने इस नई व्यवस्था को लागू करने की जिम्मेदारी सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम (सीआरआईएस) को सौंपी है। सीआरआईएस पार्सल मैनेजमेंट सिस्टम में आवश्यक तकनीकी बदलाव करेगा, ताकि डेटा का सुरक्षित भंडारण और जरूरत पड़ने पर उसकी रिकवरी सुनिश्चित की जा सके।

नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए रेलवे कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके साथ ही डेटा के रखरखाव, संग्रहण, रिकवरी और उपयोग से संबंधित विस्तृत मैन्युअल तैयार किया जाएगा, ताकि सभी रेलवे जोन और संबंधित कर्मचारी एक समान प्रक्रिया का पालन कर सकें।

उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि रेलवे अपने पार्सल मैनेजमेंट सिस्टम को आधुनिक और अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए लगातार सुधार कर रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुरूप नई डेटा रिटेंशन पॉलिसी लागू की जाएगी और सभी आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

रेलवे का मानना है कि इस नई डिजिटल व्यवस्था से पार्सल सेवा अधिक भरोसेमंद बनेगी, रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार होगा और यात्रियों व व्यापारिक ग्राहकों को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी सेवाएं मिल सकेंगी।

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