Ganga Expressway: सीएम योगी का बड़ा तोहफा, 15 दिनों तक गंगा एक्सप्रेस वे पर नहीं लगेगा टोल
खबर सार :-
Ganga Expressway: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा एक्सप्रेस-वे पर 15 दिनों तक टोल टैक्स न लेने के निर्देश दिए हैं। सीएम का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोग इस एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता व सुविधाओं का अनुभव ले सकें।
खबर विस्तार : -
लखनऊ: शुक्रवार को जनहित में एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि गंगा एक्सप्रेस-वे अपनी कमर्शियल ऑपरेशन डेट (COD) से शुरू होकर 15 दिनों तक टोल-फ्री रहेगा। इस फैसले के तहत राज्य के लोग बिना किसी शुल्क के UP के सबसे लंबे और सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे का अनुभव कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री के निर्देशों पर तत्काल कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने परियोजना के कंसेशनर्स, IRB इंफ्रास्ट्रक्चर और अडानी इंफ्रास्ट्रक्चर को 15 दिनों की अवधि के लिए टोल वसूली स्थगित करने के निर्देश जारी किए हैं। UPEIDA द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस अवधि के दौरान यात्रियों से किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। गंगा एक्सप्रेस-वे को आम जनता के उपयोग के लिए पूरी तरह से तैयार घोषित कर दिया गया है।
गुणवत्ता व सुरक्षा से समझौता नहीं
योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शुरुआती चरण में अधिक से अधिक लोगों को इस अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे का अनुभव करने का अवसर मिले। इस 594 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे पर टोल फ्री यात्रा करने का अवसर लोगों को इसकी गुणवत्ता, गति और सार्वजनिक सुविधाओं का प्रत्यक्ष अनुभव करने में सक्षम बनाएगा। यह पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि एक्सप्रेसवे पर जनता के विश्वास को भी मजबूत करेगी। UPEIDA ने स्पष्ट किया है कि टोल-फ्री अवधि के दौरान भी, संचालन और रखरखाव से संबंधित सभी मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। सड़क की गुणवत्ता, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, या प्रदान की जाने वाली सुविधाओं के मामले में बिल्कुल भी कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
12 जिलों को जोड़ता है एक्सप्रेस-वे
मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह एक्सप्रेस-वे राज्य के 12 जिलों को जोड़ता है और इसे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक 'गेम-चेंजर' (युग-परिवर्तक) के रूप में सराहा जा रहा है। यह 15-दिवसीय टोल छूट न केवल आम जनता को राहत प्रदान करेगी, बल्कि इस मेगा प्रोजेक्ट के आसपास एक सकारात्मक माहौल भी तैयार करेगी। इस फ़ैसले को राज्य सरकार की ‘जनहित सर्वोपरि’ नीति का एक साकार रूप माना जा रहा है, जो न केवल राज्य के भीतर बुनियादी ढाँचे के विकास को प्राथमिकता देती है, बल्कि अपने नागरिकों के लिए ‘अच्छा महसूस कराने वाले’ माहौल को सुनिश्चित करने पर भी ज़ोर देती है।
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